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बुंदेलखंड के पशु पालकों पर बड़ा संकट पचास फीसदी घट गई है दूध की मांग

Wed, 15 Apr 2020 12:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2020 12:21 AM IST
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50 percent demand is less in milk, animal owner on big crises
50 percent demand is less in milk, animal owner on big crises
झांसी। इक्कीस दिन के लॉकडाउन में दूध की मांग 50 फीसदी घट गई है। होटल, रोस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों पर सर्वाधिक खपत होती थी लेकिन अब इन सब पर ताले पड़े हुए हैं। महानगर में बड़े डेयरी वाले जिनके पास 50 से 200 तक दुधारू पशु हैं वह तो इस समय चारे की व्यवस्था तक नहीं कर पा रहे। कई जगह तो दूध से ही पशुओं को सानी तक कर दी जा रही है। हालांकि जिनके पास नियमित वाले ग्राहक हैं उनके सामने तो उस तरह से दिक्कत नहीं है लेकिन जहां से भारी मात्रा में दूध दुकानों पर जाता था वह बड़ा घाटा झेल रहे हैं।
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अगर बुंदेलखंड क्षेत्र की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका चलाने के लिए दूध एक बड़ा जरिया है। बड़ी संख्या में लोग दूध बिक्री का काम करते हैं। शहरों में भी लोगों ने बड़ी डेयरियां खोल रखी हैं। किसी के पास 100 भैंस हैं तो किसी के पास इससे भी अधिक। लहरगिर्द निवासी सुंदर सिंह दास जो दुग्ध संघ के जिलाध्यक्ष हैं उनके पास भी 100 भैंस की डेयरी है। 4 कुंतल दूध रोज की बिक्री है। सुंदर सिंह का कहना है कि होटल और हलवाई के यहां अधिकांश दूध जाता था लेकिन अब दुकानें बंद हैं। डेयरी पर दूध दे रहे हैं लेकिन वह 30 रुपये लीटर तक ही ले रही है। जबकि दूध का रेट पहले 56 रुपये लीटर तक था। डेयरी संचालक राजेश यादव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों के सामने दिक्कत है। उनका दूध बिक्री के लिए जा ही नहीं रहा है। डेयरिया मुहल्ला निवासी रोशन सिंह जो 300 भैंस की डेयरी चलाते हैं वह दूध की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि दुकानों पर सर्वाधिक बिक्री थी। 9 कुंतल दूध रोज होता है। मजबूरी में दूध से ही भैंस को सानी करनी पड़ रही है।
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शहरों में पैकेट बंद दूध की मांग अचानक बढ़ी
झांसी। महानगर में पैकेट बंद दूध की मांग बढ़ गई है। अगर पराग के जनरल मैनेजर एसएन शुक्ला की मानें तो पराग पहले महानगर में 8 हजार लीटर दूध की सप्लाई करता था लेकिन मौजूदा समय में 13 हजार लीटर दूध दिया जा रहा है। दूध की मांग लगातार बढ़ रही है। अब जो दूसरे चरण का लॉकडाउन बढ़ा है उससे मांग और बढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है। पराग के मैनेजर का कहना है कि अगर पूरे प्रदेश की बात करें तो प्रदेश में तीन से चार लाख लीटर दूध की मांग बढ़ गई है।
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चोकर और खली के दाम बढ़े
झांसी। चोकर और खली के दाम बढ़ गए हैं। 1100 रुपये में मिलने वाला चोकर 1300 रुपये का हो गया है। अब किसान पशु पालकों को खिलाएं भी तो क्या। दूध की बिक्री वैसे ही घट गई है। किसानों का कहना है कि भूसा भी अभी घरों तक नहीं आया है ऐसे में भूसे के दाम भी बढ़े हुए हैं। गेहूं के सीजन में भूसे के रेट कम हो जाते हैं लेकिन अभी तक 450 रुपये तक भूसा बिक रहा है। किसानों का कहना है कि दूध की बिक्री होती रहती थी तब तो कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो दूध भी शहर जाना बंद हो गया है। विपिन कुमार का कहना है कि भूसा, खल और चोकर का भंडारण किया जा रहा है इससे भी रेट बढ़ रहे हैं।

बड़े पैमाने पर घरों में तैयार हो रहा घी
झांसी। भले ही सरकार ने लॉकडाउन के दौरान व्यवस्था की है कि दूध लेकर आने वाले लोगों को नहीं रोका जाएगा लेकिन फिर भी शहर की कई कालोनियां ऐसी हैं जहां दूध विक्रेताओं को नहीं जाने दिया जा रहा है। जबकि तमाम लोग गांव से दूध लेकर शहरों में आ ही नहीं रहे हैं। ऐसे में पशु पालकों ने घरों पर दूध का घी बनाना शुरू कर दिया है। ललितपुर के शंकर सिंह, तालबेहट के रूप सिंह, मढ़ावरा के जानकी प्रसाद, मोंठ से सुल्तान सिंह, बंगरा के दुष्यंत, टोड़ीफतेहपुर के श्याम सिंह का कहना है कि शहरों में भी दूध के सही रेट नहीं मिल पा रहे हैं लिहाजा घरों पर घी बना रहे हैं। जब लॉकडाउन खत्म हो जाएगा तो बाजार में घी की बिक्री कर सकेंगे।
पशुपालकों की संख्या
झांसी मंडल में पशुपालकों की संख्या-4 लाख
चित्रकूट मंडल में पशुपालक- 3 लाख
कुछ जरूरी आंकड़े बुंदेलखंड के दो मंडलों के
झांसी मंडल ( ललितपुर, जालौन और झांसी) में दुधारू पशु-16 लाख 39 हजार 751
चित्रकूट मंडल ( बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा) में दुधारू पशु- 15 लाख 93 हजार 774
(पशु गणना 2019 के आंकड़े)

50 percent demand is less in milk, animal owner on big crises

50 percent demand is less in milk, animal owner on big crises

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