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दद्दा की धरती पर तराशे जाएंगे हॉकी के खिलाड़ी
amarujala
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:22 AM IST
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hoci, jhansi news
- फोटो : demo
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हॉकी के जादूगर और झांसी की शान दद्दा ध्यानचंद की कर्मस्थली पर हॉकी के खिलाड़ियों की पौध सींची जाएगी। जुलाई में स्टेडियम में 27 सीट का हॉस्टल शुरू होगा। भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली (साई) का यह हॉस्टल सैफई से झांसी स्थानांतरित किया जा रहा है।
खेल निदेशक ने नए सत्र में ध्यानचंद स्टेडियम को हॉकी हॉस्टल देने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद से सैफई के रामपुर में चल रहे हाकी हॉस्टल को ध्यानचंद स्टेडियम हस्तांतरित करने की तैयारी कर ली गई है। इधर, स्टेडियम में भी खिलाड़ियों के रहने के लिए हॉस्टल को दुरुस्त करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बॉक्सिंग हॅास्टल के बगल से ही हॉकी का हॉस्टल स्थापित होगा। स्टेडियम में हॉकी के खिलाड़ियों के लिए एस्ट्रोटर्फ का सदुपयोग हो सकेगा। वर्तमान में हॉकी के खिलाड़ी एस्ट्रोटर्फ के अलावा हीरोज ग्राउंड और एलवीएम के खेल मैदान पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। खेल विभाग के प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर ने बताया कि इस सत्र में खिलाड़ियों की प्रवेश प्रक्रिया मेजर घ्यानचंद स्टेडियम से ही पूरी होगी।
बता दें कि पूर्व में भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली (साई) की ओर से डे- बोर्डिंग संचालित होता था। छह साल संचालन के बाद वर्ष 2012-13 में उसे बंद कर दिया गया। उसके बाद से खिलाड़ियों को प्रवेश के लिए भोपाल, लखनऊ और बनारस की दौड़ लगानी पड़ती थी।
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खेल निदेशक ने नए सत्र में ध्यानचंद स्टेडियम को हॉकी हॉस्टल देने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद से सैफई के रामपुर में चल रहे हाकी हॉस्टल को ध्यानचंद स्टेडियम हस्तांतरित करने की तैयारी कर ली गई है। इधर, स्टेडियम में भी खिलाड़ियों के रहने के लिए हॉस्टल को दुरुस्त करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बॉक्सिंग हॅास्टल के बगल से ही हॉकी का हॉस्टल स्थापित होगा। स्टेडियम में हॉकी के खिलाड़ियों के लिए एस्ट्रोटर्फ का सदुपयोग हो सकेगा। वर्तमान में हॉकी के खिलाड़ी एस्ट्रोटर्फ के अलावा हीरोज ग्राउंड और एलवीएम के खेल मैदान पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। खेल विभाग के प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर ने बताया कि इस सत्र में खिलाड़ियों की प्रवेश प्रक्रिया मेजर घ्यानचंद स्टेडियम से ही पूरी होगी।
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बता दें कि पूर्व में भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली (साई) की ओर से डे- बोर्डिंग संचालित होता था। छह साल संचालन के बाद वर्ष 2012-13 में उसे बंद कर दिया गया। उसके बाद से खिलाड़ियों को प्रवेश के लिए भोपाल, लखनऊ और बनारस की दौड़ लगानी पड़ती थी।
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