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अब आठ साल के बच्चों को भी हो रहा सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
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झांसी। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों ने स्मार्टफोन और लैपटॉप का खूब इस्तेमाल किया। स्कूल खुलने के बावजूद अब इसकी ऐसी लत बालक, किशोरों को लग गई है, जो छूटने का नाम नहीं ले रही। घंटों मोबाइल, लैपटॉप पर समय बिताने की वजह से बच्चे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस यानी गर्दन के दर्द का शिकार हो रहे हैं। कइयों को कमर दर्द भी शुरू हो गया है।
कोरोना काल के पहले गर्दन और कमर दर्द की समस्या लेकर गिने-चुने बालक और किशोर ही पहुंचते थे। ज्यादातर युवाओं और बुजुर्गों में ये समस्या देखने को मिलती थी। कोविड के बाद से अब इस तरह की समस्याएं बालक और किशोरों में भी काफी देखने को मिल रही है। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहगल ने बताया कि लगातार गर्दन झुकाकर बहुत देर तक मोबाइल, लैपटॉप देखने से सर्वाइकल स्प्राइन (मोच) आने लगती है। लंबे समय तक इसके बने रहने से फिर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या हो जाती है। इतनी कम उम्र में ये बीमारी होने पर बहुत लंबे समय बनी रहती है। यही नहीं, उम्र बढ़ने के साथ बीमारी और कष्टदायी हो जाती है। इसके अलावा गलत मुद्रा में बैठने से कमर के निचले हिस्से में कई बच्चों को दर्द भी शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज की हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में करीब 150 मरीज दिखाने आते हैं। इनमें आठ से 14 साल के पांच से सात प्रतिशत बच्चे सर्वाइकल स्पॉडिन्लाइटिस, कमर दर्द का इलाज कराने आते हैं। वहीं, डॉ. सतीश अग्रवाल ने बताया कि बालकों और किशोरों को अब अपना स्क्रीन टाइम तय करना होगा। वरना ये आदत उन्हें भविष्य में बहुत तकलीफ देगी।
इन बातों का रखें ध्यान
- सही तरीके से बैठें
- शारीरिक क्रिया जरूर करें
- 15-20 मिनट धूप में जरूर रहें
- मोबाइल आंख के सामने रखकर देखें
- फोन, कंप्यूटर चलाने का समय तय करें
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कोरोना काल के पहले गर्दन और कमर दर्द की समस्या लेकर गिने-चुने बालक और किशोर ही पहुंचते थे। ज्यादातर युवाओं और बुजुर्गों में ये समस्या देखने को मिलती थी। कोविड के बाद से अब इस तरह की समस्याएं बालक और किशोरों में भी काफी देखने को मिल रही है। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहगल ने बताया कि लगातार गर्दन झुकाकर बहुत देर तक मोबाइल, लैपटॉप देखने से सर्वाइकल स्प्राइन (मोच) आने लगती है। लंबे समय तक इसके बने रहने से फिर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या हो जाती है। इतनी कम उम्र में ये बीमारी होने पर बहुत लंबे समय बनी रहती है। यही नहीं, उम्र बढ़ने के साथ बीमारी और कष्टदायी हो जाती है। इसके अलावा गलत मुद्रा में बैठने से कमर के निचले हिस्से में कई बच्चों को दर्द भी शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज की हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में करीब 150 मरीज दिखाने आते हैं। इनमें आठ से 14 साल के पांच से सात प्रतिशत बच्चे सर्वाइकल स्पॉडिन्लाइटिस, कमर दर्द का इलाज कराने आते हैं। वहीं, डॉ. सतीश अग्रवाल ने बताया कि बालकों और किशोरों को अब अपना स्क्रीन टाइम तय करना होगा। वरना ये आदत उन्हें भविष्य में बहुत तकलीफ देगी।
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इन बातों का रखें ध्यान
- सही तरीके से बैठें
- शारीरिक क्रिया जरूर करें
- 15-20 मिनट धूप में जरूर रहें
- मोबाइल आंख के सामने रखकर देखें
- फोन, कंप्यूटर चलाने का समय तय करें