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रेल पटरियों के बीच से गुजार रहे बैलगाड़ी
ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2015 02:18 AM IST
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झांसी। इसे लोगों की लापरवाही कहें अथवा मजबूरी। झांसी- मुस्तरा रेल खंड के बीच रेलवे क्रासिंग नंबर 120 बंद होने के बाद आसपास क्षेत्र के लोगों ने पटरियों के बीच से खुद ही क्रासिंग बना ली है। यहां तक कि लोग बैलगाड़ी को बीच से निकालने में भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। यह गलती कभी भी बड़े हादसे का रूप धारण कर सकती है, मगर रेलवे सुरक्षा एजेंसियां शांत हैं।
गौरतलब है कि रेल प्रशासन ने वर्ष 2010 में झांसी-मुस्तरा रेल खंड पर बने क्रासिंग गेट नंबर 120 ए को ग्वालियर-कानपुर बाईपास मार्ग पर ओवर ब्रिज बनने के बाद बंद कर दिया था।
इस क्रासिंग गेट का उपयोग ग्राम पाड़री, मैरी, नगरिया कुआं, रमपुरा, मवनपुरा, बूढ़ा, केशवपुर के अलावा झांसी शहर के इतवारी गंज, मेवातीपुरा, सूजे खां खिड़की, भांडेरी गेट आदि क्षेत्र के लोग करते थे।
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ओवर ब्रिज से नीचे की सड़क का रास्ता न होने से इसका ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उक्त क्षेत्रों के लोग जान जोखिम में डालकर रेल पटरियों को पार कर गुजर रहे हैं।
इससे हर समय दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। उक्त क्षेत्रों के लोग इस संबंध में कई बार जिला व रेल प्रशासन को अवगत करा चुके हैं, मगर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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गौरतलब है कि रेल प्रशासन ने वर्ष 2010 में झांसी-मुस्तरा रेल खंड पर बने क्रासिंग गेट नंबर 120 ए को ग्वालियर-कानपुर बाईपास मार्ग पर ओवर ब्रिज बनने के बाद बंद कर दिया था।
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इस क्रासिंग गेट का उपयोग ग्राम पाड़री, मैरी, नगरिया कुआं, रमपुरा, मवनपुरा, बूढ़ा, केशवपुर के अलावा झांसी शहर के इतवारी गंज, मेवातीपुरा, सूजे खां खिड़की, भांडेरी गेट आदि क्षेत्र के लोग करते थे।
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ओवर ब्रिज से नीचे की सड़क का रास्ता न होने से इसका ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उक्त क्षेत्रों के लोग जान जोखिम में डालकर रेल पटरियों को पार कर गुजर रहे हैं।
इससे हर समय दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। उक्त क्षेत्रों के लोग इस संबंध में कई बार जिला व रेल प्रशासन को अवगत करा चुके हैं, मगर स्थिति जस की तस बनी हुई है।