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जीवन पर भारी पड़ी महामारी, कई परिवारों का भविष्य अंधकार में

Wed, 02 Jun 2021 01:34 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 01:34 AM IST
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amar ujala apnatatav
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर लोगों के जीवन पर बेहद भारी गुजरी है। इस महामारी ने तमाम परिवारों को उजाड़ दिया है। कमाऊ सदस्य की मौत से कई परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बच्चों के भविष्य के बारे में कुछ समझ नहीं रहा है। वहीं, जीवन-यापन तक मुश्किल हो गया है। हालांकि, सरकार की ओर से ऐसे परिवारों की मदद की घोषणा की गई है। इसके अलावा तमाम समाजसेवी भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसी कड़ी में अमर उजाला की ओर से अपनत्व अभियान शुरू किया गया है, जिसके जरिये ऐसे परिवारों को सामने लाया जा रहा है, जिन्हें मदद की दरकार है। सरकारी तंत्र और समाजसेवियों से उम्मीद है कि वे ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे आएंगे।
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मां-बाप का साया उठा, बेसहारा हुए बच्चे
झांसी। बिजौली के शारदा नगर निवासी शेखर परिहार (35) ऑटो चलाकर अपने परिवार का जीवन - यापन करते थे। अचानक उनकी पत्नी सीमा कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गईं और महामारी के संक्रमण से जूझते हुए उनकी मौत हो गई। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ दिनों बार शेखर भी कोरोना वायरस के शिकार हो गए और उनकी भी मौत हो गई। वे अपने पीछे तीन बच्चों सनी, साक्षी व संध्या को छोड़ गए हैं। उनकी देखभाल दादी सुखदेवी कर रहीं हैं। बुजुर्ग दादी दूसरों के घरों में काम कर किसी तरह बच्चों का पालन पोषण कर रहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई तो दूर की बात, जीवन-यापन का संकट सामने खड़ा हुआ है।
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पिता का छूटा साथ, बच्चों को भविष्य संकट में
झांसी। सरांय मोहल्ला निवासी महेश विश्वकर्मा (46) छोटा मोटा-काम कर परिवार का भरण पोषण करते थे। कभी काम मिलता था, कभी नहीं, लेकिन किसी तरह गुजर-बसर कर रहे थे। लेकिन अचानक महामारी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। वे अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें एक लड़की और दो लड़के हैं। तीनों ही बच्चे पढ़ने वाले हैं, परंतु अब परिवार की मुखिया और कमाऊ सदस्य की मौत के बाद से परिवार गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। आय का कोई स्रोत न होने की वजह से जीवन यापन का संकट खड़ा हुआ है। इसके अलावा भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
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पिता की मौत, कर्ज में डूबा परिवार
झांसी। ऋतु विहार कॉलोनी निवासी श्यामसुंदर प्रजापति ऑटो चलाकर परिवार का जीवन यापन करते थे। अचानक वे कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ गए। परिजनों ने बचाने की हर संभव कोशिश की। निजी अस्पताल में इलाज कराया और इलाज पर कर्ज लेकर तीन लाख रुपये खर्च किए। बावजूद, श्यामसुंदर बच नहीं सके और 30 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। अपने पीछे वे पत्नी चार बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें दो बेटे और दो बेटियां हैं। कमाऊ सदस्य की मृत्यु के बाद से परिवार गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। इसके अलावा पिता को इलाज के लिए लिया गया कर्ज कैसे चुकाया जाएगा, ये समस्या भी खड़ी हुई है।
परिवार में नहीं बचा कोई कमाने वाला
झांसी। रक्सा निवासी दुर्गेश कुमार खरे (46) प्राइवेट काम कर परिवार का भरण पोषण करते थे। कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने से पांच मई को उनकी मौत हो गई। वे अपनी पीछे पत्नी व 17 साल के बेटे को छोड़ गए हैं। दुर्गेश की मौत के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के कमाऊ सदस्य की मौत से परिवार पर आर्थिक संकट हावी हो गया है।

हमें दीजिए जानकारी
झांसी। कोरोना संक्रमण ने जिले में कई बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों की पहचान का अभियान शुरू किया है। हम सरकार, जिला प्रशासन और जरूरतमंद बच्चों के बीच सेतु बनकर उन्हें मदद दिलवाने का प्रयास करेंगे। आपको अपने आसपास ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया हमें 7617566165 पर व्हाट्सएप के जरिए बताएं अथवा jhs-cityreporter@jhs.amarujala.com पर ई-मेल करें। अगर आपके पास बच्चों का कोई फोटो हो तो उसे भी भेजें।
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