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माल छोड़ने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप, जांच के घेरे में वाणिज्य कर अफसर
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झांसी। वाणिज्य कर विभाग के सचल दल में तैनात दो अफसरों पर एक व्यापारी ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। कमिश्नर मुख्यालय ने ज्वाइंट कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद जांच कानपुर के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह को सौंप दी है। अभी एडिशन कमिश्नर ग्रेड वन झांसी से दोनों सचल दल अफसर संबद्ध चल रहे हैं। यह मामला विभाग में चर्चा में बना हुआ है।
वाणिज्य कर विभाग में पांच सचल दल हैं। प्रत्येक सचल दल में एक सहायक कमिश्नर व एक सीटीओ (वाणिज्य कर अधिकारी) की तैनाती है। यह सचल दल अलग- अलग मार्गों पर वाहनों की चेकिंग कर टैक्स चोरी का माल पकड़ते हैं। तीन महीने पहले हाइवे पर सचल दल ने एक गाड़ी जांच के लिए खड़ी की थी। इस मामले में संबंधित व्यापारी ने एक लिखित शिकायत मुख्यालय व जोन के अधिकारियों से की थी। जिसमें आरोप लगाया गया कि संबंधित सचल दल में तैनात सहायक कमिश्नर व सीटीओ ने सभी प्रपत्र होने के बाद भी माल छोड़ने के बदले रिश्वत ले ली। इस शिकायत पर मुख्यालय अफसरों ने रिपोर्ट मांगी। साथ ही शिकायत में फंसे दोनों अधिकारियों को एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन से संबद्ध कर दिया गया। सचल दल का चार्ज विशेष अनुसंधान शाखा के सहायक कमिश्नर को सौंप दिया गया।
इधर, कमिश्नर मुख्यालय के आदेश के बाद ज्वाइंट कमिश्नर (प्रवर्तन) अरुण कुमार सिंह ने रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय ने भेज दी। रिपोर्ट के आधार पर अब जांच को कानपुर के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह को सौंप दी गई है।
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सचल दल अफसर का बना लिया था वीडियो, दब गया मामला
सचल दल अफसरों पर माल छोड़ने के बदले रिश्वत मांगने के पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। पिछले साल भी एक व्यापारी ने कार्यालय के अंदर एक सचल दल अफसर (सहायक कमिश्नर) का रिश्वत लेते वक्त वीडियो बना लिया था। व्यापारी ने जिले के एक बड़े अधिकारी को जाकर वीडियो दिखाया। इस पर अधिकारी ने वाणिज्य कर विभाग के उच्च अधिकारियों को बुलाकर खूब खरी खोटी सुनाई थी। वहीं, सचल दल अफसर बिना बताए कानपुर चले और तभी लौटकर आए जब उन्होंने बचने का रास्ता तलाश कर लिया।
संविदा कर्मी करते हैं बिचौलिए का काम
वाणिज्य कर विभाग के हर सचल दल में संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। हर सचल दल में कागजी कार्रवाई को पूरा करने के लिए एक कर्मचारी को तैनात किया गया है, लेकिन सचल दल अफसरों को संविदा कर्मियों के कार्य पर भरोसा अधिक रहता है। संविदा कर्मी बिचौलिए का भी काम करते हैं। इस बात की शिकायत भी कई उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रहती है।
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वाणिज्य कर विभाग में पांच सचल दल हैं। प्रत्येक सचल दल में एक सहायक कमिश्नर व एक सीटीओ (वाणिज्य कर अधिकारी) की तैनाती है। यह सचल दल अलग- अलग मार्गों पर वाहनों की चेकिंग कर टैक्स चोरी का माल पकड़ते हैं। तीन महीने पहले हाइवे पर सचल दल ने एक गाड़ी जांच के लिए खड़ी की थी। इस मामले में संबंधित व्यापारी ने एक लिखित शिकायत मुख्यालय व जोन के अधिकारियों से की थी। जिसमें आरोप लगाया गया कि संबंधित सचल दल में तैनात सहायक कमिश्नर व सीटीओ ने सभी प्रपत्र होने के बाद भी माल छोड़ने के बदले रिश्वत ले ली। इस शिकायत पर मुख्यालय अफसरों ने रिपोर्ट मांगी। साथ ही शिकायत में फंसे दोनों अधिकारियों को एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन से संबद्ध कर दिया गया। सचल दल का चार्ज विशेष अनुसंधान शाखा के सहायक कमिश्नर को सौंप दिया गया।
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इधर, कमिश्नर मुख्यालय के आदेश के बाद ज्वाइंट कमिश्नर (प्रवर्तन) अरुण कुमार सिंह ने रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय ने भेज दी। रिपोर्ट के आधार पर अब जांच को कानपुर के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन पीके सिंह को सौंप दी गई है।
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सचल दल अफसर का बना लिया था वीडियो, दब गया मामला
सचल दल अफसरों पर माल छोड़ने के बदले रिश्वत मांगने के पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। पिछले साल भी एक व्यापारी ने कार्यालय के अंदर एक सचल दल अफसर (सहायक कमिश्नर) का रिश्वत लेते वक्त वीडियो बना लिया था। व्यापारी ने जिले के एक बड़े अधिकारी को जाकर वीडियो दिखाया। इस पर अधिकारी ने वाणिज्य कर विभाग के उच्च अधिकारियों को बुलाकर खूब खरी खोटी सुनाई थी। वहीं, सचल दल अफसर बिना बताए कानपुर चले और तभी लौटकर आए जब उन्होंने बचने का रास्ता तलाश कर लिया।
संविदा कर्मी करते हैं बिचौलिए का काम
वाणिज्य कर विभाग के हर सचल दल में संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। हर सचल दल में कागजी कार्रवाई को पूरा करने के लिए एक कर्मचारी को तैनात किया गया है, लेकिन सचल दल अफसरों को संविदा कर्मियों के कार्य पर भरोसा अधिक रहता है। संविदा कर्मी बिचौलिए का भी काम करते हैं। इस बात की शिकायत भी कई उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रहती है।