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लॉकडाउन के 55 दिनों में 42 ने खत्म कर ली जिंदगी

Mon, 18 May 2020 11:30 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 11:30 PM IST
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42 people sucide in during lockdown
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo
झांसी। लॉकडाउन के दौरान आत्महत्या के मामले बढ़ गए हैं। 55 दिन के लॉकडाउन में क्षेत्र में 27 लोग सुसाइड कर चुके हैं। ललितपुर में भी इस दौरान 15 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। सामान्य दिनों में एक महीने में औसतन तीन-चार लोग ऐसा करते हैं। सोमवार को भी दो लोगों ने अपनी जीवनलीला खत्म कर ली। मनोचिकित्सकों के अनुसार कोरोना काल में चारों तरफ निराशा, आर्थिक अनिश्चितता, टीवी पर मरीजों और मौत के बढ़ते आंकड़े, बढ़ती बेरोजगारी का माहौल है। लोग इन सब बातों के बारे में ही सोचते रहते हैं। वे चिड़चिड़े हो रहे हैं। पारिवारकि या सामान्य से कारणों पर भी आत्महत्या कर ले रहे हैं। अवसाद और आवेग में कई बार वे परिजनों तक की हत्या कर दे रहे हैं। जबकि यह कोरोना जनित समस्या कुछ लोगों की नहीं पूरे विश्व की है। इसलिए यह वक्त सकारात्मक सोच रखने और अपनी रुचि के काम करने का है। हालात बदलेंगे धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर आएगा।
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विचलित करने वाले मामले
- महानगर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में रहने वाले दो युवकों ने फांसी लगाकर जान दे दी। दोनों ही मामलों में घटना का कारण पता नहीं चल सका। थाना सदर बाजार के मोहल्ला भगवंतपुरा निवासी अरविंद अकेले रहते थे। सोमवार को अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगा ली। पड़ोसी फंदे पर लटका देख घबरा गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे मेें लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इधर, थाना नवाबाद के महाराणा प्रताप नगर निवासी महेंद्र ने भी अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लिया।
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- रविवार (16 मई) को भी बड़ागांव के एक पूर्व सभासद और एक अन्य व्यक्ति ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
- 15 मई को टहरौली में एक मजदूर ने इसलिए आत्महत्या कर ली कि उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए कोई शामिल होने नहीं आया।
- चार मई को संविदा कर्मी दीपक रायकवार ने दीनदयाल सभागार में नौकरी जाने पर फांसी लगाई।
- 24 अप्रैल को शिवाजी नगर में प्रशांत गंगवार ने लॉकडाउन से परेशान होकर फांसी लगाई थी।
लोगों को समझना होगा कि तनाव लेने से कुछ सुधरने वाला नहीं है। कोरोना के कारण कारोबार ठप होना, आर्थिक तंगी, बेरोजगारी ये पूरे विश्व की समस्या है। आत्महत्या इसका समाधान नहीं हो सकता। रात के बाद सवेरा होता है। नए अवसर निकलेंगे वक्त के साथ हालात सुधरेंगे। कुछ हद तक चिंता स्वाभाविक है। इसे अपनी जीवन शैली में सकारात्मक रहकर जीतना होगा। लोगों को चाहिए कि वे घर में रहकर पसंद के काम करें। हंसें, गाएं, डांस करें, पेंटिंग करें, गार्डनिंग, पूजा-पाठ, ध्यान, मूवी देखना जो भी अच्छा लगता है वो करें। ऐसा करने पर उनके नकारात्मक विचार एक दम बदल जाएंगे।
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- डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मनोचिकित्सक।
लॉकडाउन में काम-धंधे बंद होने से लोगों के सामने वित्तीय संकट आया गया है। भविष्य को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ी है। इससे तनाव भी बढ़ा है। वहीं, कई पुराने मानसिक रोगियों में बीमारी और बढ़ गई है, क्योंकि कई मरीज बाहर इलाज कराने के लिए जाते हैं और दवाएं उन्हें हर जगह नहीं मिल पाती हैं। घर पर ज्यादा समय बिताने से घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े हैं। यही सब कारण से कई लोग आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। मगर यह समय धैर्य बनाए रखने का है। लोगों से अपील है कि वह आपसी सामंजस्य बनाकर चलें। जल्द ही स्थिति ठीक हो जाएगी।
- डॉ. अमन किशोर, मनोचिकित्सक।
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