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फोटो, रेलवे स्टेशन पर जानवरों की भरमार,,-City
Updated Wed, 22 Aug 2018 03:08 AM IST
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जानवरों ने बनाया रेलवे स्टेशन को आसरा
- रात और दिन प्लेटफार्म पर घूमते रहते हैं कुत्ते और सांड
- दहशत में रहते हैं यात्री, किसी भी दिन हो सकता हादसा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भले ही रेलवे बोर्ड में अवैध वेंडिंग रोकने और यात्री सुविधाएं बढ़ाने को दिए गए सुझाव के मद्देनजर झांसी के अफसरों के दिमाग की चर्चा हो रही हो लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी अपने ही रेलवे स्टेशन पर आवारा जानवरों का प्रवेश रोकने में लाचार हैं। इन दिनों बारिश के कारण सूखी जमीन तलाशने के लिए कुत्ते और सांड जैसे जानवरों ने स्टेशन को आसरा बना लिया है। दिन-रात यह जानवर स्टेशन की पटरियों और प्लेटफार्म पर घूमते रहते हैं। जानवरों के विचरण से यात्री भयभीत रहते हैं।
रेलवे स्टेशन पर सांड, कुत्ता, गाय ने अपना आशियाना बना रखा है। निगरानी न होने के कारण आवारा जानवर सीपरी बाजार, पुलिया नंबर नौ, रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय द्वार और अन्य खुले रास्तों से प्लेटफार्म तक पहुंच जाते हैं। प्लेटफार्म और पटरियों पर कुत्तों का आपस में लड़ना और सांडों का यात्रियों के बीच घूमना आम है। खाने की खुशबू आते ही वह यात्रियों के बैग या अन्य सामान से खानपान का सामान निकालने का प्रयास करते हैं। दिन में तो कभी-कभार कर्मचारी जानवरों को भगाते नजर आ जाएंगे मगर, रात में बुरा हाल हो जाता है। प्लेटफार्म पर सो रहे यात्रियों के बीच से जानवर निकलते हैं। जानवर के थोड़े से ही बेकाबू होने पर किसी भी यात्री की जान जोखिम में आ सकती है। इस संबंध में स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन ने बताया कि प्लेटफार्म और पटरियों पर जानवर को रोकने का प्रयास हो रहा है।
रेलवे स्टेशन पर दोपहर 1.30 बजे का वक्त है। प्लेटफार्म दो पर निजामुद्दीन कन्याकुमारी एक्सप्रेस और प्लेटफार्म तीन पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस खड़ी है। प्लेटफार्म पर यात्रियों की भीड़ और शोरगुल का माहौल है। प्लेटफार्म पर दो सांड घूम रहे हैं। नजदीक आते ही हर यात्री उनसे बचने की कोशिश करता है। जरा सी चूक पर सांड हमलावर कर सकते हैं।
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रेलवे स्टेशन पर दोपहर 1.45 बजे का समय है। पैसेंजर हाल के एक कोने में दो, ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन के पास तीन और यात्री भोजनालय के पास दो कुत्ते बैठे हैं। यात्री उनसे बचकर निकल रहे हैं। इस बीच यात्री भोजनालय के पास बैठे दो कुत्तों ने लड़ना भी शुरू कर दिया। यह देख आसपास बैठे यात्री घबरा गए और वहां से दूर हटने में ही भलाई समझी।
यह है कारण
----------
- सीपरी बाजार और पुलिया नंबर नौ की तरफ से स्टेशन आने का आसान रास्ता।
- रेलवे पार्सल गेट का हर समय खुला रहना।
- प्लेटफार्मों पर रखे डस्टबिन और पटरियों पर डला रहने वाला खाने-पीने का सामान।
- स्टेशन पर तैनात संबंधित कर्मचारियों की अनदेखी।
- प्लेटफार्मों के अंतिम छोर पर लगे गेटों का खुला रहना।
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- रात और दिन प्लेटफार्म पर घूमते रहते हैं कुत्ते और सांड
- दहशत में रहते हैं यात्री, किसी भी दिन हो सकता हादसा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भले ही रेलवे बोर्ड में अवैध वेंडिंग रोकने और यात्री सुविधाएं बढ़ाने को दिए गए सुझाव के मद्देनजर झांसी के अफसरों के दिमाग की चर्चा हो रही हो लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी अपने ही रेलवे स्टेशन पर आवारा जानवरों का प्रवेश रोकने में लाचार हैं। इन दिनों बारिश के कारण सूखी जमीन तलाशने के लिए कुत्ते और सांड जैसे जानवरों ने स्टेशन को आसरा बना लिया है। दिन-रात यह जानवर स्टेशन की पटरियों और प्लेटफार्म पर घूमते रहते हैं। जानवरों के विचरण से यात्री भयभीत रहते हैं।
रेलवे स्टेशन पर सांड, कुत्ता, गाय ने अपना आशियाना बना रखा है। निगरानी न होने के कारण आवारा जानवर सीपरी बाजार, पुलिया नंबर नौ, रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय द्वार और अन्य खुले रास्तों से प्लेटफार्म तक पहुंच जाते हैं। प्लेटफार्म और पटरियों पर कुत्तों का आपस में लड़ना और सांडों का यात्रियों के बीच घूमना आम है। खाने की खुशबू आते ही वह यात्रियों के बैग या अन्य सामान से खानपान का सामान निकालने का प्रयास करते हैं। दिन में तो कभी-कभार कर्मचारी जानवरों को भगाते नजर आ जाएंगे मगर, रात में बुरा हाल हो जाता है। प्लेटफार्म पर सो रहे यात्रियों के बीच से जानवर निकलते हैं। जानवर के थोड़े से ही बेकाबू होने पर किसी भी यात्री की जान जोखिम में आ सकती है। इस संबंध में स्टेशन डायरेक्टर गिरीश कंचन ने बताया कि प्लेटफार्म और पटरियों पर जानवर को रोकने का प्रयास हो रहा है।
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रेलवे स्टेशन पर दोपहर 1.30 बजे का वक्त है। प्लेटफार्म दो पर निजामुद्दीन कन्याकुमारी एक्सप्रेस और प्लेटफार्म तीन पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस खड़ी है। प्लेटफार्म पर यात्रियों की भीड़ और शोरगुल का माहौल है। प्लेटफार्म पर दो सांड घूम रहे हैं। नजदीक आते ही हर यात्री उनसे बचने की कोशिश करता है। जरा सी चूक पर सांड हमलावर कर सकते हैं।
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रेलवे स्टेशन पर दोपहर 1.45 बजे का समय है। पैसेंजर हाल के एक कोने में दो, ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन के पास तीन और यात्री भोजनालय के पास दो कुत्ते बैठे हैं। यात्री उनसे बचकर निकल रहे हैं। इस बीच यात्री भोजनालय के पास बैठे दो कुत्तों ने लड़ना भी शुरू कर दिया। यह देख आसपास बैठे यात्री घबरा गए और वहां से दूर हटने में ही भलाई समझी।
यह है कारण
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- सीपरी बाजार और पुलिया नंबर नौ की तरफ से स्टेशन आने का आसान रास्ता।
- रेलवे पार्सल गेट का हर समय खुला रहना।
- प्लेटफार्मों पर रखे डस्टबिन और पटरियों पर डला रहने वाला खाने-पीने का सामान।
- स्टेशन पर तैनात संबंधित कर्मचारियों की अनदेखी।
- प्लेटफार्मों के अंतिम छोर पर लगे गेटों का खुला रहना।