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झांसी में 2.47 लाख हेक्टेयर में बोई फसल का सर्वे शुरू, 33 फीसदी क्षति पर होगा सूखा ग्रस्त

Fri, 09 Sep 2022 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Sep 2022 12:36 AM IST
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Crop survey start, 33 percent aria sukha grast
झांसी। कम बारिश के चलते फसलों को हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया गया है। यह सर्वे ग्राम वार कराया जा रहा है। इसके लिए तहसीलवार टीमें लगाई गई हैं। सर्वे पूरा करके 13 सितंबर तक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही जनपद के सूखा ग्रस्त होने की बात तय होगी। कृषि अफसरों का कहना है कि न्यूनतम 33 फीसदी फसलों को नुकसान होने पर ही जनपद सूखा ग्रस्त घोषित हो सकेगा।
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इस खरीफ सीजन में झांसी में कुल 2.47 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोवाई की गई। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस दफा झांसी में 8488 हेक्टेयर धान, 7857 हेक्टेयर उर्द, 6320 हेक्टर मूंग, 444 हेक्टेयर अरहर, 28554 हेक्टेयर मूंगफली एवं 11779 हेक्टेयर में तिल की बोवाई हुई थी। लेकिन, लगातार नौ साल तक जनपद में औसत बारिश नहीं हुई। मानसूनी सीजन खत्म होने के बाद करीब 567 एमएम औसत बारिश ही जनपद में रिकॉर्ड हुई। औसत बारिश से यह करीब दो सौ मिलीमीटर कम है।
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कम बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायत शासन तक पहुंची। इसके बाद सरकार ने सर्वे कराने के निर्देश दिए। उपजिलाधिकारी की अगुवाई में सभी पांच तहसीलों में सर्वे टीम बनाई गई है। इसमें उपजिलाधिकारी समेत तहसीलदार, कृषि अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी एवं मंडी प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। यह टीम गांव स्तर पर फसलों के नुकसान का आंकलन करेगी। उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह का कहना है सर्वे आरंभ कर दिया गया है। सर्वे पूरा करके 13 सितंबर तक रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
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दस बिंदुओं पर तैयार की जा रही रिपोर्ट
फसलों को नुकसान होने संबंधी सर्वे के लिए विभिन्न दस बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कृषि अफसरों का सर्वे के दौरान सामान्य बुवाई क्षेत्र, सिंचित क्षेत्र, वर्तमान सीजन में वास्तविक बोवाई क्षेत्र, सूखा प्रभावित क्षेत्र, बोया गया क्षेत्र जिसमें फसल क्षति 33 से 50 प्रतिशत के बीच हुई है, इससे संबंधित रिकार्ड एकत्रित किया जा रहा है।

33 फीसदी से अधिक नुकसान पर ही होगा सूखा ग्रस्त घोषित
राहत मानकों के मुताबिक जनपद को सूखा ग्रस्त तभी घोषित किया जा सकेगा जब यहां 33 फीसदी से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचा हो। इसके अलावा सूखा तय करने के लिए अन्य मानक भी प्रयोग में लाए जाते हैं लेकिन, कृषि अफसरों का कहना है कि सर्वाधिक अहम पैमाना यही होता है। सर्वे करने के बाद ही जनपद में सूखे की सही तस्वीर सामने आ सकेगी।
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