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सावधान, मंडरा रही है मौत

अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 23 Jun 2016 01:08 AM IST
electricity
electricity - फोटो : amar ujala
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झांसी। बरसात आ गई  है लेकिन विद्युत सुरक्षा के मद्देनजर जिले में पुख्ता इंतजाम नहीं है। कई जगह असुरक्षित तरीके से रखे ट्रांसफार्मर और बेतरतीब लटके-उलझे तार मौत को दावत दे रहे हैं। पिछले एक साल के भीतर करेंट की चपेट में आकर कई लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन इससे भी संबंधित विभागों ने सबक नहीं लिया है। इसके लिए जिम्मेदार विद्युत सुरक्षा निदेशालय और बिजली विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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न तो कोई सर्वे रिपोर्ट बनी है और न ही लोगों को करंट से बचाने के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं।
जिले में तीन हजार से अधिक ट्रांसफार्मर हैं। इनमें कई ट्रांसफार्मर असुरक्षित तरीके से रखे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या सबसे अधिक हैं। रखरखाव पर ध्यान न दिए जाने के कारण ये जानलेवा हो सकते हैं। बरसात में ट्रांसफार्मर जलने और उनके नजदीक में लगे विद्युत खंभों में करंट दौड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। इसी तरह कई क्षेत्रों में हवा में झूल रहे बेतरतीब तार बेहद खतरनाक हैं। मंगलवार की सुबह हुई मूसलाधार बारिश के दौरान सीपरी बाजार क्षेत्र के जर्मनी अस्पताल के पास रखे ट्रांसफार्मर और खंभे में करेंट उतर आया। चपेट में आने से दो गायों की मौत हो गई थी।


नियम है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अवर अभियंता व कर्मचारी हर तीन माह में सर्वे कर ऐसे ट्रांसफार्मरों और बेतरतीब तारों की रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विद्युत अधिकारियों को सौंपे, ताकि समय रहते उनको पूर्ण रूप से सुरक्षित किया जा सके। लंबे समय से विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने ऐसी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की है।
 
दावा
‘महानगर के ज्यादातर ट्रांसफार्मरों को चबूतरे पर रखने के बाद फेंसिंग कराई जा चुकी है, जो बचे है उनको भी स्काडा योजना के तहत सुरक्षित किया जा रहा है। बारिश में कभी- कभी ट्रांसफार्मर के पास लगे खंभे का इंसुलेटर क्रेक होने के बाद करंट बाहर बहने लगता है। हालांकि, ऐसे मामलों में लाइन तुरंत बंद हो जाती है।’
राकेश कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता (नगर)।

मानक
- ट्रांसफार्मर के आसपास दस फीट तक कोई भवन नहीं होना चाहिये।
- ट्रांसफार्मर को दो फुट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित करना चाहिए।
- ट्रांसफार्मर के चारों तरफ लोहे की जाली की फेंसिंग होनी चाहिए।
- ट्रांसफार्मर की नियमित पेट्रोलिंग (देखरेख) होनी चाहिए।
-बिजली के तार भवनों से कम से कम पांच फुट दूरी पर होने चाहिये।


इन क्षेत्रों में बेतरतीब तार और ट्रांसफार्मर
महानगर के पंचवटी नाले का बाग, अलीगोल, खाती बाबा, अलीगोल, सलीमबाग, नाला का बाग, डड़ियापुरा, आईटीआई, खैरा प्रेमनगर, छनिया पुरा आदि क्षेत्र शामिल है।

अलर्ट रहिए
 बारिश के दौरान ट्रांसफार्मर और विद्युत खंभों के आसपास नहीं खड़े हों। विद्युत खंभों को नहीं छूना चाहिए।  ट्रांसफार्मरों के आसपास दुकान नहीं लगाएं। ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखें। झूलते तारों के नीचे न तो खुद खड़े हों न ही वाहन खड़े करें।

हादसे-दर-हादसे
पिछले तीन माह में करंट लगने से 18 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें चार संविदा कर्मचारी व आठ अन्य लोग शामिल है। मरने वाले में आधा दर्जन भैंस और गाय भी हैं। वित्तीय वर्ष 2015- 16 में झांसी, ललितपुर और जालौन में करंट लगने से 57 घटनाएं हुई। इनमें 27 लोगों की जान गई।  

सुरक्षा किट नहीं
बिजली के तार और ट्रांसफार्मर दुरुस्त करने वाले कर्मचारियों के पास दस्ताने, कवर्ड प्लास, सेफ्टी बेल्ट, बरसाती जूते, रेटकोट, टार्च आदि होना आवश्यक है। लेकिन ज्यादातर को ये सुरक्षा किट नहीं उपलब्ध करवाई गई है।


मुआवजा ले सकते हैं
करंट लगने से होने वाली मौतों पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा मिलता है। शासन ने इंसान की मौत पर डेढ़ लाख रुपये और जानवर की मौत पर पांच हजार रुपये मुआवजे का प्रावधान कर रखा है। इसके लिए हादसे में मारे गए या घायल व्यक्ति के परिजन निर्धारित फार्म भरकर सुरक्षा निदेशालय को देना होगा। इसकी जांच होगी। यदि विद्युत विभाग की गलती से हादसा हुआ है तो संबंधित व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा।  
 
सुरक्षा निदेशालय का बुरा हाल
महानगर में सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा निदेशालय कार्यालय का हाल बुरा बना हुआ है।े साल से सहायक निदेशक का पद खाली है। कानपुर के सहायक निदेशक ही झांसी का काम देख रहे है। दो जेई हैं जो झांसी, ललितपुर और जालौन जनपद का काम देख रहे हैं। वर्तमान में 28 दुर्घटनाओं के मामलों जांच लंबित चल रही है। इनमें एक जांच दस साल पुरानी है, जिसमें 21 अक्तूबर 2006 को जालौन निवासी  शीला पुत्री सूरज प्रसाद की करंट लगने से मौत हो गई थी।
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