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बांधों में अब सिर्फ पीने भर को पानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:06 AM IST
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dam, jhansi hindi news
- फोटो : demo
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झांसी। महानगर को पेयजल आपूर्ति करने के लिए माताटीला व पहूज बांध ही दो मुख्य स्रोत है। इन दोनों बांधों में सिर्फ पीने के लिए पानी बचा है। माताटीला बांध से तालाबों को भरने के लिए छोड़े जाने वाले पानी के बाद अगर जलस्तर और गिरता है तो पेयजल पाइप लाइन में पंपिंग कर पानी को दौड़ाया जाएगा। इसी तरह पहूज बांध से पूर्ण क्षमता के साथ पानी नहीं मिल पा रहा है।
महानगर में तब्दील होने के बाद भी झांसी प्यास बुझाने के मामले में अब भी किसी छोटे शहर सरीखा ही है। अब भी एक बड़ी आबादी माताटीला बांध व पहूज बांध पर ही निर्भर है। झांसी नगर को माताटीला बांध से प्रतिदिन मिलने वाले कच्चे पानी को बबीना में शोधित करने के उपरांत 75.45 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। वर्तमान में माताटीला बांध का जलस्तर 308.46 मीटर है और इसमें 9.46 प्रतिशत पानी पेयजल हेतु संरक्षित है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों में सिंचाई के लिए पानी देने के लिए पूरी तरह खत्म हो चुका है। मगर, सूखे से चाहे जितने हालात बिगड़े रहें झांसी शहर व बबीना से झांसी के मध्य पड़ने वाले भेल, सैन्य क्षेत्र को गर्मियों में पानी की किल्लत नहीं होगी, क्योंकि माताटीला बांध में पीने के पानी का पर्याप्त इंतजाम है। मई माह के प्रथम सप्ताह में अवश्य जानवरों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बांध से पानी छोड़ा जाएगा।
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इसके बाद बचे पानी से अगर राइजिंग लाइन का प्रेशर गिरता है तो पूर्व की तरह पंपिंग कर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। अगर इसके बाद जल स्तर गिरता है तो बांध को राजघाट बांध से भरने का विकल्प भी अफसरों के पास है। इसी तरह पुराने शहर के कुछ क्षेत्रों में पहूज बांध से प्राप्त पानी दतिया गेट फिल्टर पर शोधन के उपरांत लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है। इस बांध से प्रतिदिन करीब पांच एमएलडी पानी मिलता है। वर्तमान में इस बांध में 234 मीटर जलस्तर तक पानी भरा हुआ है और 35.05 प्रतिशत पीने के पानी के लिए संरक्षित है।
गौरतलब है कि जलापूर्ति की यह व्यवस्था पिछले तीन दशकों से लगभग एक जैसी ही है, जबकि इस अवधि में आबादी में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। क्षेत्रफल की बात करें तो यह बढ़ कर दोगुना हो चुका है। ऐसे में शहर को दोनो स्रोतों से पानी तो मिल रहा है, मगर स्थापित पाइप लाइन पूरी क्षमता से पानी उगलने पर भी अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में असमर्थ है। नगर के दो दर्जन से अधिक मुहल्ले सिर्फ इसी वजह से जल संकट झेलने को विवश रहते हैं।
पांच घंटे की मशक्कत से ठीक हुआ वाल्व
झांसी। जीवनशाह तिराहे के निकट मेन राइजिंग पाइप लाइन का वाल्व बदलने का काम बुधवार को पांच घंटे की मशक्कत के उपरांत पूरा कर लिया गया। इससे देर रात तक कई क्षेत्रों की जलापूर्ति को सामान्य बना लिया गया।
जीवन शाह तिराहे के निकट जल निगम कार्यालय परिसर में बबीना जल शोधन केंद्र (झांसी-बबीना पेयजल योजना 110 एमएलडी की पाइप लाइन) से आने वाली 48 इंची पाइप लाइन का वाल्व सोमवार को खराब हो गया था। इससे मिशन कंपाउंड, तहसील व नरसिंह राव टौरिया पानी की टंकी से जुड़े क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया था। बुधवार को माताटीला बांध से आने वाले पानी की क्षमता तीस प्रतिशत कम करने के उपरांत वाल्व को सुधारने का काम शुरू किया गया। इसके बाद संबंधित टंकियों तक पानी पहुंचाने का काम शुरू हो गया।
इन क्षेत्रों में रहा जल संकट
वाल्व बदलने के कार्य के चलते बुधवार को भी मिशन कंपाउंड, बीकेडी, बाबूलाल कारखाना, तहसील, शारदा हिल्स कॉलोनी, तहसील, खंडेराव गेट, पानी वाली धर्मशाला, नरसिंह राव टौरिया, पंचकुइयां, नई बस्ती, गोला कुआं, पन्ना लाल, पुरानी नझाई, लक्ष्मण गंज, झारखड़िया, अंदर दतिया गेट, राई का ताजिया, सूजे खां खिड़की, शंकर सिंह का बगीचा, टकसाल, चंद्रशेखर आजाद मुहल्ला, इंद्रपुरी कॉलोनी, मेंहदी बाग, आशिक चौराहा आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति नहीं हो सकी। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
टैंकरों की मांग बढ़ी, एक दिन में पचास आवेदन
झांसी। जल संस्थान द्वारा टैंकरों का संचालन शुरू करते ही कार्यालय में आवेदनों का आना शुरू हो गया है। बुधवार को गुमनावारा, राजपूत नगर, महाराणा प्रताप नगर, करगुवा, शिवाजी नगर आदि क्षेत्रों के लोगों ने टैंकर भिजवाने के लिए पचास आवेदन दिए। इस संबंध में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आर एस यादव ने बताया कि हरेक घर पर टैंकर से पानी पहुंचाना संभव नहीं है, मगर हर गली में टैंकर पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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महानगर में तब्दील होने के बाद भी झांसी प्यास बुझाने के मामले में अब भी किसी छोटे शहर सरीखा ही है। अब भी एक बड़ी आबादी माताटीला बांध व पहूज बांध पर ही निर्भर है। झांसी नगर को माताटीला बांध से प्रतिदिन मिलने वाले कच्चे पानी को बबीना में शोधित करने के उपरांत 75.45 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। वर्तमान में माताटीला बांध का जलस्तर 308.46 मीटर है और इसमें 9.46 प्रतिशत पानी पेयजल हेतु संरक्षित है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों में सिंचाई के लिए पानी देने के लिए पूरी तरह खत्म हो चुका है। मगर, सूखे से चाहे जितने हालात बिगड़े रहें झांसी शहर व बबीना से झांसी के मध्य पड़ने वाले भेल, सैन्य क्षेत्र को गर्मियों में पानी की किल्लत नहीं होगी, क्योंकि माताटीला बांध में पीने के पानी का पर्याप्त इंतजाम है। मई माह के प्रथम सप्ताह में अवश्य जानवरों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बांध से पानी छोड़ा जाएगा।
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इसके बाद बचे पानी से अगर राइजिंग लाइन का प्रेशर गिरता है तो पूर्व की तरह पंपिंग कर पानी को आगे बढ़ाया जाएगा। अगर इसके बाद जल स्तर गिरता है तो बांध को राजघाट बांध से भरने का विकल्प भी अफसरों के पास है। इसी तरह पुराने शहर के कुछ क्षेत्रों में पहूज बांध से प्राप्त पानी दतिया गेट फिल्टर पर शोधन के उपरांत लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है। इस बांध से प्रतिदिन करीब पांच एमएलडी पानी मिलता है। वर्तमान में इस बांध में 234 मीटर जलस्तर तक पानी भरा हुआ है और 35.05 प्रतिशत पीने के पानी के लिए संरक्षित है।
गौरतलब है कि जलापूर्ति की यह व्यवस्था पिछले तीन दशकों से लगभग एक जैसी ही है, जबकि इस अवधि में आबादी में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। क्षेत्रफल की बात करें तो यह बढ़ कर दोगुना हो चुका है। ऐसे में शहर को दोनो स्रोतों से पानी तो मिल रहा है, मगर स्थापित पाइप लाइन पूरी क्षमता से पानी उगलने पर भी अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में असमर्थ है। नगर के दो दर्जन से अधिक मुहल्ले सिर्फ इसी वजह से जल संकट झेलने को विवश रहते हैं।
पांच घंटे की मशक्कत से ठीक हुआ वाल्व
झांसी। जीवनशाह तिराहे के निकट मेन राइजिंग पाइप लाइन का वाल्व बदलने का काम बुधवार को पांच घंटे की मशक्कत के उपरांत पूरा कर लिया गया। इससे देर रात तक कई क्षेत्रों की जलापूर्ति को सामान्य बना लिया गया।
जीवन शाह तिराहे के निकट जल निगम कार्यालय परिसर में बबीना जल शोधन केंद्र (झांसी-बबीना पेयजल योजना 110 एमएलडी की पाइप लाइन) से आने वाली 48 इंची पाइप लाइन का वाल्व सोमवार को खराब हो गया था। इससे मिशन कंपाउंड, तहसील व नरसिंह राव टौरिया पानी की टंकी से जुड़े क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया था। बुधवार को माताटीला बांध से आने वाले पानी की क्षमता तीस प्रतिशत कम करने के उपरांत वाल्व को सुधारने का काम शुरू किया गया। इसके बाद संबंधित टंकियों तक पानी पहुंचाने का काम शुरू हो गया।
इन क्षेत्रों में रहा जल संकट
वाल्व बदलने के कार्य के चलते बुधवार को भी मिशन कंपाउंड, बीकेडी, बाबूलाल कारखाना, तहसील, शारदा हिल्स कॉलोनी, तहसील, खंडेराव गेट, पानी वाली धर्मशाला, नरसिंह राव टौरिया, पंचकुइयां, नई बस्ती, गोला कुआं, पन्ना लाल, पुरानी नझाई, लक्ष्मण गंज, झारखड़िया, अंदर दतिया गेट, राई का ताजिया, सूजे खां खिड़की, शंकर सिंह का बगीचा, टकसाल, चंद्रशेखर आजाद मुहल्ला, इंद्रपुरी कॉलोनी, मेंहदी बाग, आशिक चौराहा आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति नहीं हो सकी। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
टैंकरों की मांग बढ़ी, एक दिन में पचास आवेदन
झांसी। जल संस्थान द्वारा टैंकरों का संचालन शुरू करते ही कार्यालय में आवेदनों का आना शुरू हो गया है। बुधवार को गुमनावारा, राजपूत नगर, महाराणा प्रताप नगर, करगुवा, शिवाजी नगर आदि क्षेत्रों के लोगों ने टैंकर भिजवाने के लिए पचास आवेदन दिए। इस संबंध में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आर एस यादव ने बताया कि हरेक घर पर टैंकर से पानी पहुंचाना संभव नहीं है, मगर हर गली में टैंकर पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।