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आइसोलेशन कोचों में रखे जाएंगे कोरोना संक्रमित
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म छह पर खड़ी आइसोलेशन ट्रेन।
- फोटो : REPORTERS
झांसी। कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए आगे मरीजों को आइसोलेशन कोचों में रखा जा सकता है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म छह पर आइसोलेशन ट्रेन तैयार है। रेलवे अस्पताल के बेड भरने के बाद इनका उपयोग किया जा सकता है।
कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में अब तक 1,238 मरीज सामने आ चुके हैं और इनमें से 778 एक्टिव पॉजिटिव मरीज हैं। इन मरीजों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के अलावा बड़ागांव और बरुआसागर के स्वास्थ्य केंद्रों में भी रखा जा रहा है। इसके अलावा वे मरीज जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं या बहुत क्षीण लक्षण हैं, उन्हें होटलों में भी रखा जा रहा है। अब ऐसे मरीजों को रेलवे अस्पताल में भी भर्ती किया जा रहा है। यहां 100 बेड का अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है।
वहीं, मरीजों की संख्या जिस हिसाब से बढ़ रही है, उसे देखते हुए आगे आइसोलेशन कोचों में भी उनको रखा जा सकता है। प्रत्येक कोच में 8 आइसोलेशन वार्ड (नौ बेड) तैयार किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकेगा। बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया गया है।
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- आइसोलेशन कोच बनकर तैयार हैं। जिला प्रशासन की मांग पर उनको सौंपा जाएगा। मनोज कुमार सिंह, पीआरओ।
एक कोच पर ये आता है खर्च
प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर 77678 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो बोतल होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, आक्सीजन सिलिंडर ब्रेकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष होगा। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए जा रहे हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया जा रहा है।
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कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिले में अब तक 1,238 मरीज सामने आ चुके हैं और इनमें से 778 एक्टिव पॉजिटिव मरीज हैं। इन मरीजों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के अलावा बड़ागांव और बरुआसागर के स्वास्थ्य केंद्रों में भी रखा जा रहा है। इसके अलावा वे मरीज जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं या बहुत क्षीण लक्षण हैं, उन्हें होटलों में भी रखा जा रहा है। अब ऐसे मरीजों को रेलवे अस्पताल में भी भर्ती किया जा रहा है। यहां 100 बेड का अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है।
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वहीं, मरीजों की संख्या जिस हिसाब से बढ़ रही है, उसे देखते हुए आगे आइसोलेशन कोचों में भी उनको रखा जा सकता है। प्रत्येक कोच में 8 आइसोलेशन वार्ड (नौ बेड) तैयार किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन स्थिति में एक मरीज को रखा जा सकेगा। बोगियों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए शयनयान एवं सामान्य श्रेणी के कोच को परिवर्तित किया गया है।
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- आइसोलेशन कोच बनकर तैयार हैं। जिला प्रशासन की मांग पर उनको सौंपा जाएगा। मनोज कुमार सिंह, पीआरओ।
एक कोच पर ये आता है खर्च
प्रत्येक आइसोलेशन कोच पर 77678 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो बोतल होल्डर, दो कपड़े टांगने के हुक, आक्सीजन सिलिंडर ब्रेकेट, पैर वाले तीन कूड़ेदान, स्नानघर में व्यवस्था (स्टूल, मग, बाल्टी), हर कोच में एक नर्स और चिकित्सक के लिए अलग से कक्ष होगा। कोच में प्लास्टिक के चादर लगाए जा रहे हैं। मेडिकल उपकरणों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली के स्विच व बीच की बर्थ को हटाया जा रहा है।