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खुद की जान पर खेलकर दूसरों को बचाने में जुटे कोरोना योद्धा
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झांसी। खुद की जान पर खेलकर कोरोना योद्धा दूसरों की जान बचाने में जुटे हुए हैं। कोई मरीजों के इलाज में दिन-रात जुटा हुआ है तो कोई एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने में। वहीं, जो मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ देते हैं, उनको श्मशान तक पहुंचाने का काम भी कर्मचारी कर रहे हैं। आज हम आपको महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ऐसे ही कोरोना योद्धा की कहानी बता रहे हैं।
दिन-रात मरीजों को भर्ती करते रहते नितेश
मेडिकल कॉलेज में आने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को इमरजेंसी से कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने का काम ओटी टेक्नीशियन नितेश शर्मा करते हैं। वहीं, जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, उन्हें सामान्य वार्ड में शिफ्ट कराने का काम भी नितेश का है।
हर समय कोरोना मरीजों के बीच रहते अशोक
मेडिकल कॉलेज के वार्ड ब्वॉय अशोक यादव का पूरा समय कोरोना मरीजों के बीच में ही बीतता है। कोविड अस्पताल आने वाली एंबुलेंस से कोरोना मरीज को लेकर स्ट्रेचर से ऊपर वार्ड में पहुंचाना पड़ता है। इमरजेंसी में चाहे दिन हो या रात कभी भी काम पर आना पड़ जाता है।
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एंबुलेंस से रोज मरीजों को ले जाते हरिशंकर
मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस ड्राइवर हरिशंकर रोजाना कोरोना पॉजिटिव मरीजों को इमरजेंसी से कोविड अस्पताल लेकर जाते हैं। उन्हें दिनभर में 20 से 25 मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। संक्रमण के खतरे के बावजूद हरिशंकर ने कभी भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
मरीजों को दवाएं, खाना पहुंचाते हिमांशु
वार्ड ब्वॉय हिमांशु प्रजापति दिन-भर कोविड अस्पताल में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों को दवाएं और खाना पहुंचाते रहते हैं। इसके अलावा खतरे से बाहर मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट भी करते रहते हैं। दिनभर उनका समय मरीजों के बीच गुजरता है पर डरते नहीं हैं।
फोटो..
घंटों पीपीई किट पहन वार्ड में रहते चंद्रशेखर
मेडिकल कॉलेज में वार्ड ब्वॉय के पद पर तैनात चंद्रशेखर का कोविड अस्पताल में काफी समय पीपीई किट पहने ही गुजरता है। वह पीपीई किट में मरीजों के ऑक्सीजन लेवल की जांच भी करते हैं। जरूरत पड़ने पर स्टाफ से बात कर ऑक्सीजन लगवाते हैं। - चंद्रशेखर, वार्ड ब्वॉय।
श्मशान तक मरने वालों की बॉडी पहुंचा रहे शिवा
मेडिकल कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवा का काम कोरोना से दम तोड़ने वालों की बॉडी को श्मशान तक पहुंचाने का है। मरने वालों की बॉडी को कोविड प्रोटोकॉल के तहत सील करवाकर उसे एंबुलेंस के जरिए मुक्तिधाम तक पहुंचाते हैं।
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दिन-रात मरीजों को भर्ती करते रहते नितेश
मेडिकल कॉलेज में आने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को इमरजेंसी से कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने का काम ओटी टेक्नीशियन नितेश शर्मा करते हैं। वहीं, जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, उन्हें सामान्य वार्ड में शिफ्ट कराने का काम भी नितेश का है।
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हर समय कोरोना मरीजों के बीच रहते अशोक
मेडिकल कॉलेज के वार्ड ब्वॉय अशोक यादव का पूरा समय कोरोना मरीजों के बीच में ही बीतता है। कोविड अस्पताल आने वाली एंबुलेंस से कोरोना मरीज को लेकर स्ट्रेचर से ऊपर वार्ड में पहुंचाना पड़ता है। इमरजेंसी में चाहे दिन हो या रात कभी भी काम पर आना पड़ जाता है।
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एंबुलेंस से रोज मरीजों को ले जाते हरिशंकर
मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस ड्राइवर हरिशंकर रोजाना कोरोना पॉजिटिव मरीजों को इमरजेंसी से कोविड अस्पताल लेकर जाते हैं। उन्हें दिनभर में 20 से 25 मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। संक्रमण के खतरे के बावजूद हरिशंकर ने कभी भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
मरीजों को दवाएं, खाना पहुंचाते हिमांशु
वार्ड ब्वॉय हिमांशु प्रजापति दिन-भर कोविड अस्पताल में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों को दवाएं और खाना पहुंचाते रहते हैं। इसके अलावा खतरे से बाहर मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट भी करते रहते हैं। दिनभर उनका समय मरीजों के बीच गुजरता है पर डरते नहीं हैं।
फोटो..
घंटों पीपीई किट पहन वार्ड में रहते चंद्रशेखर
मेडिकल कॉलेज में वार्ड ब्वॉय के पद पर तैनात चंद्रशेखर का कोविड अस्पताल में काफी समय पीपीई किट पहने ही गुजरता है। वह पीपीई किट में मरीजों के ऑक्सीजन लेवल की जांच भी करते हैं। जरूरत पड़ने पर स्टाफ से बात कर ऑक्सीजन लगवाते हैं। - चंद्रशेखर, वार्ड ब्वॉय।
श्मशान तक मरने वालों की बॉडी पहुंचा रहे शिवा
मेडिकल कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवा का काम कोरोना से दम तोड़ने वालों की बॉडी को श्मशान तक पहुंचाने का है। मरने वालों की बॉडी को कोविड प्रोटोकॉल के तहत सील करवाकर उसे एंबुलेंस के जरिए मुक्तिधाम तक पहुंचाते हैं।