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Jhansi News: रानी की धरती पर 42 हजार बेटियां बनेंगी ‘आत्मनिर्भर’

Tue, 11 Aug 2026 02:52 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Tue, 11 Aug 2026 02:52 AM IST
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42,000 daughters will become self-reliant on the land of the queen.
573 परिषदीय स्कूलों में बनेंगे सेल्फ डिफेंस क्लब, संकट में बचाव से लेकर मॉक ड्रिल तक सीखेंगी छात्राएं
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई की धरती पर अब हजारों बेटियां उनके शौर्य की कहानी पढ़ने के साथ आत्मरक्षा का हुनर भी सीखेंगी। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाली 42,527 छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 573 स्कूलों में सेल्फ डिफेंस क्लब बनाए जाएंगे। प्रशिक्षण में छात्राओं को जूडो-कराटे, ताइक्वांडो और आत्मरक्षा की तकनीकों के साथ संकट के समय खुद को सुरक्षित रखने और तुरंत निर्णय लेने का अभ्यास कराया जाएगा।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत शुरू किए जा रहे ‘रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान’ में जिले के 257 उच्च प्राथमिक, 307 कंपोजिट और नौ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय शामिल हैं। इन सभी 573 विद्यालयों में सेल्फ डिफेंस क्लब गठित किए जाएंगे। प्रत्येक क्लब में 10 छात्राओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। ये छात्राएं आगे विद्यालय की अन्य छात्राओं को भी आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करेंगी।
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लड़ने से ज्यादा बचकर निकलना सिखाया जाएगा
आत्मरक्षा प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को किसी से मुकाबला करने के लिए तैयार करना भर नहीं है। उन्हें यह सिखाया जाएगा कि संकट की स्थिति में घबराने के बजाय खतरे को पहचानकर खुद को सुरक्षित कैसे निकाला जाए। प्रशिक्षण में वार्मअप, ब्लॉक तकनीक, बचाव के तरीके और मॉक ड्रिल के जरिए व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।
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छात्राओं को आपात स्थिति में शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर बचाव के लिए प्रतिक्रिया देने, हमलावर से दूरी बनाने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के तरीके भी बताए जाएंगे। इसके साथ महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ आपातकालीन हेल्पलाइन का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाएगा।

हर स्कूल में तैयार होगा बेटियों का सुरक्षा क्लब
573 विद्यालयों में बनाए जाने वाले सेल्फ डिफेंस क्लब इस अभियान की खास कड़ी होंगे। प्रत्येक स्कूल से 10 छात्राओं को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाएगा। ये छात्राएं नियमित अभ्यास करेंगी और अपने स्कूल की दूसरी छात्राओं को भी आत्मरक्षा की बुनियादी तकनीकों से परिचित कराएंगी। इससे प्रशिक्षण का दायरा केवल चयनित छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा।
अभियान के पाठ्यक्रम में जेंडर सशक्तीकरण और आत्मरक्षा किट तैयार करना भी शामिल है। छात्राओं को शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उनमें आत्मविश्वास, सजगता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर रहेगा। संवाद

गांव की बेटियों को स्कूल में ही मिलेगा प्रशिक्षण
अभियान का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को मिलेगा। स्कूल में ही प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होने से अभिभावकों को अलग से प्रशिक्षण केंद्रों तक बेटियों को भेजने की जरूरत नहीं होगी। नियमित अभ्यास से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद है। विद्यालयों में प्रशिक्षण अनुदेशकों, व्यायाम शिक्षकों और शिक्षिकाओं के माध्यम से कराया जाएगा। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में खेल शिक्षक प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण से जोड़ना महत्वपूर्ण पहल है। हमारा उद्देश्य बेटियों को शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उनमें आत्मविश्वास, जागरूकता और सुरक्षा की भावना विकसित करना है। रानी लक्ष्मीबाई की धरती पर हमारी बेटियां निडर बनें और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें।
- जितेंद्र कुमार गोंड, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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