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Jhansi News: बुंदेलखंड में मूंगफली की बेहतर पैदावार के लिए मुफीद मिलीं चार किस्में

Sun, 15 Jun 2025 01:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jun 2025 01:40 AM IST
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Four varieties found suitable for better production of peanuts in Bundelkhand
- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का प्रयोग, उन्नत बीज और कृषि तकनीक से प्रति एकड़ तीन क्विंटल तक बढ़ा उत्पादन
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में मूंगफली की पैदावार बढ़ाने के लिए चार किस्में मुफीद मिली हैं। कृषि तकनीक के साथ इनकी बुवाई करने से प्रति एकड़ ती क्विंटल तक उत्पादन बढ़ गया है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की ओर से अलग-अलग केंद्रों से उन्नत बीज मंगवाकर अध्ययन करने पर ये परिणाम सामने आए हैं। इस साल बुवाई के बाद कुछ किस्मों को बुंदेलखंड के लिए प्रदेश सरकार से संस्तुत कराने की तैयारी है।
बुंदेलखंड में मूंगफली का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय लगातार प्रयास कर रहा है। खासकर पिछले चार सालों में 500 किसानों के खेतों में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किया गया। इसके जरिये उन्हें उन्नत तकनीक की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि 2024 में मूंगफली अनुसंधान निदेशालय, जूनागढ़ और अर्द्ध शुष्क उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) से मूंगफली के उन्नत बीज मंगवाए।
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खरीफ सीजन 2024 में इन प्रजातियों की बुवाई के बाद मूल्यांकन किया गया तो जीजी 37, राज मूंगफली-4, वीआरआई-12 और ट्रैम्बो छत्तीसगढ़ किस्म उत्पादन के मद्देनजर बेहतर पाई गई हैं। पहले जहां छह से सात क्विंटल प्रति एकड़ मूंगफली का उत्पादन होता था, इन उन्नत किस्मों के इस्तेमाल के बाद ये बढ़कर आठ से 10 क्विंटल प्रति एकड़ हो गया है।
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उन्होंने बताया कि कुलपति प्रो. एके सिंह के निर्देशन में अब इन किस्मों का फिर आगामी खरीफ सीजन में परीक्षण किया जाएगा। देखा जाएगा कि किस फसल से कितना उत्पादन मिला। इसके बाद अधिक पैदावार देने वाली प्रजातियों को चिह्नित करके सरकार से बुंदेलखंड के लिए संस्तुत कराने का प्रयास किया जाएगा।




इन तकनीकों के इस्तेमाल की सलाह
- खेत में बीच-बीच में मिट्टी डालकर पंक्ति (मेड़नुमा) तैयार करें। वर्षा ज्यादा होने से खेत में पानी भरेगा नहीं।
- मूंगफली की बुवाई के बाद खेत में कैल्शियम की आपूर्ति के लिए जिप्सम डालें। इससे दाना मजबूत होता है।
- फूल आते समय स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई करें। जमीन में नमी आने से फूल आसानी से भूमि के अंदर चला जाएगा।






प्रदेश में 88 फीसदी मूंगफली की बुवाई बुंदेलखंड में ही हुई
पिछले साल प्रदेश में 3.41 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हुई थी। इसमें अकेले बुंदेलखंड में ही लगभग तीन लाख हेक्टेयर में मूंगफली की बुवाई की गई। झांसी में 1.68 लाख हेक्टेयर, महोबा में 82 हजार हेक्टेयर, ललितपुर में 23 हजार हेक्टेयर, हमीरपुर में 20 हजार हेक्टेयर और जालौन में साढ़े पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मूंगफली बोई गई। प्रदेश में 88 फीसदी मूंगफली की बुवाई बुंदेलखंड में ही हुई।
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