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डिमांड घटने पर ठप किया पारीछा थर्मल प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jan 2017 01:32 AM IST
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power plant, jhansi news
- फोटो : demo
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प्रदेश में बिजली की डिमांड कम होने के कारण पारीछा थर्मल पावर प्लांट की सभी छह इकाइयों का उत्पादन बृहस्पतिवार की आधी रात से बंद कर दिया गया। हालांकि, इनमें चार इकाइयों को बीस जनवरी को ही बंद कर दिया गया था, तब से एक ही इकाई से उत्पादन किया जा रहा था। अब स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर से आदेश मिलने के बाद ही उत्पादन शुरू होगा।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। इनमें 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मेंटेनेंस के कारण जुलाई 2016 से बंद चल रही है। इन दिनों प्रदेश में बिजली की डिमांड (मांग) कम चल रही है, इस कारण स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के आदेश पर प्लांट की 110 नंबर मेगावाट की नंबर दो इकाई को 18 जनवरी, 210 मेगवाट की नंबर तीन और 250 मेगावाट की नंबर पांच इकाई को 19 जनवरी तथा 250 मेगावाट की नंबर छह इकाई को बीस जनवरी को बंद कर दिया गया था। इसके बाद से सिर्फ 210 मेगावाट की नंबर चार इकाई से उत्पादन किया जा रहा था, जिसको भी बृहस्पतिवार की आधी रात से बंद कर दिया गया। वर्तमान में प्लांट की सभी मशीनें बंद चल रही हैं, जिससे हवा में धुआं भी दिखना बंद हो गया है।
बताया गया है कि प्रदेश में संचालित सभी उत्पादन इकाईयों से करीब पांच हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। वर्तमान में डिमांड कम होने के कारण 2400 मेगावाट उत्पादन ही किया जा रहा है। पारीछा की सभी इकाइयों, अनपरा की नई इकाइयों और पनकी तथा हरदुआ की भी कुछ इकाइयों से उत्पादन बंद किया गया है।
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‘डिमांड कम होने पर कभी- कभार ऐसी स्थिति बन जाती है। स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के आदेश पर इकाइयों को बंद किया गया है। वहां से आदेश आने पर ही एक- एक कर मशीनों को चालू किया जाएगा।’
अखिलेश सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
चालू है बजाज पावर प्लांट
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट की 660 मेगावाट की दोनों इकाइयों से उत्पादन चालू हैं। चूंकि, प्रदेश सरकार ने बजाज पावर प्लांट से एग्रीमेंट कर रखा है। इस कारण बजाज से बिजली लेना मजबूरी है। मालूम हो कि, सरकार को बजाज पावर प्लांट से महंगे दामों में बिजली लेनी पड़ती है। हालांकि, बिजली अफसरों की माने तो बजाज पावर प्लांट की डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि इस प्लांट की मशीनें गरम नहीं होती है। इसलिए डिमांड कम होेने की स्थिति पहले पारीछा की मशीनों को ही बंद कराया जाता है।
इसलिए बंद की जाती है इकाइयां
- बिजली की खपत के हिसाब से उपलब्धता अधिक होने पर फ्रीक्ंिवेंसी बढ़ जाती हैं। इससे मशीनें ट्रिप हो जती हैं। सिस्टम को बचाने के लिए ऐसा करना पड़ता है। बिजली खपत के हिसाब से उपलब्धता कम होने पर वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। बिजली को स्टोर नहीं किया जा सकता। इस कारण उतना ही उत्पादन किया जाता है, जितनी जरूरत होती है।
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। इनमें 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मेंटेनेंस के कारण जुलाई 2016 से बंद चल रही है। इन दिनों प्रदेश में बिजली की डिमांड (मांग) कम चल रही है, इस कारण स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के आदेश पर प्लांट की 110 नंबर मेगावाट की नंबर दो इकाई को 18 जनवरी, 210 मेगवाट की नंबर तीन और 250 मेगावाट की नंबर पांच इकाई को 19 जनवरी तथा 250 मेगावाट की नंबर छह इकाई को बीस जनवरी को बंद कर दिया गया था। इसके बाद से सिर्फ 210 मेगावाट की नंबर चार इकाई से उत्पादन किया जा रहा था, जिसको भी बृहस्पतिवार की आधी रात से बंद कर दिया गया। वर्तमान में प्लांट की सभी मशीनें बंद चल रही हैं, जिससे हवा में धुआं भी दिखना बंद हो गया है।
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बताया गया है कि प्रदेश में संचालित सभी उत्पादन इकाईयों से करीब पांच हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। वर्तमान में डिमांड कम होने के कारण 2400 मेगावाट उत्पादन ही किया जा रहा है। पारीछा की सभी इकाइयों, अनपरा की नई इकाइयों और पनकी तथा हरदुआ की भी कुछ इकाइयों से उत्पादन बंद किया गया है।
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‘डिमांड कम होने पर कभी- कभार ऐसी स्थिति बन जाती है। स्टेट लोड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के आदेश पर इकाइयों को बंद किया गया है। वहां से आदेश आने पर ही एक- एक कर मशीनों को चालू किया जाएगा।’
अखिलेश सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
चालू है बजाज पावर प्लांट
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट की 660 मेगावाट की दोनों इकाइयों से उत्पादन चालू हैं। चूंकि, प्रदेश सरकार ने बजाज पावर प्लांट से एग्रीमेंट कर रखा है। इस कारण बजाज से बिजली लेना मजबूरी है। मालूम हो कि, सरकार को बजाज पावर प्लांट से महंगे दामों में बिजली लेनी पड़ती है। हालांकि, बिजली अफसरों की माने तो बजाज पावर प्लांट की डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि इस प्लांट की मशीनें गरम नहीं होती है। इसलिए डिमांड कम होेने की स्थिति पहले पारीछा की मशीनों को ही बंद कराया जाता है।
इसलिए बंद की जाती है इकाइयां
- बिजली की खपत के हिसाब से उपलब्धता अधिक होने पर फ्रीक्ंिवेंसी बढ़ जाती हैं। इससे मशीनें ट्रिप हो जती हैं। सिस्टम को बचाने के लिए ऐसा करना पड़ता है। बिजली खपत के हिसाब से उपलब्धता कम होने पर वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। बिजली को स्टोर नहीं किया जा सकता। इस कारण उतना ही उत्पादन किया जाता है, जितनी जरूरत होती है।