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बौराए नीम, आम दे रहे बुंदेलखंड को शुभ संकेत

Thu, 14 Apr 2016 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 14 Apr 2016 02:05 AM IST
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bundelkhand water crisis
bundelkhand, jhandi hindi news - फोटो : amar ujala
सामजय नायक
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झांसी। सूखे की आग में झुलस रहे बुंदेलखंड के किसानों के लिए नीम और आम के पेड़ शुभ संकेत लेकर आए हैं। इन पेड़ों में फलफूल रहीं बौरों को किसान अच्छे मानसून का संदेश मान रहे हैं। इससे किसानों के मुर्झाए चेहरों पर उत्साह नजर आने लगे है। कुदरत के इस रुख से जुड़ीं पुरानी कहावतें गांव-गांव में दोहराई जा रही हैं। सामान्य से अधिक बारिश की मौसम विभाग की भविष्यवाणी किसानों के इस विश्वास को और भी पुख्ता कर रही हैं।

बुंदेलखंड में सूखे के इस आलम में जहां दूर-दूर तक खेतों में हरियाली नजर नहीं आ रही है। वहीं, कुदरत की इस मार को चुनौती देते हुए नीम व आम के पेड़ बौरों से ढके नजर आ रहे हैं। इसे किसान अच्छे मानसून का संकेत मान रहे हैं। वह प्रकृति के इस नजारे को पुरानी बुंदेली कहावत ‘अक्का कोदो नीम वना, अम्मा मोरी धान, सफल समैया जानिए, जब तर झर मौरे आम’। इस कहावत में स्पष्ट है कि जिस साल अकुवा के पेड़ पर ज्यादा फूल आएं, उस वर्ष कोदो (विशेष प्रकार का चावल) की फसल अच्छी होती है।
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नीम पर फूल ज्यादा खिलें तो वना (कपास) की खेती तथा आम अच्छा बौराएं तब धान की खेती बहुत अच्छी होती है। इन सभी के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। यह फसलें अच्छी बारिश होने पर ही होती हैं। इसी तरह से अच्छी बारिश का संकेत देने वाली घाघ की कहावत ‘चैत्र मास दसमी खड़ा, जो कहूं कोरा जाइ। चौमासे भरा बादला, भली भांति बरसाई’। इसका मतलब है कि चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की दशमी पर आसमान में बादल नहीं छाए होने पर अच्छी बारिश होगी। अभी आसार दशमी पर आसमान साफ रहने के ही हैं।
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बुंदेली संस्कृति के जानकार हरगोविंद कुशवाहा के मुताबिक कई सौ साल से बुंदेलखंड में प्रचलित उक्त कहावतें आज भी एकदम फिट बैठती हैं। इस बार नीम व आम में अच्छी बौरें आईं हैं। इससे साफ है कि बारिश भी अच्छी होगी।
मालूम हो कि इसके अलावा मौसम विभाग भी पहले सामान्य से ज्यादा बारिश की भविष्यवाणी कर चुका है। कुदरत व विज्ञान से मिल रहे इन संकेतों से सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में सभी के चेहरों पर उत्साह है।


बारिश को भांपने का यह भी है तरीका
झांसी। बारिश की स्थिति को भांपने के बुंदेलखंड में और भी तरीके अपनाए जाते हैं। अक्षय तृतीया पर महिलाएं मटके में चने की दाल के चार दाने डालती हैं। 24 घंटे बाद इनमें से जितने दाने फूलते है, चौमासे में उतने माह बारिश होने की संभावना जताई जाती है।। इसी प्रकार से चैत्र की नवरात्रि पर बोए गए जवारे नवमी तक अच्छी स्थिति में आ जाए, तो आगामी फसल अच्छी होने की उम्मीद जताई जाती है।
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