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हवा में कोरोना संक्रमण को रोकेगा एयर सैनिटाइजर
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झांसी। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए हर कोई आविष्कार और नई तकनीकों को ईजाद कर रहा है। महानगर निवासी बीयू के एक छात्र ने कोरोना वायरस का संक्रमण खत्म करने के लिए बिना केमिकल का एयर सैनिटाइजर बनाया है। जिसके जरिए 100 वर्गफुट के कमरे को 30 मिनट में सैनिटाइज किया जा सकेगा।
महानगर के जुगयाना निवासी स्वर्णिम जैन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने एयर सैनिटाइजर संयंत्र तैयार किया है। इन संयंत्र में उन्होंने अल्ट्रावायलेट जर्मिसिडाल ट्यूूब का इस्तेमाल किया है। साथ ही एक छोटा फैन लगाया है। जिसके जरिए कमरे को सैनिटाइज किया जा सकेगा। स्वर्णिम बताते हैं कि लॉकडाउन में उन्होंने कोरोना वायरस को रोकने के लिए नई तकनीक से संयंत्र बनाने के बारे में सोचा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की
वेबसाइट पर उन्होंने कोविड से निपटने के लिए अल्ट्रावायलेट तकनीक के उपयोग के बारे में पढ़ा। इसके बाद उन्होंने सैनिटाइजर मशीन तैयार की। उन्होंने बताया कि यूं तो पराबैंगनी किरणें खतरनाक होती हैं, लेकिन संयंत्र में ट्यूब का उपयोग तीन लेयर में किया गया है। ताकि किसी को भी नुकसान न हो। संयंत्र में लगे फैन के जरिए किरणों से कमरे को सैनिटाइज किया सकेगा। उनका दावा है कि इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। इसमें 50 वाट बिजली खर्च होगी। साथ ही संयंत्र को इन्वर्टर से भी चलाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस संयंत्र को बनाने में उनके मामा विनय जैन और आलोक जैन ने काफी सहयोग किया। जल्द ही वे अपने संयंत्र का परीक्षण कराने के लिए विवि में आवेदन करेंगे।
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महानगर के जुगयाना निवासी स्वर्णिम जैन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने एयर सैनिटाइजर संयंत्र तैयार किया है। इन संयंत्र में उन्होंने अल्ट्रावायलेट जर्मिसिडाल ट्यूूब का इस्तेमाल किया है। साथ ही एक छोटा फैन लगाया है। जिसके जरिए कमरे को सैनिटाइज किया जा सकेगा। स्वर्णिम बताते हैं कि लॉकडाउन में उन्होंने कोरोना वायरस को रोकने के लिए नई तकनीक से संयंत्र बनाने के बारे में सोचा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की
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वेबसाइट पर उन्होंने कोविड से निपटने के लिए अल्ट्रावायलेट तकनीक के उपयोग के बारे में पढ़ा। इसके बाद उन्होंने सैनिटाइजर मशीन तैयार की। उन्होंने बताया कि यूं तो पराबैंगनी किरणें खतरनाक होती हैं, लेकिन संयंत्र में ट्यूब का उपयोग तीन लेयर में किया गया है। ताकि किसी को भी नुकसान न हो। संयंत्र में लगे फैन के जरिए किरणों से कमरे को सैनिटाइज किया सकेगा। उनका दावा है कि इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। इसमें 50 वाट बिजली खर्च होगी। साथ ही संयंत्र को इन्वर्टर से भी चलाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस संयंत्र को बनाने में उनके मामा विनय जैन और आलोक जैन ने काफी सहयोग किया। जल्द ही वे अपने संयंत्र का परीक्षण कराने के लिए विवि में आवेदन करेंगे।
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