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पटाखा पर विशेष: 120 डेसीमल से ज्यादा धमाके की आवाज से कान के पर्दे पर पड़ता है असर, बचाव को ऐसे करें आतिशबाजी
Tue, 14 Oct 2025 11:28 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 14 Oct 2025 11:28 AM IST
सार
धमाका होते ही सुनने की कोशिकाएं कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देती हैं। यदि धमाका 120 डेसीमल से ज्यादा है तो स्थायी रूप से कोशिकाएं खराब हो सकती हैं।
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कान
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
दीपावली पर आतिशबाजी करें मगर तेज धमाके के पटाखे नहीं चलाएं। तेज धमाके की आवाज से कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है। 120 डेसीमल से ज्यादा आवाज होने पर सुनने की शक्ति प्रभावित हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कश्यप ने बताया कि दीपावली पर युवाओं में तेज धमाके के पटाखे (बम) चलाने की होड़ रहती है, जो घातक हो सकती है। कान में अंदरूनी हिस्से में तेज आवाज की तरंगों से चोट लगती है। इससे सुनने की हड्डी (मैलियस, इनकस और स्टपीज) को नुकसान होता है। धमाका होते ही सुनने की कोशिकाएं कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देती हैं। यदि धमाका 120 डेसीमल से ज्यादा है तो स्थायी रूप से कोशिकाएं खराब हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि खुले मैदान में बम चलाने से उसके धमाके की आवाज कान पर कम असर करती है क्योंकि उसकी तरंगें चारों तरफ फैल जाती हैं। देखा जाता है कि युवा गलियों और छतों पर पटाखे चलाते हैं, वह घातक हो सकता है।
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मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कश्यप ने बताया कि दीपावली पर युवाओं में तेज धमाके के पटाखे (बम) चलाने की होड़ रहती है, जो घातक हो सकती है। कान में अंदरूनी हिस्से में तेज आवाज की तरंगों से चोट लगती है। इससे सुनने की हड्डी (मैलियस, इनकस और स्टपीज) को नुकसान होता है। धमाका होते ही सुनने की कोशिकाएं कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देती हैं। यदि धमाका 120 डेसीमल से ज्यादा है तो स्थायी रूप से कोशिकाएं खराब हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि खुले मैदान में बम चलाने से उसके धमाके की आवाज कान पर कम असर करती है क्योंकि उसकी तरंगें चारों तरफ फैल जाती हैं। देखा जाता है कि युवा गलियों और छतों पर पटाखे चलाते हैं, वह घातक हो सकता है।
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