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जीआरपी का नया पैंतरा, अगर ट्रेन से नहीं उतारते तो ननों पर हो सकता था हमला
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झांसी। धर्मांतरण के शक में बीते सप्ताह ट्रेन से उतारी गईं नन व किशोरियों के मामले में जीआरपी बचाव की मुद्रा में आ गई है। जीआरपी ने सुरक्षा का हवाला देते हुए पैंतरा चला है। सारा ठीकरा अभाविप कार्यकर्ताओं पर फोड़ दिया है। जांच रिपोर्ट में कहा है कि अगर ट्रेन से उतारकर ननों को थाने नहीं लाते तो शिकायत करने वाले अभाविप कार्यकर्ता उनपर हमला कर सकते थे। अफसरों के इस हथकंडे के बावजूद माना जा रहा है कि जीआरपी बुरी तरह घिर गई है। दोषी पुलिस कर्मियों पर गाज गिरना तय है।
धर्मांतरण की सूचना पर नन व किशोरियों को ट्रेन से उतारे जाने के मामले में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक खलबली मची हुई है। बृहस्पतिवार को लखनऊ से प्रभारी एसपी सोमित्र यादव नेे झांसी पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच की। एसपी ने उत्कल एक्सप्रेस से उतारने से लेकर थाने लाने व पूछताछ करने की सिलसिलेवार तरीके से जांच की। जीआरपी के झांसी के अफसरों द्वारा बनाई गई जांच रिपोर्ट को भी तलब किया। जांच रिपोर्ट में जीआरपी ने उल्लेख किया है कि नन व किशोरियों को यदि ट्रेन से नहीं उतारते तो सूचना देने वाले हमला कर सकते थे। उनकी सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि जीआरपी को अपनी सुरक्षा पर भरोसा नहीं था? क्या जीआरपी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आठ से दस कार्यकर्ताओं से निपटने को तैयार नहीं थी? ऐसे कई सवाल दिन भर खड़े होते रहे, लेकिन जवाब देने को कोई भी तैयार नहीं हुआ।
पूरे मामले की जांच की जा रही है। जीआरपी झांसी की जांच रिपोर्ट भी देखी है। हर पहलुओं को खंगाला जा रहा है। सभी के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सौमित्र यादव, प्र्रभारी एसपी - जीआरपी
ट्रेन में जीआरपी व आरपीएफ के सामने खूब हुई बदसलूकी
झांसी। उत्कल एक्सप्रेस में नन व किशोरियों को किस तरह की बदसलूकियों का सामना करना पड़ा यह वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है। एक पुलिस वाला वीडियो में कह रहा है कि जल्दी आओ रे, तुम्हें उठाने केे लिए टाइम नहीं हमारे पास। अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी महिलाओं के लिए किया गया।
ट्रेन से उतारने के दौरान कई वीडियो बनाए गए थे। पांच वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। ट्रेन में जीआरपी व आरपीफ के सामने नन व किशोरियों बेगुनाही के सुबूत दिखाती रहीं, लेकिन किसी ने नहीं माना। पुलिस के सामने खूब बदसलूकी हुई। यह वीडियो में साफ सुनाई व नजर आ रहा है। इसके बाद भी उनको अपराधियों की तरह स्टेशन पर उतारकर लाया गया। प्लेटफार्म पर लोगों की खासी भीड़ थी। यह लोग भी वीडियो में साफ नजर आ रहे हैं। दबाव बनाकर सीट से उठाया गया। स्टेशन से थाने तक लाते समय अपराधियों की तरह वीडियो बनते रहे। यहां भी जीआरपी के साथ आरपीएफ तमाशा देखती रही। लेकिन, किसी ने भी रोकने व टोकने की जहमत नहीं उठाई।
यह था पूरा मामला
19 मार्च को ट्रेन नंबर 08478 उत्कल एक्सप्रेस के कोच नंबर बी-2 में लीविया थोमस, हेमलता (ईसाई धर्म की नन) और श्वेता व बी तरंग हज़रत निज़ामुद्दीन से राउरकेला (ओडिशा) के लिए यात्रा कर रही थीं। ट्रेन के कोच नंबर बी-1 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी झांसी आ रहे थे। कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण के शक में किशोरियों को ले जाने की सूचना रेलवे के 182 नंबर पर आरपीएफ को दी थी। कार्यकर्ताओं की सूचना के बाद एक संगठन के नेता भी झांसी स्टेशन पहुंच गए थे। आरपीएफ से सूचना मिलने के बाद जीआरपी ने भी प्लेटफार्म पर पहुंचकर शाम तकरीबन साढ़े सात बजे चारों को ट्रेन से उतार लिया था। थाने लाकर साढ़े तीन घंटे की जांच के बाद सभी को जाने दिया गया था।
वीडियो नंबर 1
- तेरह सेकंड का एक वीडियो सामने आया है। ट्रेन से उतारकर थाने लाते समय लोगों ने खूब वीडियो बनाए। एक महिला ने कहा कि फोटो क्यों बना रहे हो भैया, इस पर एक युवक बोला, वीडियो बना रहे।
वीडियो नंबर 2
- छह सेकंड का यह वीडियो प्लेटफार्म का है। प्लेटफार्म पर काफी भीड़ है। नन व किशोरियां डरी सहमी प्लेटफार्म पर खड़ी हैं। उनके पीछे काफी लोग नजर आ रहे हैं।
वीडियो नंबर 3
- 25 सेकंड के वीडियो में उनसे कहा जा रहा है कि अगर सही है तो घर भेज दिया जाएगा। एक व्यक्ति कह रहा है कि बाहर चलो, बाहर। नेतागिरी नहीं करते तो कैसे पता चलता। जल्दी आओ रे, टाइम नहीं तुम्हारे लिए। जल्दी उठाओ इसको।
वीडियो नंबर 4
- 17 सेकंड के वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि हम लोग भी हिंदू संस्था से काम करते हैं। दो लोग उतर गए हैं, तुम लोग भी उतरो। वह बार-बार पूछती रहीं कि दो लोग और कहां हैं। उनसे कहा जा रहा है कि प्लेटफार्म पर उतर गई हैं, तुम लोग भी उतर जाओ।
वीडियो नंबर 5
- 44 सेकंड के वीडियो में सुबूत मांगे गए। एक किशोरी ने अपना आईकार्ड भी दिखाया। वह बोलती रही कि वह क्रिश्चियन हैं। आईडी कार्ड दिखाते नजर आ रही है। एक व्यक्ति बोल रहा है कि झूठ बोल रही है।
एसपी व रेलवे ने भी शुरू की जांच
- सीओ, इंस्पेक्टर से लेकर आरपीएफ कर्मियों के दर्ज हुए बयान
झांसी। बृहस्पतिवार का दिन जांच के नाम रहा। इस प्रकरण में जीआरपी के साथ-साथ रेलवे ने अपनी उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
पूरा प्रकरण गृह मंत्रालय पहुंच चुका है। गृह मंत्रालय से लगातार जानकारी मांगी जा रही है। आनन-फानन में आईजी रेलवे सत्येंद्र कुमार सिंह ने जांच के लिए प्रभारी एसपी को झांसी भेजा। एसपी दिन भर मामले की पड़ताल करते रहे। जांच के दौरान एसपी ने जीआरपी सीओ, इंस्पेक्टर से लेकर आरपीएफ कर्मियों के दर्ज बयान दर्ज किए। बयान में सिलसिलेवार तरीके से घटनाक्रम का हाल जानने के बाद एक-एक बयान लिए। इसके बाद स्टेशन पहुंचकर रेलकर्मियों से भी घटना की जानकारी ली। प्लेटफार्म पर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉडिंग को देखा। इसको जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है। दिन भर जांच का सिलसिला चलता रहा।
इधर, रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। रेलवे ने भी अपनी तरफ से उच्च स्तरीय जांच शुरू करा दी है। प्रयागराज अफसरों के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। आनन-फानन रेलवे की जांच टीम झांसी पहुंची। टीम ने अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। घटना वाले दिन स्टेशन पर पर तैनात रेलकर्मियों से पूछताछ की। टीम ने भी स्टेशन पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी।
ट्रेन तक कैसे पहुंचे लोग, किसी ने रोका टोका क्यों नहीं
झांसी। कोरोना काल के बाद से रेलवे ने नियमों में बदलाव किए हैं। कंफर्म टिकट वाले यात्रियोें को ही स्टेशन के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार की शाम उत्कल एक्सप्रेस तक लोग कैसे पहुंच गए? इन लोगों को किसी ने रोका-टोका क्यों नहीं? रेलवे की सुरक्षा के साथ-साथ इस घटनाक्रम पर आरपीएफ से लेेकर रेलकर्मियों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी, आरपीएफ के साथ रेलकर्मियों की भी है। शुक्रवार की शाम जो हुआ, उसने स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने उत्कल एक्सप्रेस पर पहुंचकर हंगामा कराया। कार्रवाई करने की बजाय आरपीएफ व जीआरपी तमाशाबीन बनकर लोगों का ही साथ देती रही। किसी से न तो टिकट पूछा गया और न ही उनसे किसी प्रकार की कोई जानकारी ली गई। वायरल हो रहे वीडियो में प्लेटफार्म पर लोगों की भीड़ नजर आ रही है। आरपीएफ पर भी खूब सवाल खड़े हो रहे हैं।
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धर्मांतरण की सूचना पर नन व किशोरियों को ट्रेन से उतारे जाने के मामले में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक खलबली मची हुई है। बृहस्पतिवार को लखनऊ से प्रभारी एसपी सोमित्र यादव नेे झांसी पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच की। एसपी ने उत्कल एक्सप्रेस से उतारने से लेकर थाने लाने व पूछताछ करने की सिलसिलेवार तरीके से जांच की। जीआरपी के झांसी के अफसरों द्वारा बनाई गई जांच रिपोर्ट को भी तलब किया। जांच रिपोर्ट में जीआरपी ने उल्लेख किया है कि नन व किशोरियों को यदि ट्रेन से नहीं उतारते तो सूचना देने वाले हमला कर सकते थे। उनकी सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि जीआरपी को अपनी सुरक्षा पर भरोसा नहीं था? क्या जीआरपी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आठ से दस कार्यकर्ताओं से निपटने को तैयार नहीं थी? ऐसे कई सवाल दिन भर खड़े होते रहे, लेकिन जवाब देने को कोई भी तैयार नहीं हुआ।
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पूरे मामले की जांच की जा रही है। जीआरपी झांसी की जांच रिपोर्ट भी देखी है। हर पहलुओं को खंगाला जा रहा है। सभी के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सौमित्र यादव, प्र्रभारी एसपी - जीआरपी
ट्रेन में जीआरपी व आरपीएफ के सामने खूब हुई बदसलूकी
झांसी। उत्कल एक्सप्रेस में नन व किशोरियों को किस तरह की बदसलूकियों का सामना करना पड़ा यह वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है। एक पुलिस वाला वीडियो में कह रहा है कि जल्दी आओ रे, तुम्हें उठाने केे लिए टाइम नहीं हमारे पास। अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी महिलाओं के लिए किया गया।
ट्रेन से उतारने के दौरान कई वीडियो बनाए गए थे। पांच वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। ट्रेन में जीआरपी व आरपीफ के सामने नन व किशोरियों बेगुनाही के सुबूत दिखाती रहीं, लेकिन किसी ने नहीं माना। पुलिस के सामने खूब बदसलूकी हुई। यह वीडियो में साफ सुनाई व नजर आ रहा है। इसके बाद भी उनको अपराधियों की तरह स्टेशन पर उतारकर लाया गया। प्लेटफार्म पर लोगों की खासी भीड़ थी। यह लोग भी वीडियो में साफ नजर आ रहे हैं। दबाव बनाकर सीट से उठाया गया। स्टेशन से थाने तक लाते समय अपराधियों की तरह वीडियो बनते रहे। यहां भी जीआरपी के साथ आरपीएफ तमाशा देखती रही। लेकिन, किसी ने भी रोकने व टोकने की जहमत नहीं उठाई।
यह था पूरा मामला
19 मार्च को ट्रेन नंबर 08478 उत्कल एक्सप्रेस के कोच नंबर बी-2 में लीविया थोमस, हेमलता (ईसाई धर्म की नन) और श्वेता व बी तरंग हज़रत निज़ामुद्दीन से राउरकेला (ओडिशा) के लिए यात्रा कर रही थीं। ट्रेन के कोच नंबर बी-1 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी झांसी आ रहे थे। कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण के शक में किशोरियों को ले जाने की सूचना रेलवे के 182 नंबर पर आरपीएफ को दी थी। कार्यकर्ताओं की सूचना के बाद एक संगठन के नेता भी झांसी स्टेशन पहुंच गए थे। आरपीएफ से सूचना मिलने के बाद जीआरपी ने भी प्लेटफार्म पर पहुंचकर शाम तकरीबन साढ़े सात बजे चारों को ट्रेन से उतार लिया था। थाने लाकर साढ़े तीन घंटे की जांच के बाद सभी को जाने दिया गया था।
वीडियो नंबर 1
- तेरह सेकंड का एक वीडियो सामने आया है। ट्रेन से उतारकर थाने लाते समय लोगों ने खूब वीडियो बनाए। एक महिला ने कहा कि फोटो क्यों बना रहे हो भैया, इस पर एक युवक बोला, वीडियो बना रहे।
वीडियो नंबर 2
- छह सेकंड का यह वीडियो प्लेटफार्म का है। प्लेटफार्म पर काफी भीड़ है। नन व किशोरियां डरी सहमी प्लेटफार्म पर खड़ी हैं। उनके पीछे काफी लोग नजर आ रहे हैं।
वीडियो नंबर 3
- 25 सेकंड के वीडियो में उनसे कहा जा रहा है कि अगर सही है तो घर भेज दिया जाएगा। एक व्यक्ति कह रहा है कि बाहर चलो, बाहर। नेतागिरी नहीं करते तो कैसे पता चलता। जल्दी आओ रे, टाइम नहीं तुम्हारे लिए। जल्दी उठाओ इसको।
वीडियो नंबर 4
- 17 सेकंड के वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि हम लोग भी हिंदू संस्था से काम करते हैं। दो लोग उतर गए हैं, तुम लोग भी उतरो। वह बार-बार पूछती रहीं कि दो लोग और कहां हैं। उनसे कहा जा रहा है कि प्लेटफार्म पर उतर गई हैं, तुम लोग भी उतर जाओ।
वीडियो नंबर 5
- 44 सेकंड के वीडियो में सुबूत मांगे गए। एक किशोरी ने अपना आईकार्ड भी दिखाया। वह बोलती रही कि वह क्रिश्चियन हैं। आईडी कार्ड दिखाते नजर आ रही है। एक व्यक्ति बोल रहा है कि झूठ बोल रही है।
एसपी व रेलवे ने भी शुरू की जांच
- सीओ, इंस्पेक्टर से लेकर आरपीएफ कर्मियों के दर्ज हुए बयान
झांसी। बृहस्पतिवार का दिन जांच के नाम रहा। इस प्रकरण में जीआरपी के साथ-साथ रेलवे ने अपनी उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
पूरा प्रकरण गृह मंत्रालय पहुंच चुका है। गृह मंत्रालय से लगातार जानकारी मांगी जा रही है। आनन-फानन में आईजी रेलवे सत्येंद्र कुमार सिंह ने जांच के लिए प्रभारी एसपी को झांसी भेजा। एसपी दिन भर मामले की पड़ताल करते रहे। जांच के दौरान एसपी ने जीआरपी सीओ, इंस्पेक्टर से लेकर आरपीएफ कर्मियों के दर्ज बयान दर्ज किए। बयान में सिलसिलेवार तरीके से घटनाक्रम का हाल जानने के बाद एक-एक बयान लिए। इसके बाद स्टेशन पहुंचकर रेलकर्मियों से भी घटना की जानकारी ली। प्लेटफार्म पर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉडिंग को देखा। इसको जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है। दिन भर जांच का सिलसिला चलता रहा।
इधर, रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। रेलवे ने भी अपनी तरफ से उच्च स्तरीय जांच शुरू करा दी है। प्रयागराज अफसरों के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। आनन-फानन रेलवे की जांच टीम झांसी पहुंची। टीम ने अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। घटना वाले दिन स्टेशन पर पर तैनात रेलकर्मियों से पूछताछ की। टीम ने भी स्टेशन पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी।
ट्रेन तक कैसे पहुंचे लोग, किसी ने रोका टोका क्यों नहीं
झांसी। कोरोना काल के बाद से रेलवे ने नियमों में बदलाव किए हैं। कंफर्म टिकट वाले यात्रियोें को ही स्टेशन के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार की शाम उत्कल एक्सप्रेस तक लोग कैसे पहुंच गए? इन लोगों को किसी ने रोका-टोका क्यों नहीं? रेलवे की सुरक्षा के साथ-साथ इस घटनाक्रम पर आरपीएफ से लेेकर रेलकर्मियों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी, आरपीएफ के साथ रेलकर्मियों की भी है। शुक्रवार की शाम जो हुआ, उसने स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने उत्कल एक्सप्रेस पर पहुंचकर हंगामा कराया। कार्रवाई करने की बजाय आरपीएफ व जीआरपी तमाशाबीन बनकर लोगों का ही साथ देती रही। किसी से न तो टिकट पूछा गया और न ही उनसे किसी प्रकार की कोई जानकारी ली गई। वायरल हो रहे वीडियो में प्लेटफार्म पर लोगों की भीड़ नजर आ रही है। आरपीएफ पर भी खूब सवाल खड़े हो रहे हैं।