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‘इजराइली तकनीक’ से सच उगलेंगे अपराधी
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‘इजराइली तकनीक’ से सच उगलेंगे अपराधी
झांसी। पुलिस से झूठ बोलकर बचना अब अपराधियोें के लिए आसान नहीं होगा। पूछताछ मेें न तो पुलिस को गुमराह कर सकेंगे और न किसी तरह के राज़ छिपा सकेंगे। जल्द ही अपराधियों से सच्चाई उगलवाने के लिए पुलिस इजराइली तकनीक लेयर्ड वॉइस एनालिसिस (एलवीए) अपनाने की तैयारी में है। इसके लिए पुलिस अधिकारियोें को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
अब जुर्म करके बचना आसान नहीं होगा। अभी आरोपी की इजाजत से ही उसका लाई डिटेक्टर टेस्ट हो सकता है। उसे फॉरेंसिक लैब में बुलाकर उसके सिर, छाती और कलाइयों में इंस्ट्रूमेंट (उपकरण) लगाए जाते हैं। कई तरह के सवाल पूछकर उसके जवाबों और उस दौरान धड़कनों में हुए बदलाव को खास मशीन के जरिये मापा जाता है और पता लगाया जाता है कि वह झूठ तो नहीं बोल रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी मुश्किल होती है। इससे पुलिस इजराइली तकनीक लेयर्ड वॉइस एनालिसिस (एलवीए) तकनीक अपनाने की तैयारी शुुरू कर दी है।
एलवीए में सिर्फ एक स्पीकर का इस्तेमाल होता है। इसे सामने रखकर अपराधी से सामान्य बात की जाती है। एलवीए उसकी आवाज की अलग - अलग फ्रीक्वेंसी से सौ से अधिक तरह की भावनाओं के स्तर को पकड़ता है। इसके बाद जब अपराधी से ‘मुद्दे की बात’ पूछी जाती है तो उसके द्वारा कही गई बातों और जानकारियों को इन्हीं 100 से अधिक पैरामीटर्स पर कसा जाता है। यह 80 प्रतिशत तक झूठ लाइव पकड़ लेगा। झूठ बोलने पर आवाज में स्ट्रेस लेवल बढ़ जाएगा।
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छिपाकर भी हो सकेगा टेस्ट
ऐसे में अपराधी के पीछे बैठा व्यक्ति पूछताछ कर रहे व्यक्ति को अपराधी का स्ट्रेस लेवल बढ़ाने, क्रॉस चेक करने या सवाल फिर से पूछने को कहता है ताकि सच को पुख्ता किया जा सके। इस तकनीक में निर्दोष व्यक्ति की भी पहचान हो सकेगी, क्योंकि यह तकनीक अब तक प्रचलित हार्टबीट, ब्लड प्रेशर, सांसों की रफ्तार और नर्वस सिस्टम में आए बदलावों पर आश्रित नहीं है बल्कि व्यक्ति की भावनाओं और आवाज पर काम करती है। चूंकि इसमें व्यक्ति पर कोई उपकरण, सेंसर या तार नहीं लगाया जाता, इसलिए छिपाकर कर भी यह टेस्ट किया जा सकता है। जिले से दो अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके अपनाने के लिए भी पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है।
यह तकनीकी पुलिस महकमे के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे अपराधियों से सही जानकारी हासिल कर सलाखों के पीछे भेजने में आसानी होगी। जल्द ही प्रशिक्षण मिलने के बाद यह तकनीकी को जिले में शुरू कर दिया जाएगा।
राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक
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झांसी। पुलिस से झूठ बोलकर बचना अब अपराधियोें के लिए आसान नहीं होगा। पूछताछ मेें न तो पुलिस को गुमराह कर सकेंगे और न किसी तरह के राज़ छिपा सकेंगे। जल्द ही अपराधियों से सच्चाई उगलवाने के लिए पुलिस इजराइली तकनीक लेयर्ड वॉइस एनालिसिस (एलवीए) अपनाने की तैयारी में है। इसके लिए पुलिस अधिकारियोें को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
अब जुर्म करके बचना आसान नहीं होगा। अभी आरोपी की इजाजत से ही उसका लाई डिटेक्टर टेस्ट हो सकता है। उसे फॉरेंसिक लैब में बुलाकर उसके सिर, छाती और कलाइयों में इंस्ट्रूमेंट (उपकरण) लगाए जाते हैं। कई तरह के सवाल पूछकर उसके जवाबों और उस दौरान धड़कनों में हुए बदलाव को खास मशीन के जरिये मापा जाता है और पता लगाया जाता है कि वह झूठ तो नहीं बोल रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी मुश्किल होती है। इससे पुलिस इजराइली तकनीक लेयर्ड वॉइस एनालिसिस (एलवीए) तकनीक अपनाने की तैयारी शुुरू कर दी है।
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एलवीए में सिर्फ एक स्पीकर का इस्तेमाल होता है। इसे सामने रखकर अपराधी से सामान्य बात की जाती है। एलवीए उसकी आवाज की अलग - अलग फ्रीक्वेंसी से सौ से अधिक तरह की भावनाओं के स्तर को पकड़ता है। इसके बाद जब अपराधी से ‘मुद्दे की बात’ पूछी जाती है तो उसके द्वारा कही गई बातों और जानकारियों को इन्हीं 100 से अधिक पैरामीटर्स पर कसा जाता है। यह 80 प्रतिशत तक झूठ लाइव पकड़ लेगा। झूठ बोलने पर आवाज में स्ट्रेस लेवल बढ़ जाएगा।
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छिपाकर भी हो सकेगा टेस्ट
ऐसे में अपराधी के पीछे बैठा व्यक्ति पूछताछ कर रहे व्यक्ति को अपराधी का स्ट्रेस लेवल बढ़ाने, क्रॉस चेक करने या सवाल फिर से पूछने को कहता है ताकि सच को पुख्ता किया जा सके। इस तकनीक में निर्दोष व्यक्ति की भी पहचान हो सकेगी, क्योंकि यह तकनीक अब तक प्रचलित हार्टबीट, ब्लड प्रेशर, सांसों की रफ्तार और नर्वस सिस्टम में आए बदलावों पर आश्रित नहीं है बल्कि व्यक्ति की भावनाओं और आवाज पर काम करती है। चूंकि इसमें व्यक्ति पर कोई उपकरण, सेंसर या तार नहीं लगाया जाता, इसलिए छिपाकर कर भी यह टेस्ट किया जा सकता है। जिले से दो अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके अपनाने के लिए भी पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है।
यह तकनीकी पुलिस महकमे के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे अपराधियों से सही जानकारी हासिल कर सलाखों के पीछे भेजने में आसानी होगी। जल्द ही प्रशिक्षण मिलने के बाद यह तकनीकी को जिले में शुरू कर दिया जाएगा।
राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक