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सवा तीन सौ गांवों के जलाशयों की बदली तस्वीर
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झांसी। मनरेगा के जरिए करीब सवा तीन सौ गांवों के जलाशयों की किस्मत बदली गई। अतिक्रमण एवं गंदगी के चलते इनमें से अधिकांश जलाशय करीब पूरी तरह नष्ट हो चुके थे लेकिन, मनरेगा के जरिए इनको फिर से पुनर्जीवित किया गया। इनकी मदद से खेतों तक पानी पहुंचाने में भी आसानी हो रही है। तलाब खुदाई एवं पुनर्जीवन कार्यों के जरिए नियमित जॉबकॉर्ड धारकों समेत प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मिला। अधिकारियों का कहना है कि तालाब खोदाई के जरिए कुल 323550 मानव दिवस सृजित हुए। इस पूरे कार्य पर कुल 6.39 करोड़ रुपये की लागत आई।
कोविड-19 के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी अपने गांव वापस लौटे। ऐसे में सरकार ने मनरेगा के जरिए इनको गांव में रोजगार मुहैया कराने की योजना तैयार की। मनरेगा से जलाशयों को दुरुस्त करने की योजना बनाई गई। जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने एक गांव, एक तलाब की थीम के आधार पर प्रत्येक गांव में कम से कम एक जलाशय पुनर्जीवित कराने की योजना बनाई। सभी ब्लॉकों में गांव चयनित करते हुए काम आरंभ कराया गया। मनरेगा अधिकारियों के मुताबिक प्रवासी मजूदरों की मदद से नए तलाब भी खुदवाए गए। इसमें छोटे तलाबों के साथ ही बड़े तलाब भी शामिल हैं।
इनकी दशा सुधारने में बीस हजार रुपये लेकर पौने चार लाख रुपये तक खर्च किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस काम के जरिए कुल 323550 मानव दिवस सृजित हुए, जिनमें एक तिहाई से अधिक काम प्रवासियों के जरिए कराए गए। काम समाप्त होने के बाद न सिर्फ पुराने जलाशय को नया जीवन मिल गया बल्कि इनकी मदद से पशु-पक्षियों को पीने का पानी भी मिल रहा। बबीना, बमौर जैसे ब्लॉकों के कई सूखाग्रस्त गांव में इन्हीं तालाबों के जरिए खेती में भी मदद मिल रही है। इसके साथ इन जलाशय के माध्यम से भूजल रिचार्ज करने में भी मदद मिल रही।
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ब्लॉकवार पुर्नजीवित हुए तालाबों का ब्योरा
बबीना-43
बड़ागांव- 39
बामौर- 51
बंगरा- 40
चिरगांव- 25
गुरसराय- 57
मऊरानीपुर- 28
मोंठ- 36
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कोविड-19 के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी अपने गांव वापस लौटे। ऐसे में सरकार ने मनरेगा के जरिए इनको गांव में रोजगार मुहैया कराने की योजना तैयार की। मनरेगा से जलाशयों को दुरुस्त करने की योजना बनाई गई। जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने एक गांव, एक तलाब की थीम के आधार पर प्रत्येक गांव में कम से कम एक जलाशय पुनर्जीवित कराने की योजना बनाई। सभी ब्लॉकों में गांव चयनित करते हुए काम आरंभ कराया गया। मनरेगा अधिकारियों के मुताबिक प्रवासी मजूदरों की मदद से नए तलाब भी खुदवाए गए। इसमें छोटे तलाबों के साथ ही बड़े तलाब भी शामिल हैं।
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इनकी दशा सुधारने में बीस हजार रुपये लेकर पौने चार लाख रुपये तक खर्च किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस काम के जरिए कुल 323550 मानव दिवस सृजित हुए, जिनमें एक तिहाई से अधिक काम प्रवासियों के जरिए कराए गए। काम समाप्त होने के बाद न सिर्फ पुराने जलाशय को नया जीवन मिल गया बल्कि इनकी मदद से पशु-पक्षियों को पीने का पानी भी मिल रहा। बबीना, बमौर जैसे ब्लॉकों के कई सूखाग्रस्त गांव में इन्हीं तालाबों के जरिए खेती में भी मदद मिल रही है। इसके साथ इन जलाशय के माध्यम से भूजल रिचार्ज करने में भी मदद मिल रही।
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ब्लॉकवार पुर्नजीवित हुए तालाबों का ब्योरा
बबीना-43
बड़ागांव- 39
बामौर- 51
बंगरा- 40
चिरगांव- 25
गुरसराय- 57
मऊरानीपुर- 28
मोंठ- 36