संविदा कर्मी खुश तो घर में जलेगी बिजली
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झांसी। विद्युत अफसरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उपभोक्ताओं को नया संयोजन लेने के लिए लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने एक साल पहले नए संयोजन लेते समय दलालों से बचाने व कागजी खानापूरी कम करने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया था। मगर, प्रक्रिया तो सरल नहीं हुई, हां संविदा कर्मियों ने अवश्य दलाल की भूमिका अदा करनी शुरू कर दी है। उनकी राय के बिना नया संयोजन मिलना संभव नहीं है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को नए संयोजन लेते समय दलालों से बचाने व कागजी खानापूरी कम करने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया था। विभाग ने इसके लिए एक पेज का व्यक्तिगत बंध-पत्र जारी किया था, जिसे उपभोक्ता को स्वयं भरकर उपखंड अधिकारी के पास जमा करना था। उपभोक्ता आवेदन में जो लोड दर्शायेगा, वह उसकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी। अगर जांच में लोड अधिक पाया जाता है तो कर निर्धारण होगा। उपखंड अधिकारी आवेदन संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता के पास पहुंचाएंगे। अवर अभियंता तय करेगा कि मानकों के हिसाब से कनेक्शन दिया जा सकता है कि नहीं। इसमें निकट के विद्युत खंभे से 40 मीटर से अधिक दूरी नहीं होनी चाहिए, संबंधित घर पर कोई पूर्व का बकाया नहीं होना चाहिए व नई कालोनी ऊर्जीकृत होनी चाहिए, तभी विद्युत कनेक्शन दिया जा सकता है।
कनेक्शन देने की स्थिति में ही प्रोसेसिंग फीस जमा करवाई जाएगी। मगर एक साल बाद भी यह योजना सामान्य रूप से संचालित नहीं हो सकी है। दरअसल, विभाग ने नियम तो बना दिया, मगर इन दिनों यह मानक संविदा कर्मी की राय पर पूरा हो रहे हैं। अवर अभियंताओं ने अपने सब स्टेशन पर कार्यरत संविदा कर्मचारियों में ही एक- दो को चुनकर संयोजन स्थल की जांच के लिए लगा रखा है। इस कारण जेई की जगह मौके पर पहुंचने वाले संविदा कर्मी ही तय करते हैं कि उपभोक्ता को संयोजन दिया जा सकता है कि नहीं। ऐसे में अगर संविदा कर्मी का सम्मान न रखा गया तो उपभोक्ता के लिए संयोजन लेना किसी मुसीबत से कम नहीं है। इस समस्या से हर माह दर्जनों नए संयोजन लेने वाले उपभोक्ता दो चार हो रहे हैं।
अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि नए संयोजन लेने में जेई को ही मौके पर जाकर स्थिति देखनी जरूरी है। अगर कोई संविदा कर्मी बीच में दखल या परेशान कर रहा है तो संयोजन लेने वाले उसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से कर सकते हैं।