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अधूरे काम को पूरा करेंगी चीन और हैदराबाद की कंपनी
jhansi
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:41 AM IST
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jhansi kanpur dubble line
- फोटो : amarujala
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झांसी- कानपुर रेलवे डबल ट्रैक पर भीमसेन और ऊसरगांव के बीच छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्री निवासन कंस्ट्रक्शन कंपनी पूरा करेंगी। 69 किलोमीटर इस काम को पूरा करने के लिए दोनों कंपनियों को संयुक्त रूप से ठेका मिला है।
रेल विकास निगम लिमिटेड ने ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) के अधूरे को काम पूरा कराने के लिए कुछ महीने पहले टेंडर निकाले थे, जिसे पूरा करने में पांच कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। दस्तावेजों की जांच के उपरांत यह ठेका चीन और हैदराबाद कंपनी को संयुक्त रूप से दिया गया है।
मालूम हो कि रेल बजट 2013-14 में झांसी-कानपुर डबल ट्रैैक के लिए 817 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा है। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर, एरच रोड से ऊसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी को और ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया । डबल ट्रैक को पूरा करने का लक्ष्य जून-2018 तय किया गया था। मुंबई और बंगलूरू की कंपनियां अपने हिस्से का 80 फीसदी काम पूरा कर चुकी हैं। जबकि, हैदराबाद की कंपनी का काम बेहद धीमा चल रहा था। यह कंपनी तीन साल में 70 में 20 किलोमीटर भी पटरी बिछाने का काम पूरा नहीं कर सकी है। इस कारण रेल विकास निगम लिमिटेड ने अप्रैल 2017 में हैदराबाद की कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया था। साथ ही कंपनी की जमानत राशि जब्त कर ली गई थी।
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‘भीमसेन और ऊसरगांव स्टेशन के बीच डबल ट्रैक का अधूरा काम पूरा कराने के लिए टेंडर दे दिया गया है। बैंक गारंटी की जांच चल रही है। उम्मीद है कि जनवरी से चीन और भारत की एचसीएल कंपनी संयुक्त रूप से काम शुरू कर देंगी।’
- राजीव श्रीवास्तव, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, आरवीएनएल।
चीन का सरकारी उपक्रम है सीआरसी
चाइना रेलवे कॉरपोरेशन (सीआरसी) चीन की सरकारी रेलवे का नाम है। ठेका लेने वाली कंपनी भी चाइना रेलवे का ही उपक्रम है। साथ ही, यह सरकारी स्वामित्व वाली एक औद्योगिक इकाई भी है। चाइना रेलवे की 21 उपकंपनियां हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में रेलवे विस्तार का काम करती हैं। चीन अपनी हाईस्पीड रेल तकनीक को भारत में लाने के लिए आक्रामक मार्केटिंग करता रहा है। इस बीच भारत-चीन के बीच रेलवे के विकास के लिए कई करार हुए हैं। इसी के तहत इंडियन रेलवे इंजीनियर्स चीन में हैवी हॉलिंग की विशेष ट्रेनिंग ले रहे हैं। वहीं, चीन भारत के साथ रेलवे यूनिवर्सिटी बनाने के लिए भी प्रयासरत है।
2019 चुनाव से पहले पूरे करने हैं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट
रेलवे सूत्रों के अनुसार 2019 के आम चुनाव से पहले भारतीय रेलवे 50 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट हर हाल में पूरे कर लेना चाहता है। इनमें 70 रेलवे स्टेशन को उन्नत करना, 3300 किलोमीटर के डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के हिस्सों का निर्माण, सीसीटीवी कैमरों का लगाया जाना, भारत की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन का संचालन आदि अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके लिए पूरे तंत्र को सुधारने, धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट को नई कंपनियों से तय समय सीमा में पूरा कराना आदि शामिल हैं।
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रेल विकास निगम लिमिटेड ने ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) के अधूरे को काम पूरा कराने के लिए कुछ महीने पहले टेंडर निकाले थे, जिसे पूरा करने में पांच कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। दस्तावेजों की जांच के उपरांत यह ठेका चीन और हैदराबाद कंपनी को संयुक्त रूप से दिया गया है।
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मालूम हो कि रेल बजट 2013-14 में झांसी-कानपुर डबल ट्रैैक के लिए 817 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें झांसी-भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। यह काम तीन कंपनियों को सौंपा है। झांसी से एरच रोड स्टेशन (66 किलोमीटर) तक 265 करोड़ रुपये का काम मुंबई की कंपनी जीएमआर, एरच रोड से ऊसरगांव (70 किलोमीटर) तक 288 करोड़ रुपये का काम बंगलूरू की कंपनी केईसी को और ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया । डबल ट्रैक को पूरा करने का लक्ष्य जून-2018 तय किया गया था। मुंबई और बंगलूरू की कंपनियां अपने हिस्से का 80 फीसदी काम पूरा कर चुकी हैं। जबकि, हैदराबाद की कंपनी का काम बेहद धीमा चल रहा था। यह कंपनी तीन साल में 70 में 20 किलोमीटर भी पटरी बिछाने का काम पूरा नहीं कर सकी है। इस कारण रेल विकास निगम लिमिटेड ने अप्रैल 2017 में हैदराबाद की कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया था। साथ ही कंपनी की जमानत राशि जब्त कर ली गई थी।
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‘भीमसेन और ऊसरगांव स्टेशन के बीच डबल ट्रैक का अधूरा काम पूरा कराने के लिए टेंडर दे दिया गया है। बैंक गारंटी की जांच चल रही है। उम्मीद है कि जनवरी से चीन और भारत की एचसीएल कंपनी संयुक्त रूप से काम शुरू कर देंगी।’
- राजीव श्रीवास्तव, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, आरवीएनएल।
चीन का सरकारी उपक्रम है सीआरसी
चाइना रेलवे कॉरपोरेशन (सीआरसी) चीन की सरकारी रेलवे का नाम है। ठेका लेने वाली कंपनी भी चाइना रेलवे का ही उपक्रम है। साथ ही, यह सरकारी स्वामित्व वाली एक औद्योगिक इकाई भी है। चाइना रेलवे की 21 उपकंपनियां हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में रेलवे विस्तार का काम करती हैं। चीन अपनी हाईस्पीड रेल तकनीक को भारत में लाने के लिए आक्रामक मार्केटिंग करता रहा है। इस बीच भारत-चीन के बीच रेलवे के विकास के लिए कई करार हुए हैं। इसी के तहत इंडियन रेलवे इंजीनियर्स चीन में हैवी हॉलिंग की विशेष ट्रेनिंग ले रहे हैं। वहीं, चीन भारत के साथ रेलवे यूनिवर्सिटी बनाने के लिए भी प्रयासरत है।
2019 चुनाव से पहले पूरे करने हैं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट
रेलवे सूत्रों के अनुसार 2019 के आम चुनाव से पहले भारतीय रेलवे 50 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट हर हाल में पूरे कर लेना चाहता है। इनमें 70 रेलवे स्टेशन को उन्नत करना, 3300 किलोमीटर के डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के हिस्सों का निर्माण, सीसीटीवी कैमरों का लगाया जाना, भारत की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन का संचालन आदि अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके लिए पूरे तंत्र को सुधारने, धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट को नई कंपनियों से तय समय सीमा में पूरा कराना आदि शामिल हैं।