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Jhansi News: राजघाट बांध के कंप्यूटर से खुलेंगे गेट, स्काडा सिस्टम से होगा लैस

Thu, 10 Apr 2025 12:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Apr 2025 12:06 AM IST
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Gates of Rajghat Dam will be opened by computer, will be equipped with SCADA system
अशोक तिवारी
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ललितपुर। जिले के सबसे बड़े राजघाट बांध को संचालित करने वाले सिस्टम में 26 साल बाद बदलाव किया जा रहा है। अत्याधुनिक स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजिशन) तकनीक से बांध को लैस कर उसके गेटों को सेंसर से जोड़ा जाएगा। इसके बाद गेट खोलने के लिए कर्मचारियों को बांध पर नहीं जाना पड़ेगा। मात्र एक क्लिक से बांध के गेट खुल जाएंगे। चार करोड़ रुपये की लागत से स्काडा सिस्टम लगाने की प्रक्रिया में सिंचाई विभाग जुट गया है।
मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी पर राजघाट बांध की कार्ययोजना 1972 में बनाई गई थी और इसका निर्माण 1975 में शुरू हुआ था। वर्ष 1999 में राजघाट बांध बनकर तैयार हुआ था। बांध करीब 44 मीटर ऊंचा और 1100 मीटर लंबा है। करीब छह सौ मीटर लंबी सीमेंट की दीवार है। बांध का कैचमेंट एरिया 17000 वर्ग किलोमीटर रखा गया है। जल संरक्षित करने के लिए मिट्टी की दीवारें करीब 11 किलोमीटर लंबी हैं। बांध में पानी संरक्षित करने की क्षमता 2200 एमसीएम है। बांध के बनने से यूपी-एमपी के करीब 75 गांव प्रभावित हुए थे। सिंचाई के लिए कई किलोमीटर लंबी नहरें बनाई गईं। यूपी के लिए दो और एमपी के लिए एक नहर परियोजना है। इससे गांवों में फसलों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
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बांध में कुल 18 गेट हैं, जिससे 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकता है। अब शासन ने राजघाट बांध को आधुनिक करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत बांध को स्काडा सिस्टम से लैस किया जाएगा। अब तक बारिश के दौरान बांध में जल भराव होने पर कर्मचारियों व अधिकारियों की टीम बांध पर जाकर हाइड्रोलिक सिस्टम के जरिये गेट खोलती थी। अधिकारियों के अनुसार स्काडा सिस्टम लगने के बाद बारिश के दिनों में गेट खोलने की स्थिति बनती है तो कंट्रोल रूम में बैठा कर्मचारी बांध से निकाले जाने वाले पानी की मात्रा कंप्यूटर पर दर्ज करेगा। किस गेट से कितना पानी डिस्चार्ज किया जाना है, उसका नंबर भी डाला जाएगा। इसके बाद एक क्लिक करते ही बांध के गेट खुल जाएंगे।
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दर्ज की गई पानी की मात्रा निकलते ही गेट बंद हो जाएंगे। सिस्टम के लिए कंट्रोल रूम में ही बॉक्स और सेंसर कंप्यूटर लगाए जाएंगे। सिंचाई विभाग ने इसके लिए कार्यदायी संस्था को नामित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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यूपी-एमपी सरकार एक-एक साल करती है बांध का संचालन
राजघाट बांध परियोजना के निर्माण के बाद यूपी-एमपी के बीच समन्वय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बेतवा रिवर का गठन किया था। साथ ही कर्मचारियों को तैनात किया था। इसके बाद से ही बांध का संचालन यूपी-एमपी की सरकार करती आ रही है। हर साल बांध के संचालन का जिम्मा दूसरी सरकार के पास चला जाता है। हर साल मुख्य अभियंता बदल जाते हैं।
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45 मेगावाट बिजली का भी होता है उत्पादन
राजघाट बांध में बिजली भी बनाई जाती है। बिजली उत्पादन करने के लिए तीन टर्बाइन स्थापित हैं। इनके माध्यम से कुल 45 मेगावाट बिजली उत्पादित की जाती है। यह बिजली पानी का उपयोग कर बनाई जाती है।

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बांध पर एक नजर- 371.00 मीटर पूर्ण जलस्तर
- 356.62 मीटर न्यूनतम जलस्तर
- 2200 एमसीएम पानी संरक्षित करने की क्षमता
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राजघाट बांध पर स्काडा सिस्टम लगाया जाएगा। इसकी लागत चार करोड़ के आसपास है। स्काडा सिस्टम से बारिश के दिनों में बांध के जलस्तर की सही जानकारी सहित गेटों से कितनी मात्रा में पानी छाेड़ा जा रहा है, इसकी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। गेट भी आधुनिक तरीके से खोले जाएंगे।
सुमित कुमार पंजवानी, अधिशासी अभियंता, राजघाट बांध पर्यावरण एवं भू अर्जन विभाग
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