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Jhansi: करोड़ों की सरकारी जमीन पर आयुर्वेदिक कॉलेज के मालिकाना हक पर कोर्ट की मुहर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख को झटका

Sat, 04 Jul 2026 02:52 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sat, 04 Jul 2026 02:52 AM IST
सार

पूर्व ब्लॉक प्रमुख चरण सिंह, उनकी पत्नी अनुपमा यादव और उनकी कंपनी के माध्यम से इस भूमि पर बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की गई। कुल 44 विक्रय पत्रों में से 27 सीधे चरण सिंह, अनुपमा अथवा उनकी कंपनी के नाम दर्ज पाए गए।

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Jhansi: Court upholds Ayurvedic college's ownership rights over government land worth crores
बुंदेलखण्ड आयुर्वेदिक कॉलेज, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झांसी-ग्वालियर रोड स्थित करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को लेकर दो दशक से अधिक समय से चल रहे विवाद में बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को बड़ी राहत मिली है। उपजिलाधिकारी (न्यायिक) की अदालत ने कॉलेज के मालिकाना हक को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य के लिए अधिग्रहित भूमि को डी-नोटिफाई किए बिना न तो बेचा जा सकता है और न ही उस पर किसी अन्य व्यक्ति का स्वामित्व हो सकता है। फैसले से पूर्व ब्लॉक प्रमुख चरण सिंह यादव, उनकी पत्नी अनुपमा यादव और उनकी कंपनी सार्क इंफ्रा कॉम इंडिया लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है।
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अक्तूबर 1974 किया था आयुर्वेदिक कॉलेज ने अधिग्रहण
सिद्धेश्वर मंदिर के पास स्थित मौजा झांसी खास की 3.060 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1961 में प्रेसीडेंट सर्वेंट ऑफ द नेशन सोसाइटी के अध्यक्ष पंडित रघुनाथ विनायक धुलेकर ने पंजीकृत बैनामे के माध्यम से आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए उपलब्ध कराई थी। इसके बाद 10 अक्तूबर 1974 को राज्यपाल की अधिसूचना के तहत इस भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया।
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खाली भूमि रहने का फायदे उठाते हुए कराए फर्जी बैनामे
आरोप है कि लंबे समय तक भूमि खाली रहने का फायदा उठाकर कई लोगों ने फर्जी तरीके से बैनामे कराए। पूर्व ब्लॉक प्रमुख चरण सिंह यादव, उनकी पत्नी अनुपमा यादव और उनकी कंपनी के माध्यम से इस भूमि पर बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की गई। कुल 44 विक्रय पत्रों में से 27 सीधे चरण सिंह यादव, अनुपमा यादव अथवा उनकी कंपनी के नाम दर्ज पाए गए। इसी विवाद को लेकर सार्क इंफ्रा कॉम इंडिया लिमिटेड की निदेशक अनुपमा यादव ने आयुर्वेदिक कॉलेज का नाम राजस्व अभिलेखों से हटाने के लिए उपजिलाधिकारी न्यायिक की अदालत में वाद दायर किया था। 27 जून को उपजिलाधिकारी (न्यायिक) अजय कुमार यादव ने वाद खारिज करते हुए कहा कि भूमि लंबे समय से आयुर्वेदिक कॉलेज के नाम दर्ज है और राजकीय प्रयोजन के लिए अधिग्रहीत होने के कारण इसकी बिक्री वैध नहीं मानी जा सकती।
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प्रशासनिक जांच में भी सरकारी भूमि होने की पुष्टि
सिविल लाइंस निवासी बृजेंद्र राय की शिकायत पर जिलाधिकारी गौरांग राठी ने मामले की जांच एडीएम (प्रशासन) शिवप्रताप शुक्ल से कराई। दो जुलाई को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में भी भूमि को सरकारी बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि विक्रेताओं ने गलत तरीके से भूमि को अपनी बताकर उसकी बिक्री की। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने वर्ष 2014 में ही इस भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर बिक्री की गई।
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