{"_id":"24-27081","slug":"Jhansi-27081-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीपरी पुल पर रोकी शताब्दी एक्सप्रेस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीपरी पुल पर रोकी शताब्दी एक्सप्रेस
Jhansi
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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झांसी। बुंदेलखंड प्रांत निर्माण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पुलिस, आरपीएफ व जीआरपी की सतर्कता को धता बताते हुए रेलवे स्टेशन के पहले सीपरी पुल पर शताब्दी एक्सप्रेस को रोक लिया। वह दस मिनट तक ट्रेन को रोके रहे। इस दौरान मौके पर पहुंची पुलिस व आरपीएफ से निर्माण मोर्चा के कार्यकर्ताओं की धक्का- मुक्की हुई। बाद में निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय समेत सात आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सभी को जमानत व निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा द्वारानई दिल्ली से भोपाल जाने वाली 12002 अप शताब्दी शताब्दी एक्सप्रेस को रोकने की घोषणा के मद्देनजर बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी व सिविल पुलिस ने तगड़ा इंतजाम किया था। ट्रेन आने के संकेत मिलते ही प्लेटफार्म को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सभी गेटों पर बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी गई। वर्दीधारी हर आने जाने वाले पर नजर जमाए हुए थे। ट्रेन होम सिगनल से पंद्रह से बीस किलोमीटर रफ्तार से प्लेटफार्म की तरफ बढ़ रही थी। तभी सीपरी बाजार पुल पर स्थित एफ केबिन पर पहले से छुपे आंदोलनकारी बाहर निकल आए। उन्हाेंने मोर्चा अध्यक्ष/ संस्थापक भानु सहाय के नेतृत्व में सीपरी पुल की तरफ बढ़ रही ट्रेन को राष्ट्रीय ध्वज दिखाकर रोकना शुरू कर दिया। पटरियों पर लोगों को खड़ा देख चालक ने किसी अनहोनी की आशंका को देख ब्रेक लगा दिए। गाड़ी का इंजन ठीक पुल के ऊपर 10.52 बजे आकर रुक गया। ट्रेन के रुकते ही आंदोलनकारी इंजन पर चढ़कर बुंदेलखंड राज्य के लिए नारेबाजी करने लगे। इधर, ट्रेन के रोकने की खबर स्टेशन पर खड़े सुरक्षा अधिकारियों को हुई तो उनके होश उड़ गए। आनन- फानन में पुलिस की गाड़ियां सीपरी पुल की तरफ दौड़ीं। यहां सुरक्षा कर्मियों के साथ पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट पी के श्रीवास्तव, पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर बबलू कुमार, सीओ रेलवे दिनेश सिंह, इंस्पेक्टर आरपीएफ एस के सिंह ने आंदोलनकारियों को खदेड़ना चाहा तो उनकी पुलिस से धक्का मुक्की हो गई।
बाद में मोर्चा अध्यक्ष समेत सात आंदोलनकारियों को पुलिस घसीटते हुए पुल से नीचे लाई और गाड़ी में बिठाकर सीपरी बाजार थाने ले गई। इसके बाद 11.02 मिनट पर ट्रेन प्लेटफार्म की तरफ बढ़ गई। इस घटनाक्रम को देख पुल के आसपास लोगाें की भारी भीड़ लग गई। इससे काफी देर तक पुल के नीचे जाम की स्थिति बनी रही।
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इधर, सीपरी बाजार थाने पहुंचने पर सीमा विवाद को लेकर मामला फंस गया। चूंकि, घटनाक्रम चलती ट्रेन को रोकने का था, इस कारण गेंद आरपीएफ के पाले में डाल दी गई। बाद में सभी आंदोलनकारियों को आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद आरपीएफ ने डिप्टी एस एस थामस पी जार्ज की तहरीर पर कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मण गंज निवासी भानु सहाय, टकसाल निवासी ललित पाराशर, प्रेमनगर क्षेत्र के महावीरनपुरा निवासी वरुण अग्रवाल, उल्दन व हाल शिवाजी नगर निवासी पंकज मिश्रा, कटेरा निवासी दीपक सिंह चौहान, विवेक जैन व बृजेश के खिलाफ (ट्रेन रोक कर रेल संचालन में बाधा डालने, रेल सीमा में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करने) धारा 174ए, 145,146,147 में मुकदमा दर्ज कर लिया। आरपीएफ ने चिकित्सकीय परीक्षण उपरांत आंदोलनकारियों को रेलवे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां दस- दस हजार की जमानत व दस- दस हजार के मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया गया।
जानबूझकर गाड़ी रोकने का शक, चालक के बयान दर्ज
झांसी। सुरक्षा कर्मियों ने शताब्दी एक्सप्रेस के चालक पर जानबूझकर गाड़ी को रोकने का शक जताया है। ट्रेन में सवार चालक के अलावा अन्य स्टाफ के बयान दर्ज किए गए।
बुधवार को झांसी की ओर आ रही शताब्दी एक्सप्रेस में चालक वी के पाराशर, जे पी वर्मा, गार्ड ए के जायसवाल व चीफ लोको इंस्पेक्टर नीरज तैनात थे। वी के पाराशर वर्किंग ड्राइवर के रूप में आगरा से झांसी गाड़ी लेकर आ रहा था। घटनाक्रम के उपरांत इन सभी कर्मचारियों के स्टेशन प्रबंधक कक्ष में लिखित बयान दर्ज किए गए। पुलिस अधिकारियों ने शक जताया कि चालक को पहले से मामले की जानकारी थी, इस कारण उसने जानबूझकर गाड़ी को धीमा कर मौके पर रोक दिया। जबकि चालक का कहना था कि होम सिगनल के बाद उन्हें स्पीड पंद्रह से बीस किलोमीटर प्रति घंटा करनी पड़ती है, क्योंकि यह ट्रेन प्लेटफार्म एक पर आती है। इस लाइन में कई प्वाइंट रास्ते में पड़ते हैं। अगर यही गाड़ी प्लेटफार्म दो या तीन पर आती तो स्पीड तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटा होती। अगर पटरी पर खड़ा होकर कोई ट्रेन रुकवाता है तो यही लगता है कि आगे कोई संकट है, इसीलिए गाड़ी को रोका गया।
आरपीएफ थाने में बना रहा गहमागहमी का माहौल
झांसी। आंदोलनकारियों के आरपीएफ थाने पहुंचने पर वहां शुभचिंतकों की भीड़ लगना शुरू हो गई। इस दौरान आंदोलनकारियों की जमानत कराने के लिए अधिवक्ता माथापच्ची में लगे रहे। भीड़ के कारण गहमागहमी का माहौल बना रहा।
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बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा द्वारानई दिल्ली से भोपाल जाने वाली 12002 अप शताब्दी शताब्दी एक्सप्रेस को रोकने की घोषणा के मद्देनजर बुधवार सुबह रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी व सिविल पुलिस ने तगड़ा इंतजाम किया था। ट्रेन आने के संकेत मिलते ही प्लेटफार्म को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सभी गेटों पर बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी गई। वर्दीधारी हर आने जाने वाले पर नजर जमाए हुए थे। ट्रेन होम सिगनल से पंद्रह से बीस किलोमीटर रफ्तार से प्लेटफार्म की तरफ बढ़ रही थी। तभी सीपरी बाजार पुल पर स्थित एफ केबिन पर पहले से छुपे आंदोलनकारी बाहर निकल आए। उन्हाेंने मोर्चा अध्यक्ष/ संस्थापक भानु सहाय के नेतृत्व में सीपरी पुल की तरफ बढ़ रही ट्रेन को राष्ट्रीय ध्वज दिखाकर रोकना शुरू कर दिया। पटरियों पर लोगों को खड़ा देख चालक ने किसी अनहोनी की आशंका को देख ब्रेक लगा दिए। गाड़ी का इंजन ठीक पुल के ऊपर 10.52 बजे आकर रुक गया। ट्रेन के रुकते ही आंदोलनकारी इंजन पर चढ़कर बुंदेलखंड राज्य के लिए नारेबाजी करने लगे। इधर, ट्रेन के रोकने की खबर स्टेशन पर खड़े सुरक्षा अधिकारियों को हुई तो उनके होश उड़ गए। आनन- फानन में पुलिस की गाड़ियां सीपरी पुल की तरफ दौड़ीं। यहां सुरक्षा कर्मियों के साथ पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट पी के श्रीवास्तव, पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर बबलू कुमार, सीओ रेलवे दिनेश सिंह, इंस्पेक्टर आरपीएफ एस के सिंह ने आंदोलनकारियों को खदेड़ना चाहा तो उनकी पुलिस से धक्का मुक्की हो गई।
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बाद में मोर्चा अध्यक्ष समेत सात आंदोलनकारियों को पुलिस घसीटते हुए पुल से नीचे लाई और गाड़ी में बिठाकर सीपरी बाजार थाने ले गई। इसके बाद 11.02 मिनट पर ट्रेन प्लेटफार्म की तरफ बढ़ गई। इस घटनाक्रम को देख पुल के आसपास लोगाें की भारी भीड़ लग गई। इससे काफी देर तक पुल के नीचे जाम की स्थिति बनी रही।
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इधर, सीपरी बाजार थाने पहुंचने पर सीमा विवाद को लेकर मामला फंस गया। चूंकि, घटनाक्रम चलती ट्रेन को रोकने का था, इस कारण गेंद आरपीएफ के पाले में डाल दी गई। बाद में सभी आंदोलनकारियों को आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद आरपीएफ ने डिप्टी एस एस थामस पी जार्ज की तहरीर पर कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मण गंज निवासी भानु सहाय, टकसाल निवासी ललित पाराशर, प्रेमनगर क्षेत्र के महावीरनपुरा निवासी वरुण अग्रवाल, उल्दन व हाल शिवाजी नगर निवासी पंकज मिश्रा, कटेरा निवासी दीपक सिंह चौहान, विवेक जैन व बृजेश के खिलाफ (ट्रेन रोक कर रेल संचालन में बाधा डालने, रेल सीमा में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करने) धारा 174ए, 145,146,147 में मुकदमा दर्ज कर लिया। आरपीएफ ने चिकित्सकीय परीक्षण उपरांत आंदोलनकारियों को रेलवे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां दस- दस हजार की जमानत व दस- दस हजार के मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया गया।
जानबूझकर गाड़ी रोकने का शक, चालक के बयान दर्ज
झांसी। सुरक्षा कर्मियों ने शताब्दी एक्सप्रेस के चालक पर जानबूझकर गाड़ी को रोकने का शक जताया है। ट्रेन में सवार चालक के अलावा अन्य स्टाफ के बयान दर्ज किए गए।
बुधवार को झांसी की ओर आ रही शताब्दी एक्सप्रेस में चालक वी के पाराशर, जे पी वर्मा, गार्ड ए के जायसवाल व चीफ लोको इंस्पेक्टर नीरज तैनात थे। वी के पाराशर वर्किंग ड्राइवर के रूप में आगरा से झांसी गाड़ी लेकर आ रहा था। घटनाक्रम के उपरांत इन सभी कर्मचारियों के स्टेशन प्रबंधक कक्ष में लिखित बयान दर्ज किए गए। पुलिस अधिकारियों ने शक जताया कि चालक को पहले से मामले की जानकारी थी, इस कारण उसने जानबूझकर गाड़ी को धीमा कर मौके पर रोक दिया। जबकि चालक का कहना था कि होम सिगनल के बाद उन्हें स्पीड पंद्रह से बीस किलोमीटर प्रति घंटा करनी पड़ती है, क्योंकि यह ट्रेन प्लेटफार्म एक पर आती है। इस लाइन में कई प्वाइंट रास्ते में पड़ते हैं। अगर यही गाड़ी प्लेटफार्म दो या तीन पर आती तो स्पीड तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटा होती। अगर पटरी पर खड़ा होकर कोई ट्रेन रुकवाता है तो यही लगता है कि आगे कोई संकट है, इसीलिए गाड़ी को रोका गया।
आरपीएफ थाने में बना रहा गहमागहमी का माहौल
झांसी। आंदोलनकारियों के आरपीएफ थाने पहुंचने पर वहां शुभचिंतकों की भीड़ लगना शुरू हो गई। इस दौरान आंदोलनकारियों की जमानत कराने के लिए अधिवक्ता माथापच्ची में लगे रहे। भीड़ के कारण गहमागहमी का माहौल बना रहा।