फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Children holding shovels and phones at the age when they should be holding books

Jhansi News: किताबें थामने की उम्र में बच्चों के हाथों में फावड़ा और फोन

Fri, 09 Oct 2026 02:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:42 AM IST
विज्ञापन
Children holding shovels and phones at the age when they should be holding books
वार्ड नं. 33 का सरकारी विद्यालय खंडहर में तब्दील, 15 साल से है बंद, गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई से दूर
विज्ञापन


पंजाब सिंह
झांसी। सुबह का वक्त, उम्र पढ़ने-लिखने की और हाथों में मोबाइल। कोई फोन में रील देख रहा तो कोई गेम खेल रहा है। जगह है वार्ड नंबर 33, बाहर ओरछा गेट-कुरैश नगर क्षेत्र। पास खड़े बच्चों के परिजन से इस बावत पूछा तो वे बताते हैं कि क्षेत्र में शिक्षा बदहाल है। खंडहर की ओर इशारा करते हुए वह कहते हैं कि यह कभी आठवीं कक्षा तक का सरकारी विद्यालय होता था, जो करीब 15 साल से बंद है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह विद्यालय क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र जरिया था। इसके बंद हो जाने की वजह से कम उम्र के कई बच्चे नियमित पढ़ाई से दूर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों को दूर के स्कूल में भेजना आसान नहीं है। ऐसे में कई बच्चे घर पर मोबाइल में समय गुजारते हैं तो कुछ कम उम्र में ही माता-पिता के साथ मजदूरी करने लग जाते हैं। क्षेत्रवासियों ने बेसिक शिक्षा विभाग से मांग की है कि यहां पर विद्यालय का संचालन फिर से शुरू हो, जिससे बच्चों का कीमती समय बर्बाद न हो और पढ़-लिखकर उनका भविष्य उज्ज्वल हो।
विज्ञापन


फोटो
- क्षेत्र में संचालित सरकारी विद्यालय करीब 15 वर्ष पहले विद्यालय बंद हो गया। इसके बाद भवन की देखरेख नहीं हुई और धीरे-धीरे वह जर्जर होकर खंडहर में बदल गया। यदि इस विद्यालय का फिर से निर्माण हो तो कई जरूरतमंद परिवारों को लाभ होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- चौधरी मुहम्मद अली
-यह विद्यालय बंद होने के बाद बच्चों की पढ़ाई की कड़ी टूट गई। यहां स्कूल खुलने से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उन्हें मोबाइल की लत और बाल श्रम जैसी परिस्थितियों से बचाने में भी मदद मिलेगी।
-सचिन




हम इसी स्कूल में पढ़े, अपने बच्चों को कहां पढ़ाएं
-मैं खुद इसी विद्यालय में पढ़ा हूं। मेरे समय में स्कूल बच्चों की पढ़ाई का केंद्र था, लेकिन अब उसी जगह खंडहर है। नई पीढ़ी के बच्चों के सामने पढ़ाई जारी रखने का विकल्प सीमित है।
- चौधरी खलील कुरैशी



मोबाइल की लत बढ़ी, पढ़ाई से दूरी का खतरा

- स्कूल बंद होने के बाद बच्चों के पास खाली समय तो है, लेकिन पढ़ाई का माहौल और सुविधाजनक विकल्प नहीं है। इसका असर उनकी दिनचर्या पर पड़ रहा है। मोबाइल गेम और सोशल मीडिया बच्चों के समय का बड़ा हिस्सा ले रहे हैं।

- अशोक कुशवाहा

00000000000000000000
- वार्ड नं. 33 के निवासियों ने विद्यालय की मांग की है। पहले से मौजूद विद्यालय भवन का जल्द सर्वे कराया जाएगा। सर्वे के आधार पर भवन की स्थिति और आवश्यकता का आकलन कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- जितेंद्र कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed