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खाली पड़े रहे रेलवे के आरक्षण काउंटर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Nov 2016 12:16 AM IST
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- फोटो : demo
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रेलवे में शुक्रवार से हजार के नोट अमान्य होने से आरक्षण काउंटरों पर आम दिनों की तुलना में यात्रियों की भीड़ कम रहीं। साथ ही यात्री कर्मचारी के हाथ में दो हजार का नोट थमा रहे थे और छुट्टे रुपयों को लेकर यात्रियों को इंतजार करना पड़ा।
आम दिनों में झांसी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटरों पर औसतन बारह सौ फार्मों पर आरक्षण होते हैं। इनमें चार सौ करीब फार्म टिकट कैंसिल के होते हैं। नौ नवंबर से पांच सौ व हजार के नोट अमान्य होने के बाद यात्रियों को इन नोटों पर 24 नवंबर तक आरक्षण कराने का समय दिया गया था। इस अवधि में यात्रियों की काउंटरों पर लंबी- लंबी कतारें लगी रही। आरक्षण फार्मों का औसत भी बढ़कर 1500 के करीब पहुंच गया। शुक्रवार को हजार के नोट अमान्य होते ही काउंटरों पर भीड़ कम हो गई। दिन- भर एक- एक, दो- दो कर यात्री टिकट बनवाने आते रहे। अधिकांश यात्री कर्मचारियों को दो हजार का नोट थमा रहे थे, इससे छुट्टे देने में परेशानी बनी रही। इस परेशानी से यात्री दिनभर जूझते रहे। शुक्रवार को सौ सात फार्मों पर ही आरक्षण बने।
थोड़ा इंतजार करना पड़ा
गोरखपुर के लिए टिकट बनवाने आया था। टिकट 840 रुपये का बना। मैंने दो हजार का नोट दिया। कर्मचारी के पास बाकी रुपये लौटाने के लिए नहीं थे। इस कारण पंद्रह मिनट तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, में नोटबंदी के पक्ष में हूं। इस परेशानी से मुझे कोई दुख नहीं हुआ।
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रोहित अग्रवाल, मिशन कंपाउंड
हजार के नोट की भी बढ़नी चाहिए थी अवधि
पांच सौ की तरह हजार के नोट को भी 15 दिसंबर तक मान्य करना चाहिए था। चूंकि, अभी बैंकों में अभी न तो आसानी से रुपये निकल रहे हैं और न ही जमा हो रहे हैं। यात्रा जीवन का अहम हिस्सा है। जरूरत पर जाना ही पड़ेगा। इस कारण यात्रियों की इस समस्या का ध्यान रखना चाहिए था।
राहुल अग्रवाल, टंडन रोड
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आम दिनों में झांसी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटरों पर औसतन बारह सौ फार्मों पर आरक्षण होते हैं। इनमें चार सौ करीब फार्म टिकट कैंसिल के होते हैं। नौ नवंबर से पांच सौ व हजार के नोट अमान्य होने के बाद यात्रियों को इन नोटों पर 24 नवंबर तक आरक्षण कराने का समय दिया गया था। इस अवधि में यात्रियों की काउंटरों पर लंबी- लंबी कतारें लगी रही। आरक्षण फार्मों का औसत भी बढ़कर 1500 के करीब पहुंच गया। शुक्रवार को हजार के नोट अमान्य होते ही काउंटरों पर भीड़ कम हो गई। दिन- भर एक- एक, दो- दो कर यात्री टिकट बनवाने आते रहे। अधिकांश यात्री कर्मचारियों को दो हजार का नोट थमा रहे थे, इससे छुट्टे देने में परेशानी बनी रही। इस परेशानी से यात्री दिनभर जूझते रहे। शुक्रवार को सौ सात फार्मों पर ही आरक्षण बने।
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थोड़ा इंतजार करना पड़ा
गोरखपुर के लिए टिकट बनवाने आया था। टिकट 840 रुपये का बना। मैंने दो हजार का नोट दिया। कर्मचारी के पास बाकी रुपये लौटाने के लिए नहीं थे। इस कारण पंद्रह मिनट तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, में नोटबंदी के पक्ष में हूं। इस परेशानी से मुझे कोई दुख नहीं हुआ।
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रोहित अग्रवाल, मिशन कंपाउंड
हजार के नोट की भी बढ़नी चाहिए थी अवधि
पांच सौ की तरह हजार के नोट को भी 15 दिसंबर तक मान्य करना चाहिए था। चूंकि, अभी बैंकों में अभी न तो आसानी से रुपये निकल रहे हैं और न ही जमा हो रहे हैं। यात्रा जीवन का अहम हिस्सा है। जरूरत पर जाना ही पड़ेगा। इस कारण यात्रियों की इस समस्या का ध्यान रखना चाहिए था।
राहुल अग्रवाल, टंडन रोड