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‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी’
jhansi
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:12 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
हिन्दी दिवस के अवसर पर निराला साहित्य संगम समिति ने काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई तथा वक्ताओं ने राष्ट्र भाषा के विकास पर बल दिया। वरिष्ठ कवि दिनेश चंद्र ‘गुरुदेव’ के मुख्य आतिथ्य एवं डा. बृजमोहन दुबे की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में प्रवक्ता राजेश तिवारी एवं सुरेंद्र कुमार खरे विशिष्ट अतिथि रहे।
राकेश शरण श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना के बाद अपनी रचना सुनाई, ‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी।’ जे आलम ने हिन्दी हिम की नदी, इसमें गोता जिसने लगाया है। अभिव्यक्ति के भव सागर में मोती उसी ने पाया है।’ मुख्य अतिथि दिनेश गुरुदेव ने ‘आकाश में जितने तारे हैं सब एक से एक निराले हैं।’ राजेश तिवारी ने ‘इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जाएगा’ सुनाया। इसके अलावा गोविंद वर्मा, मनोहर लाल, राजीव रिछारिया, अखिलेश श्रीवास्तव, सुधीर तिवारी, जगदीश शरण झा, अंबिका चरन झा, भगवत नारायण समाधिया, आशाराम कुशवाहा, अनिल सरावगी, राजाबाबू सोनी, महावीर कुशवाहा, अमृतलाल सेन, मनोज सोनी, बृजमोहन नगरिया आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार व्यक्त डा. आत्माराम बादल ने किया।
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राकेश शरण श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना के बाद अपनी रचना सुनाई, ‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी।’ जे आलम ने हिन्दी हिम की नदी, इसमें गोता जिसने लगाया है। अभिव्यक्ति के भव सागर में मोती उसी ने पाया है।’ मुख्य अतिथि दिनेश गुरुदेव ने ‘आकाश में जितने तारे हैं सब एक से एक निराले हैं।’ राजेश तिवारी ने ‘इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जाएगा’ सुनाया। इसके अलावा गोविंद वर्मा, मनोहर लाल, राजीव रिछारिया, अखिलेश श्रीवास्तव, सुधीर तिवारी, जगदीश शरण झा, अंबिका चरन झा, भगवत नारायण समाधिया, आशाराम कुशवाहा, अनिल सरावगी, राजाबाबू सोनी, महावीर कुशवाहा, अमृतलाल सेन, मनोज सोनी, बृजमोहन नगरिया आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार व्यक्त डा. आत्माराम बादल ने किया।
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