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तोड़-मरोड़कर बताए इतिहास को सही करने की जरूरत
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में भारत के स्वर्णिम इतिहास से साक्षात्कार कार्यक्रम हुआ। इसमें अखिल भारतीय संकलन समिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय हर्षे ने कहा कि विकास के पथ पर अग्रसर नए भारत के विद्यार्थियों को अपने स्वर्णिम इतिहास के बारे में भी जानना चाहिए। अंग्रेजों, मुगलों और उनकी विचारधारा से प्रभावित इतिहासकारों ने जिस प्रकार इतिहास को तोड़-मरोड़कर देश के सामने रखा है, उसे हमें सही करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना झलकारी बाई, आल्हा ऊदल सरीखे क्रांतिकारियों का नाम आज भी गौरव के साथ लिया जाता है। मगर एक कटु सत्य ये भी है कि इतिहास में बुंदेलखंड के कई नायक-नायिकाओं को या तो भुला दिया गया या उनका उल्लेख ही नहीं किया गया। ऐसे ही भूले बिसरे क्रांतिकारियों को स्मरण करने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी बीयू कैंपस में कराई जाएगी। संगोष्ठी 22, 23 मार्च को प्रस्तावित है। इस दौरान कानपुर प्रांत के इतिहास संकलन समिति के प्रमुख दुर्गेश, महानगर प्रचारक अनुराग, इतिहासकार चित्रगुप्त, शैलेंद्र तिवारी, प्रीति निगम, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. एमएम सिंह, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. मुकुल पस्तोर, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉॅ. ललित गुप्ता, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. यतींद्र मिश्रा, डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. बाबूलाल तिवारी, डॉ. जितेंद्र तिवारी, डॉ. अनु सिंगला, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. बृजेश लोधी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों का स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना झलकारी बाई, आल्हा ऊदल सरीखे क्रांतिकारियों का नाम आज भी गौरव के साथ लिया जाता है। मगर एक कटु सत्य ये भी है कि इतिहास में बुंदेलखंड के कई नायक-नायिकाओं को या तो भुला दिया गया या उनका उल्लेख ही नहीं किया गया। ऐसे ही भूले बिसरे क्रांतिकारियों को स्मरण करने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी बीयू कैंपस में कराई जाएगी। संगोष्ठी 22, 23 मार्च को प्रस्तावित है। इस दौरान कानपुर प्रांत के इतिहास संकलन समिति के प्रमुख दुर्गेश, महानगर प्रचारक अनुराग, इतिहासकार चित्रगुप्त, शैलेंद्र तिवारी, प्रीति निगम, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. एमएम सिंह, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. मुकुल पस्तोर, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉॅ. ललित गुप्ता, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. यतींद्र मिश्रा, डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. बाबूलाल तिवारी, डॉ. जितेंद्र तिवारी, डॉ. अनु सिंगला, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. बृजेश लोधी मौजूद रहे।
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