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हैंडबॉल: प्रतिस्पर्धा कम, उम्मीदें अधिक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:08 AM IST
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sports, jhansi news
- फोटो : demo
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क्रिकेट, एथलेटिक्स, बैडमिंटन की तरह हैंडबॉल में प्रतिस्पर्धा ज्यादा नहीं है। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो निम्न मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों से निकलकर आए और हैंडबॉल में अपना शानदार कॅरियर बनाया। यह बात ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित प्रदेशीय सब जूनियर बालक हैंडबॉल प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभाग करने आए खिलाड़ियों ने अमर उजाला से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि हैंडबॉल का जुनून ऐसा कि कई मर्तबा भूखे पेट रहकर प्रैक्टिस करते है।
चुपचाप चला जाता हूं खेलने
कई बार पिताजी खेलने को मना करते है। लेकिन चुपचाप बिना बताए प्रैक्टिस करने स्टेडियम चला जाता हूं। स्टेडियम में कोच पूरा सहयोग करते है। खेल सामग्री देते है, जिसके चलते खेल की दुनिया में जमा हुआ हूं।
विष्णु सिंह, उरई
चयन की उम्मीद है ज्यादा
पडोस के भाई की नौकरी उन्हें हैंडबॉल खेल की बदौलत मिली। यह ज्यादा प्रचार-प्रसार वाला गेम नहीं है। ऐसे में हैंडबॉल टीम में जल्द चयन की उम्मीद रहती है, जो सुखद भविष्य का संकेत है।
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निहाल जायसवाल, सुल्तानपुर
मिलने लगी हैं सुविधाएं
खेलों में संसाधन और सुविधाएं खिलाड़ियों को पहले से ज्यादा उपलब्ध होने लगे है। कई मर्तबा अभिभावक भी कहते है कि खेलने जाओ। इसलिए हैंडबॉल में सुबह-शाम 6 से अधिक घंटे प्रैक्टिस करते हैं।
मोहम्मद कामरान, सुल्तानपुर
बाक्स
पहले दिन नहीं जुट सके पूरे खिलाड़ी
खेल विभाग के अनुसार 11 सितंबर से स्टेडियम में प्रदेशीय सब जूनियर हैंडबाल प्रशिक्षण शिविर लगना था, लेकिन पहले दिन 10 से ज्यादा खिलाड़ी इसमें नजर नहीं आए। कैंप के लिए 24 खिलाड़ियों का चयन किया गया था। हालांकि विभाग का कहना है कि सभी चयनित खिलाड़ी बुधवार तक शामिल हो जाएंगे।
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क्रिकेट, एथलेटिक्स, बैडमिंटन की तरह हैंडबॉल में प्रतिस्पर्धा ज्यादा नहीं है। कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो निम्न मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों से निकलकर आए और हैंडबॉल में अपना शानदार कॅरियर बनाया। यह बात ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित प्रदेशीय सब जूनियर बालक हैंडबॉल प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभाग करने आए खिलाड़ियों ने अमर उजाला से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि हैंडबॉल का जुनून ऐसा कि कई मर्तबा भूखे पेट रहकर प्रैक्टिस करते है।
चुपचाप चला जाता हूं खेलने
कई बार पिताजी खेलने को मना करते है। लेकिन चुपचाप बिना बताए प्रैक्टिस करने स्टेडियम चला जाता हूं। स्टेडियम में कोच पूरा सहयोग करते है। खेल सामग्री देते है, जिसके चलते खेल की दुनिया में जमा हुआ हूं।
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विष्णु सिंह, उरई
चयन की उम्मीद है ज्यादा
पडोस के भाई की नौकरी उन्हें हैंडबॉल खेल की बदौलत मिली। यह ज्यादा प्रचार-प्रसार वाला गेम नहीं है। ऐसे में हैंडबॉल टीम में जल्द चयन की उम्मीद रहती है, जो सुखद भविष्य का संकेत है।
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निहाल जायसवाल, सुल्तानपुर
मिलने लगी हैं सुविधाएं
खेलों में संसाधन और सुविधाएं खिलाड़ियों को पहले से ज्यादा उपलब्ध होने लगे है। कई मर्तबा अभिभावक भी कहते है कि खेलने जाओ। इसलिए हैंडबॉल में सुबह-शाम 6 से अधिक घंटे प्रैक्टिस करते हैं।
मोहम्मद कामरान, सुल्तानपुर
बाक्स
पहले दिन नहीं जुट सके पूरे खिलाड़ी
खेल विभाग के अनुसार 11 सितंबर से स्टेडियम में प्रदेशीय सब जूनियर हैंडबाल प्रशिक्षण शिविर लगना था, लेकिन पहले दिन 10 से ज्यादा खिलाड़ी इसमें नजर नहीं आए। कैंप के लिए 24 खिलाड़ियों का चयन किया गया था। हालांकि विभाग का कहना है कि सभी चयनित खिलाड़ी बुधवार तक शामिल हो जाएंगे।