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Jhansi News: केमिकल, सोयाबीन से बन रहा पनीर, खोआ में भी कच्चा-पक्का का खेल

Thu, 06 Mar 2025 01:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Mar 2025 01:40 AM IST
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Cheese is being made from chemicals and soybean, there is a game of raw and solid even in khoya.

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। महानगर में दूध में केमिकल और सोयाबीन मिला पनीर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। केमिकल के इस्तेमाल से पनीर में खट्टापन नहीं आता है। वहीं, खोआ में भी कच्चा-पक्का का खेल चल रहा है। वनस्पति, तेल और दूध पाउडर से बनने वाला मिलावटी खोआ असली की तुलना में 80 से 100 रुपये किलो सस्ता भी बिक रहा है।

होली पर खोआ की खपत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। बाजार में पक्का यानी असली खोआ 300 से 340 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि, कच्चा यानी मिलावटी खोआ की कीमत 220 से 240 रुपये किलो है। व्यापारियों ने बताया कि एक किलो खोआ बनाने में लगभग पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। लगभग 55 रुपये लीटर दूध बिक रहा है। ऐसे में पांच लीटर दूध की कीमत ही 275 रुपये पड़ती है। ऐसे में ढाई सौ रुपये से कम में असली खोआ मिलना असंभव है।
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ऐसे में मिलावटी खोआ दूध पाउडर, तेल और वनस्पति मिलाकर बनाया जाता है। इसमें केमिकल भी डाला जाता है, जिससे 15 दिन तक खट्टापन नहीं आता है। वास्तविक खोए में पांच दिन में ही खट्टापन आ जाता है। बताया गया कि झांसी में आगरा से आने वाला खोआ 240, शिवपुरी का 250 रुपये किलो बिक रहा है।
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वहीं, दूध में सूजी मिलाकर बड़ी तादाद में बनाया गया मिल्क केक भी बाहर से झांसी आ रहा है। इसे वॉयलर मशीन में गर्म करके तैयार किया जाता है। इसकी लागत 100 से 125 रुपये आती है। इसे बाजार में 350 रुपये किलो बेचा जा रहा है। इसके अलावा सोयाबीन और क्रीम निकला दूध मिलाकर मिलावटी पनीर बनाया जा रहा है। सोयाबीन की मिलावट से बनने वाला पनीर मुलायम रहता है। इसमें भी खट्टापन कई दिनों तक न हो, इसलिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। असली पनीर की कीमत 300 से 340 रुपये है। जबकि, मिलावटी पनीर 200 से 220 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि, इसे बनाने में लगभग 160 से 170 रुपये लागत आती है।



लिवर से लेकर किडनी डैमेज होने का खतरा



जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि केमिकल युक्त खोआ, पनीर समेत अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने से लिवर के साथ-साथ किडनी भी डैमेज होने का खतरा रहता है। लगातार केमिकल मिले खाद्य पदार्थ खाने से धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाएं डैमेज होती रहती हैं। किडनी द्वारा शरीर के खून को छानने की प्रक्रिया भी लगातार बाधित होती रहती है।


ऐसे में असली, मिलावटी की पहचान

- मेडिकल स्टोर से टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें डालने पर मिलावटी पनीर काला पड़ जाता है। जबकि, असली पनीर काला नहीं पड़ता है।



- जानकारों ने बताया कि हाथ में रखकर मलने पर मिलावटी खोआ चिकनाहट छोड़ने लगता है। जबकि, ऐसा करने पर असली खोआ चिकनाहट नहीं छोड़ता है।

- असली और मिलावटी खोआ की पहचान भी आसानी से की जा सकती है। बताया गया कि कढ़ाई में भूंजने पर मिलावटी पनीर पानी जैसा हो जाएगा। जबकि, असली पनीर भूंजने पर लालपन आ जाएगा।



ये बोले व्यापारी

देसी खाेआ की कीमत लगभग 300 रुपये प्रति किलो है। होली में खोआ की मांग काफी बढ़ जाती है। - आकाश कौशल



खुद खोआ बनाकर 320 रुपये किलो बेचता हूं। कुछ लोग सस्ता खोआ देने आते हैं तो मना कर देता हूं। - गौरव हिरवानी
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