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बुंदेलखंड की चितेरी चित्रकला को मिलेगा नया जीवन, हर दुकान पर बनेंगीं पेंटिंग

Tue, 29 Mar 2022 12:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 12:33 AM IST
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Chiteri painting of Bundelkhand will get new life, paintings will be made at every shop
झांसी। बुंदेलखंड से लुप्त होने के कगार पर पहुंची पारंपरिक चितेरी चित्रकला को नया जीवन मिलेगा। मंडलायुक्त की पहल पर इस कला को संजोने के लिए शहर की हर दुकान पर चितेरों से पेंटिंग बनवाई जाएगी। इसके साथ ही भुखमरी के कगार पर पहुंचे छह चितेरों को आवास दिया जाएगा। वहीं अर्बन हाट में चितेरी चित्रकला कारखाना बनाया जाएगा। इसे लेकर सोमवार को मंडलायुक्त ने चित्रकारों, अधिकारियों और शहर के तमाम लोगों के साथ बैठक कर कला को समृद्ध बनाने की बात कही।
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बुंदेलखंड में चितेरी चित्रकला की अलग पहचान है। एक दौर में हर घर के बाहर चितेरे अपनी कला के जरिए चित्र बनाते थे। खासतौर पर शादी समारोह के दौरान घरों के बाहर चितेरों को ढूंढकर चित्र बनवाए जाते थे। धीरे-धीरे यह कला खत्म होती जा रही है। मंडलायुक्त डॉ. अजय शंकर पांडेय को इस बारे में पता चला तो उन्होंने कला को संरक्षित करने के लिए पहल की। उन्हें पता लगा कि चितेरे काम न मिलने के चलते भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इसके लिए चितेरों को ढूंढने का काम शुरू किया गया। राजस्व विभाग और डूडा विभाग की टीम ने सर्वे कर छह चितेरों को ढूंढा। जिनकी समस्याएं सुनने के बाद कला के प्रोत्साहन और चितेरों के पुनर्वास की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही शहर की हर दुकान की एक-एक दीवार पर चितेरी चित्रकला बनवाई जाएगी। इसके लिए व्यापार मंडल को जिम्मा सौंपा गया है।
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चितेरी कला को संरक्षित करने के लिए एक समिति बनाई गई है। जिसमें जेडीए वीसी सर्वेश दीक्षित अध्यक्ष, डॉ. नीति शास्त्री, डॉ. मधु श्रीवास्तव, चितेरी कलाकार मोहित कुशवाहा को सदस्य नामित किया गया है। -----------
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यह है चितेरी कला
चितेरी बुंदेलखंड की प्राचीन कला है। बुंदेलखंड में विवाह के अवसरों पर मुख्यद्वार पर चितेरी कला का चित्रण होता है। इसके साथ ही सावनी की मटकियों, मिट्टी के बर्तनों और खिलौनों पर यह चित्र बनाए जाते हैं। चितेरी बनाने में चूने के रंगों का प्रयोग किया जाता है। रंगों को पक्का करने के लिये बबूल की गोंद या सरेस पानी में पकाकर तैयार कर मिला देते हैं। रंगों का प्रयोग चित्रानुसार किया जाता है। प्रमुख रंग गुलाबी, नीला, पीला, लाल, नारंगी, हरा (हल्का हरा) होता है। चित्र उभारने के लिये काले रंग की रेखाओं का प्रयोग होता है। चितेरी कला चित्रण की यह विशेषता है कि रंग सूखने का इंतजार किए बिना ही चित्रकार दूसरे रंग का प्रयोग करता है।
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