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Jhansi News: जिले के 40 हजार किसानों पर बैंकों का 563 करोड़ रुपये बकाया बाकियों पर 162 करोड़

Thu, 12 Dec 2024 01:18 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2024 01:18 PM IST
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40 thousand farmers of the district owe Rs 563 crore to banks and Rs 162 crore to the rest.

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झांसी। जिले में बैंकों के सवा सात अरब रुपये के कर्ज पर जिले के 54 हजार लोग कुंडली मारे बैठे हैं। वसूली के तमाम प्रयासों के बाद भी बैंकों को यह रकम वापस नहीं मिल पा रही है। इससे इसे बट्टे खाते (एनपीए) में डाल दिया गया है।



जिले में बैंकों पर एनपीए का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में बैंकों का एनपीए 650.57 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 725.38 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। बैंकों की यह रकम जिले के 54,156 लोगों के पास फंसी हुई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा किसानों का है। 39,345 किसानों पर 563 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें से ज्यादातर किसानों ने यह कर्ज किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से लिया था लेकिन अदायगी न कर पाने की वजह से इस राशि को एनपीए में डाल दिया गया है। बता दें कि बैंकों द्वारा व्यावसायिक और कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए कारोबारियों और किसानों को कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा गृह ऋण, शिक्षा ऋण, वाहन ऋण आदि भी दिया जाता है। हालांकि, कृषि ऋण को छोड़कर बाकी सभी रकम की वापसी के लिए बैंकों की ओर से कर्जदार के साथ-साथ गारंटर पर भी दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा, संपत्ति को नीलाम करके भी बैंक अपने कर्ज की भरपाई कर लेते हैं लेकिन, कृषि ऋण की वापसी के लिए बैंक कड़ा रुख नहीं अपना पाते हैं।
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दिए गए ऋण की वसूली के लिए बैंकों की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। किसानों के लिए समय-समय पर एकमुश्त समाधान योजना भी संचालित की जाती है। - अजय कुमार शर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक
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सिविल स्कोर हो जाता है खराब

बैंकों से लिए गए ऋण की अदायगी न करने का खामियाजा लोगों को लंबे समय तक उठाना पड़ता है। उनकी सिविल स्कोर खराब हो जाती है, जिससे उन्हें जरूरत पड़ने पर आगे किसी भी बैंक से कर्ज नहीं मिल पाता है। ऐसे में तमाम लोग सालों बाद अपनी सिविल स्कोर सुधारने के लिए भारी-भरकम ब्याज के साथ अपने कर्ज की अदायगी करते हैं।
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