{"_id":"65e38a24c30a12bdf10081ed","slug":"crowd-of-writers-on-social-media-what-to-read-depends-on-the-reader-vandana-jhansi-news-c-11-1-jhs1004-273765-2024-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोशल मीडिया पर लेखकों की भीड़, क्या पढ़ना वो पाठक पर निर्भर: वंदना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोशल मीडिया पर लेखकों की भीड़, क्या पढ़ना वो पाठक पर निर्भर: वंदना
विज्ञापन
बीयू में बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल में अलग-अलग सत्रों में वक्ताओं ने रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार को लेखिका वंदना अवस्थी दुबे ने कहा कि आज सोशल मीडिया पर लेखकों की भीड़ है। ऐसे में क्या पढ़ना है, ये साहित्य में रुझान रखने वाले पाठकों पर निर्भर करता है। जो लोग सोशल मीडिया से पढ़ रहे हैं, वो जाया नहीं जाएगा। कुछ सीखेंगे ही मगर इससे उन्हें पता चलेगा कि क्या निरर्थक है और क्या सार्थक?
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एक बड़े पत्रकार की बेटी को अज्ञेय की कविता याद करते देखा, ये कितना सुंदर प्रयास है। एक सवाल पर कहा कि हर नया विमर्श सीमित दायरे में शुरू होता है लेकिन उसमें राजनीति के प्रवेश से बात बिगड़ती है। किसी भी विमर्श को साहित्य के दायरे में बांधना ही नहीं चाहिए। साहित्य में तात्कालिक समय का समाज विद्यमान रहता है। समय उस दौर की हकीकत से रूबरू होता है।
लेखिका डॉ. निधि अग्रवाल ने कहा कि समाज में असमानता है, इसलिए प्रश्न तो उठेंगे ही। हमारा उद्देश्य सामंजस्य है। लेकिन, जब समानांतर सत्ता खड़ी हो जाती है, तब भटकाव होता है। वक्ता अनिरुद्ध रावत ने कहा कि साहित्य शुरू से ही मानव हित का समर्थक रहा है। ऐसे में साहित्य की तह तक जाना चाहिए। किताबें पढ़ना भर साहित्य नहीं है। पुलिस अधिकारी शशांक ने कहा कि बुंदेलखंड का साहित्य अभी उतना सहेजा नहीं गया। तीसरे सत्र में वक्ता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने युवाओं से विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर आगे बढ़ने के लिए कहा। चौथे सत्र में एसटीएफ और एटीएस के संस्थापक पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय ने बताया कि 90 के दशक में यूपी पिछड़े राज्यों में था। अपराध, डकैती कम हुई तो यूपी विकास की राह पर आगे बढ़ने लगा। आज लोग जागरूक हो गए हैं। पुलिस की रिस्पांस टाइमिंग बेहतर हुई है। अरिंदम घोष के एक सवाल पर बोले कि जब लोग लिखना शुरू करेंगे तो क्रिमिनल साहित्य जरूर पढ़ा जाएगा। वेद प्रकाश ने वर्दी वाला गुंडा लिखा तो उसकी 15 करोड़ प्रतियां बिकीं।
विज्ञापन
पांचवें सत्र में पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास करने वालीं अधिकारी अदिति पटेल ने युवाओं से हिम्मत न हारने और लगातार प्रयास करने की सलाह दी। कहा कि प्लान-बी हमेशा तैयार रखें। छठवें सत्र में अभिनेत्री शुभांगी लिटोरिया ने कहा कि हर कला की तरह एक्टिंग भी कॅरिअर है। लेकिन रास्ता आसान नहीं होता। एक एक्टर केवल डायलॉग नहीं बोलता। पूरा किरदार जीता है। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिन्हा ने युद्ध के समय के अपने अनुभव साझा किए। सात गोली लगने के बाद अस्पताल के आईसीयू में पहुंचना, कोमा से बाहर आने के बाद लिखी गई कविता को सुनाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सर्वप्रथम देश को आगे रखना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार को लेखिका वंदना अवस्थी दुबे ने कहा कि आज सोशल मीडिया पर लेखकों की भीड़ है। ऐसे में क्या पढ़ना है, ये साहित्य में रुझान रखने वाले पाठकों पर निर्भर करता है। जो लोग सोशल मीडिया से पढ़ रहे हैं, वो जाया नहीं जाएगा। कुछ सीखेंगे ही मगर इससे उन्हें पता चलेगा कि क्या निरर्थक है और क्या सार्थक?
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एक बड़े पत्रकार की बेटी को अज्ञेय की कविता याद करते देखा, ये कितना सुंदर प्रयास है। एक सवाल पर कहा कि हर नया विमर्श सीमित दायरे में शुरू होता है लेकिन उसमें राजनीति के प्रवेश से बात बिगड़ती है। किसी भी विमर्श को साहित्य के दायरे में बांधना ही नहीं चाहिए। साहित्य में तात्कालिक समय का समाज विद्यमान रहता है। समय उस दौर की हकीकत से रूबरू होता है।
विज्ञापन
लेखिका डॉ. निधि अग्रवाल ने कहा कि समाज में असमानता है, इसलिए प्रश्न तो उठेंगे ही। हमारा उद्देश्य सामंजस्य है। लेकिन, जब समानांतर सत्ता खड़ी हो जाती है, तब भटकाव होता है। वक्ता अनिरुद्ध रावत ने कहा कि साहित्य शुरू से ही मानव हित का समर्थक रहा है। ऐसे में साहित्य की तह तक जाना चाहिए। किताबें पढ़ना भर साहित्य नहीं है। पुलिस अधिकारी शशांक ने कहा कि बुंदेलखंड का साहित्य अभी उतना सहेजा नहीं गया। तीसरे सत्र में वक्ता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने युवाओं से विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर आगे बढ़ने के लिए कहा। चौथे सत्र में एसटीएफ और एटीएस के संस्थापक पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय ने बताया कि 90 के दशक में यूपी पिछड़े राज्यों में था। अपराध, डकैती कम हुई तो यूपी विकास की राह पर आगे बढ़ने लगा। आज लोग जागरूक हो गए हैं। पुलिस की रिस्पांस टाइमिंग बेहतर हुई है। अरिंदम घोष के एक सवाल पर बोले कि जब लोग लिखना शुरू करेंगे तो क्रिमिनल साहित्य जरूर पढ़ा जाएगा। वेद प्रकाश ने वर्दी वाला गुंडा लिखा तो उसकी 15 करोड़ प्रतियां बिकीं।
विज्ञापन
पांचवें सत्र में पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास करने वालीं अधिकारी अदिति पटेल ने युवाओं से हिम्मत न हारने और लगातार प्रयास करने की सलाह दी। कहा कि प्लान-बी हमेशा तैयार रखें। छठवें सत्र में अभिनेत्री शुभांगी लिटोरिया ने कहा कि हर कला की तरह एक्टिंग भी कॅरिअर है। लेकिन रास्ता आसान नहीं होता। एक एक्टर केवल डायलॉग नहीं बोलता। पूरा किरदार जीता है। लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज सिन्हा ने युद्ध के समय के अपने अनुभव साझा किए। सात गोली लगने के बाद अस्पताल के आईसीयू में पहुंचना, कोमा से बाहर आने के बाद लिखी गई कविता को सुनाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सर्वप्रथम देश को आगे रखना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।