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विरासत एवं कब्जे : भंडेरी-बड़ागाव गेट के बीच आठ सौ मीटर में खत्म हो गया परकोटा
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- किस्त दो
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ऐतिहासिक भंडेरी गेट के पास परकोटे का नामो-निशान ही खत्म कर दिया गया है। भंडेरी से बड़ागांव गेट के बीच करीब आठ सौ मीटर में परकोटे को जगह-जगह तोड़ा जा चुका है। कुछ लोगों ने इसे तोड़कर अपना कब्जा जमा लिया तो कहीं पर आने जाने का रास्ता बना लिया गया है। फूल बाग में परकोटे को तोड़कर प्लाटिंग तक कर दी गई लेकिन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण का जिम्मा संभालने वाले महकमे के अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अभी भी बचे-खुचे परकोटे को मटियामेट करने की कोशिश की जा रही है। संरक्षण न होने की वजह से अब परकोटे जगह-जगह से धसकते जा रहे हैं।
झांसी शहर को सुरक्षित करने के लिए बने परकोटे को तोड़ने में नगर निगम भी पीछे नहीं रहा। भंडेरी गेट के पास फूल बाग में पानी निकालने के लिए लंबा नाला बनाने से बचने के लिए निगम प्रशासन ने भी परकोटे के एक हिस्से को तोड़कर खत्म कर दिया। नगर निगम ने न सिर्फ यहां से एक नाला बना दिया बल्कि एक पुलिया भी बना दी। इस पुलिया की वजह से मिले रास्ते ने यहां अवैध प्लाटिंग करने वालों की मदद की। यहां जगह-जगह करीब आठ सौ मीटर तक परकोटे को तोड़ा जा चुका है। परकोटे को गिराकर उसकी जगह निर्माण करा लिया गया। यहां धीरे-धीरे परकोटे को नष्ट करने का प्रयास चल रहा है।
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वहीं, भंडेरी-उनाव गेट के बीच परकोटा अभी तक बचा है लेकिन इससे सटाकर सैकड़ों मकान बन चुके हैं। इस रास्ते पर चलने से परकोटा नजर ही नहीं आता। कई लोगों ने अपने घर के भीतर ही परकोटे को मिला लिया।
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भंडेरी गेट के रास्ते ही महारानी लक्ष्मीबाई ने छोड़ी थी झांसी
भंडेरी गेट सर्वाधिक ऐतिहासिक महत्व का है। इतिहासविद् आलोक शर्मा बताते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब अंग्रेजों ने झांसी के किले को घेर लिया था तब अपनी सेना को पुनर्गठित करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ इसी रास्ते से कालपी रवाना हुई थीं। उनके साथ निकली टुकड़ी का एक हिस्सा भंडेरी गेट के रास्ते झांसी से बाहर निकलकर दतिया की ओर चला गया। इस रास्ते से निकलने के बाद रानी लक्ष्मीबाई दोबारा झांसी नहीं लौटीं। प्रसिद्ध उपन्यासकार वृंदावन लाल वर्मा ने अपने उपन्यास में इस गेट का जिक्र करते हुए लिखा है कि यहां से रानी लक्ष्मीबाई के गुजरने के बाद स्थानीय लोगों ने इस गेट को बंदकर दिया था। करीब 50 साल तक यह गेट बंद रहा।