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व्यवस्था बदहाल, इलाज नहीं रेफर कर रहे सरकारी अस्पताल
amarujala
Updated Thu, 04 Oct 2018 02:17 AM IST
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hospital, jhansi news
- फोटो : demo
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जेल में भी डेंगू का हमला हो गया है। प्लेटलेट्स गिरने से हालत बिगड़ने पर तीन बंदियों को जिला अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। वहां स्थिति नहीं संभली तो तीनों मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिए गए। यहां से भी उन्हें पीजीआई भेजने की नौबत आ गई लेकिन इलाज के दौरान सेहत में कुछ सुधार होने पर रेफर नहीं किया गया। उधर, स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट न होने पर इन्हें डेंगू का मरीज मानने से इंकार कर रहा है।
बताया गया कि जिला कारागार में बंद बलवीर (40) पुत्र बुद्धा, धर्मेंद्र (28) पुत्र मक्खू, दशरथ (27) पुत्र चंद्रपाल को पिछले कुछ दिनों से बुखार बना था। दो दिन पहले उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहां चंदन पैथोलॉजी लैब में उनकी जांच कराई गई, तो डेंगू पॉजिटिव मिला। अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन खराब होने से प्लेटलेट्स नहीं चढ़ सकी और मरीजों की हालत बिगड़ती चली गई। इस पर उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में भी ब्लड सेपरेटर मशीन खराब पड़ी थी तो यहां भी प्लेटलेट्स नहीं मिल सकी। एक मरीज की ब्लीडिंग शुरू हो गई। किसी की प्लेटलेट्स 15 हजार, किसी की 25 हजार तक गिर गई। ऐसे में उन्हें पीजीआई लखनऊ रेफर करने की नौबत आ गई। हालांकि, दवाओं और इंजेक्शन के सहारे डॉक्टरों ने स्थिति को कुछ हद तक सुधार लिया। मौजूदा समय में बंदियों की हालत स्थिर बनी है।
इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी आरके गुप्ता का कहना है कि मरीजों का एलाइजा टेस्ट नहीं होने के कारण अभी इन्हें डेंगू होने की पुष्टि नहीं कर सकते हैं। रैपिड कार्ड की रिपोर्ट मान्य नहीं है। हालांकि, जेल में मंगलवार को दिन में लार्वी साइड का छिड़काव करा दिया गया है। बुधवार को भी फॉगिंग कराई गई।
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बताया गया कि जिला कारागार में बंद बलवीर (40) पुत्र बुद्धा, धर्मेंद्र (28) पुत्र मक्खू, दशरथ (27) पुत्र चंद्रपाल को पिछले कुछ दिनों से बुखार बना था। दो दिन पहले उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहां चंदन पैथोलॉजी लैब में उनकी जांच कराई गई, तो डेंगू पॉजिटिव मिला। अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन खराब होने से प्लेटलेट्स नहीं चढ़ सकी और मरीजों की हालत बिगड़ती चली गई। इस पर उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में भी ब्लड सेपरेटर मशीन खराब पड़ी थी तो यहां भी प्लेटलेट्स नहीं मिल सकी। एक मरीज की ब्लीडिंग शुरू हो गई। किसी की प्लेटलेट्स 15 हजार, किसी की 25 हजार तक गिर गई। ऐसे में उन्हें पीजीआई लखनऊ रेफर करने की नौबत आ गई। हालांकि, दवाओं और इंजेक्शन के सहारे डॉक्टरों ने स्थिति को कुछ हद तक सुधार लिया। मौजूदा समय में बंदियों की हालत स्थिर बनी है।
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इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी आरके गुप्ता का कहना है कि मरीजों का एलाइजा टेस्ट नहीं होने के कारण अभी इन्हें डेंगू होने की पुष्टि नहीं कर सकते हैं। रैपिड कार्ड की रिपोर्ट मान्य नहीं है। हालांकि, जेल में मंगलवार को दिन में लार्वी साइड का छिड़काव करा दिया गया है। बुधवार को भी फॉगिंग कराई गई।
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