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Jhansi News: मम्मी-पापा की हर बात पर ‘ना’ बोल रहे बच्चे... डिसऑर्डर कर रहा बीमार

Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
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Children are saying 'no' on everything of parents...disorder is sick
झांसी। बच्चे के लिए उसके माता-पिता से बढ़कर कोई और नहीं होता है। आमतौर पर बच्चा भी इनका प्यार पाकर बहुत खुश रहता है। लेकिन जब बच्चा इन्हीं प्रियजनों से खुद को दूर करने लगे तो यह स्थिति ठीक नहीं है। बच्चा अगर बात-बात पर आक्रामक होने लगे, हर बात पर न कहे, तो जान लेना चाहिए कि ये सिर्फ बच्चे की जिद और गुस्सा नहीं है। डिसऑर्डर उसे बीमार कर रहा है।
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बच्चे के व्यवहार में यह बदलाव ओपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (ओडीडी) हो सकता है। मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि इस स्थिति को हल्के में न लें। यह एक मनोवैज्ञानिक विकार है। यह आमतौर पर बच्चों में पाया जाता है। गुस्सैलपन और अड़ियल बर्ताव इसका प्रमुख लक्षण है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इससे जुड़े कई और लक्षण भी सामने आने लगते हैं। इसमें माता-पिता की सतर्कता और सकारात्मक रवैया बच्चों को इस विकार से बचाने में सहायक होता है। जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग और मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में इन दिनों 4 से 16 साल तक के बच्चों के लगभग हर रोज केस आ रहे हैं।
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केस-1
एक आठ साल का बच्चा बार-बार स्कूल जाने से मना करता था। घर में मोबाइल गेम खेलता था। मां ने उसके साथ सख्ती शुरू की तो एक दिन बच्चे ने किचन में रखा चाकू अपनी गर्दन पर रख लिया और कहा कि मैं मर जाऊंगा। मुझसे कोई बात मत करो। मां अपने छोटे से बच्चे की इस हरकत से बुरी तरह डर गई। वह काउंसलिंग के लिए बच्चे को मनोचिकित्सक के पास ले गईं। बच्चे की काउंसलिंग चल रही है।
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केस-2
आठ-नौ साल का एक बच्चा घरवालों की हर बात पर चिड़चिड़ाता था। घर पर किसी से बात भी नहीं करता था। मां को लगा कि बच्चा बीमार है। वह उसे जिला अस्पताल ले गईं। जांच में पता चला कि बच्चा कोई नशा कर रहा है। काउंसलिंग में बच्चे ने बताया कि स्कूल के बाहर एक अंकल उसे इसकी टॉफी देते हैं। उसे ये टॉफी बहुत पसंद है। अब बच्चे का इलाज और काउंसलिंग चल रही है।
केस-3
एक 15-16 साल के लड़के ने अपने स्कूल की एक लड़की को प्रपोज कर दिया। लड़की ने मना किया तो उसने मारने की धमकी दे डाली। इस पर टीचर ने लड़के के माता-पिता को बुलाकर इस बारे में बताया। माता-पिता ने घर में उसके डांटा-फटकारा और समझाया तो लड़का आक्रामक हो गया। वह घरवालों की हर बात पर न कहने लगा। लड़के की काउंसलिंग चल रही।
बच्चा करीबी लोगों के साथ अड़ियल रवैया अपनाता है
ओपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (ओडीडी) के बहुत केस आ रहे हैं। तीन-चार साल पहले जहां दो-चार महीने में केस आते थे। वहीं, अब हर रोज एक-दो केस मिल रहे हैं। इसमें बच्चे सिर्फ अपने माता-पिता और बेहद करीबी लोगों के साथ अड़ियल रवैया अपनाता है। बात-बात पर उसका गुस्सा बढ़ता है। माता-पिता की अच्छी बातों को भी नजरंदाज करता है। सही समय पर काउंसलिंग न हो तो स्थिति खराब हो जाती है। बच्चे का कॅ रियर तक खराब हो जाता है। बच्चे गलत संगत में पड़ जाते हैं।

डॉ. शिकाफा जाफरीन, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
बात मनवाने के लिए आक्रामक हो जाता है बच्चा
ओडीडी के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। केंद्र में चार से आठ साल तक बच्चों में भी यह स्थिति देखने को मिल रही है। इससे पीड़ित बच्चे अपनी हर बात मनवाने के लिए बहुत जल्दी आक्रामक हो जाते हैं। चीजें फेंकना, तोड़ना, चिल्ला-चिल्लाकर रोते हैं, ताकि माता-पिता उनकी बात मान लें। इसके लिए जरूरी है कि शुरूआत से ही बच्चे पर ध्यान दें। जरूरी है कि बच्चे के इस व्यवहार को सिर्फ उसकी जिद न समझें। मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास तुरंत जाएं। इस डिसऑर्डर को ठीक किया जा सकता है।
डॉ. मनीष, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र
ये हैं लक्षण
-बात-बात पर गुस्सा आना
-किसी भी बात पर चिढ़ जाना
-हर बात पर बहुत अधिक बहस करना
-जानबूझकर दूसरों को परेशान करना
-उम्र बढ़ने के साथ आक्रामकता बढ़ना
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