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मुंबई नहीं, बुंदेलखंड की फिजा महकाएं

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Jhansi
Jhansi Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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झांसी। फिल्म निर्माता निर्देशक महेश भट्ट ने कहा कि ग्लोबल आंधी के इस दौर में बुंदेलखंड के लोग मुंबई की मायानगरी के रंग में न रंगें, बल्कि अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। यहां की अनोखी फिजाएं, ओरछा के महल व गंगा जमनी तहजीब को संजोकर रखना सबकी जिम्मेदारी है। फिल्मों की शूटिंग के लिए यहां अपार संभावनाएं हैं। वह राजकीय संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
शनिवार को मुंबई वापस जाने से पूर्व बुंदेली सिनेमा जगत व उर्दू हिंदी साहित्य संगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए महेश भट्ट ने कहा कि प्रवचन से देश नहीं चलता, बल्कि इसके लिए काम करना पड़ता है। यहां कई लोकेशन फिल्मों के हिसाब से बहुत अच्छी हैं। अगर एयरलाइंस की बेहतर सुविधा हो जाए, तो फिल्म शूटिंग के क्षेत्र में यहां काफी कुछ किया जा सकता है। ओरछा का महल समेत उन्होंने कई स्पॉट देखे हैं, जो शूटिंग के लिए बेहतर हैं। यहां की मिट्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इसलिए मुंबई आकर अपना वजूद खत्म करने की जरूरत नहीं है, बल्कि यहां की कला एवं संस्कृति को संभालें। उन्होंने यहां के जीवन संघर्ष और आगे बढ़ते युवाओं की कहानी को सेल्यूलाइड पर उतारने का आश्वासन दिया।
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इस मौके पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ ने कहा कि बुंदेलखंड के क्षेत्रीय सिनेमा को सपोर्ट करने की आवश्यकता है। अगर महेश भट्ट जैसे फिल्मकार आगे आ जाएं तो वह बुंदेलखंड में फिल्म सिटी निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सहयोग दिला सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बुंदेलखंड पैकेज से भी राशि दिलाई जा सकती है।
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अव्यवस्थाओं के बीच दस मिनट में निपटा कार्यक्रम
झांसी। बुंदेलखंड की बेरोजगारी पर आधारित ‘भूखा आसमान’ शीर्षक से आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम महज दस मिनट में सिमट गया। इसके लिए दस बजे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन फिल्मकार महेश भट्ट साढ़े ग्यारह बजे आए। उन्हें छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से वापस जाना था, इसलिए अव्यवस्थाओं के बीच महज दस मिनट में उन्होंने भाषण दिया और चले गए। यहां तक कि उनको भेंट किया गया स्मृतिचिह्न (वीरांगना की प्रतिमा) भी यहीं पर रह गया।
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