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सिविक एमीनिटरीज: घुमंतु जातियां -City
Updated Mon, 11 Sep 2017 08:23 PM IST
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घुमंतू जातियों को मुख्य धारा से जोड़ेगी सरकार: इदाते
सब हेड: राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतु तथा अर्धघुमंतू जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने दी जानकारी
क्रासर
कबूतरा, शिल्पकार, बाघरी, लोहपीटा, नट और आदिवासी गौड़ समाज का सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतु तथा अर्धघुमंतू जनजाति आयोग के अध्यक्ष भिकू रामजी इदाते ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद जिक्र किया हैं पूरे देश में पंद्रह करोड़ घुमंतु और अर्धघुमंतू जनजाति के लोग निवास करते हैं, जो समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में वंचित हैं। आयोग ने हाल में ही इन जातियों के सामाजिक जीवन को लेकर एक डेढ़ सौ पेज की एक रिपोर्ट पीएम मोदी को सौंपी हैं। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही रिपोर्ट के आधार पर काम शुरू करेगी। सोमवार को उन्होंने यह बात भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान आडीटोरियम में आयोजित भातु समाज सम्मेलन में कही। सम्मेलन में कबूतरा, शिल्पकार, बाघरी, लोहपीटा, नट और आदिवासी गौड़ समाज के लोग मौजूद थे।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की प्रेरणा से किसान समृद्धि हेतु विश्व बंधुत्व दिवस के अवसर पर सेवा समर्पण समिति और भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान आडीटोरियम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उक्त सम्मेलन में मुख्य अतिथि इदाते ने कहा कि बुंदेलखंड में 1841 से घुमंतु जातियां संघर्ष कर रही हैं। अंग्रेजों के साथ लड़ाई में झांसी रानी के साथ लड़ने वालीं अवंतिका और झलकारी बाई भी इसी वर्ग से थी। आज तक किसी भी सरकार ने घुमंतु जातियों की सुध नहीं लीं। मगर, पीएम मोदी ने सरकार बनते ही घुमंतु जातियों के लिए आयोग का गठन किया। उनका लक्ष्य इस वर्ग की सभी जातियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना हैं, ताकि सभी योजनाओं का उनको बराबरी से लाभ मिल सके।
विशिष्ट अतिथि बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि मगर, घुमंतु जाति के लोग अपने बच्चों को शिक्षित जरूर करें, क्योंकि शिक्षा से आगे के सभी रास्ते खुलते हैं। भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान के डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने चारा तकनीकी और पशुपालन पर जानकारी दी। विधायक राजीव सिंह ने कहा कि घुमंतु जातियों के जो समाज से हटकर काम हैं, उनके पहले विकल्प तैयार होंगे। तभी उनको बंद किया जाएगा। निदेशक डॉ. वीआर कुमार ने कहा कि कृषि और पशुपालन के बिना कोई भी जाति आगे नहीं बढ़ सकती हैं। भाजपा के महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री भी घुमंतु जातियों के जीवन को लेकर चिंतित हैं। पूर्व विधायक शिव पूजन ने घुमंतु जातियों के संघर्ष के बारे में बताया। संचालन रेखा गुजराती और बैजंती पांडे ने किया। आभार आचार्य राजकुमार ने व्यक्त किया।
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इन्होंने भी रखी अपनी बात
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- कबूतरा समाज के वीरसिंह ने कहा कि हमारे बच्चों को न तो शिक्षा मिल पा रही और न हमारी सामाजिक कदर हैं। ऐसे में मुख्य धारा से हम कैसे जुड़े पांएगे?
- लौघडिया समाज के शेरा सिंह ने कहा कि हमारा जीवन बैलगाड़ी पर शुरू होता है और बैलगाड़ी पर ही खत्म हो जाता है। अभी तक किसी भी सरकार ने उनके बारे में नहीं सोचा।
- आदिवासी गौड़ समाज के शंकर ने कहा कि मैंने बड़ी मुश्किलों से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। नौकरी की तलाश की तो जाति पूछी जाने लगी। जाति बताई तो प्रमाण मांगा जाने लगा। अभी तक उनकी समाज पहचान नहीं बन सकी हैं।
- शिल्पकार समाज के अमर ने कहा कि हम लोग बेहद कठिन काम करते हैं। मगर, अभी तक उनकी कोई जाति ही नहीं बनी है। न कोई सरकारी लाभ मिलता है।
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फोटो
रहने को मिले स्थायी जगह
मेरा परिवार इधर से उधर घूमते हुए परेशान हो गया है। कोई स्थायी रहने ही नहीं देता है। बिना सरकारी सुविधाओं के अब तो दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। हमें रहने के लिए स्थायी जगह मिल जाए तो परिवार तो सुरक्षित बना रहेगा। बच्चों को भी पढ़ा लेंगे।
कल्लौ, लोहपीटा पारीछा।
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धंधा हो गया चौपट
लोग अब चाइना का सामान ज्यादा पसंद करने लगे हैं। हर चीज बाजार में पैसे की मिल रही हैं। मेरे पास लोग अब भूले-भटके ही हंसिया, खुरपी बनवाने और लोहे के सामान पर धार कराने आते हैं। परिवार का खर्चा बड़ी मुश्किलों से चलता है। पैसे न होने के कारण शादियां तक नहीं कर पा रहे हैं।
मालती, लोहपीटा पारीछा।
फोटो
एसटी का दर्जा मिले
बुंदेलखंड में मेरी जाति की जनसंख्या करीब पचास हजार हैं। बावजूद इसके मेरी जाति का एक ही व्यक्ति अभी तक सरकारी नौकरी में पहुुंच सका। वह भी बैंक में चपरासी है। मेरी जाति अनुसूचित जाति में शामिल हैं। सुविधाओं के अभाव में वे शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं। अगर, उनको अनुसूचित जाति की जगह जनजाति में शामिल कर दिया जाए तो वे भी समाज की मुख्य धारा से जल्द जुड़ सकेंगे।
रूपेश, कंजड़ जाति, गांव दातानगर।
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दस साल से जाने लगे बाजार
मैंने और मेरी जाति के लोगों ने दस साल पहले तक बाजार तक नहीं देखा था। पेट पालने के लिए लूटपाट, शिकार, भीख मांगते थे। समय के हिसाब से वे भी बदलना चाहते हैं। शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था हो जाए, तो वे भी आगे बढ़ सके।
मंगल सिंह, कंजड़ जाति, गांव परवई।
फोटो
कोई नहीं चाहता गलत काम करना
मैं मजदूरी कर घर चला रहा हूं। गलत काम करना कोई नहीं चाहता। मगर, इसके बाद भी समाज उनको गलत नजर से ही देखता है। अगर वे भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ जाए तो वे भी सम्मान का जीवन जी सकेंगे।
उमेश, कबूतरा जाति, गांव पाड़री।
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घुमंतू जातियों को मुख्य धारा से जोड़ेगी सरकार: इदाते
सब हेड: राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतु तथा अर्धघुमंतू जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने दी जानकारी
क्रासर
कबूतरा, शिल्पकार, बाघरी, लोहपीटा, नट और आदिवासी गौड़ समाज का सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
राष्ट्रीय विमुक्त घुमंतु तथा अर्धघुमंतू जनजाति आयोग के अध्यक्ष भिकू रामजी इदाते ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद जिक्र किया हैं पूरे देश में पंद्रह करोड़ घुमंतु और अर्धघुमंतू जनजाति के लोग निवास करते हैं, जो समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में वंचित हैं। आयोग ने हाल में ही इन जातियों के सामाजिक जीवन को लेकर एक डेढ़ सौ पेज की एक रिपोर्ट पीएम मोदी को सौंपी हैं। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही रिपोर्ट के आधार पर काम शुरू करेगी। सोमवार को उन्होंने यह बात भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान आडीटोरियम में आयोजित भातु समाज सम्मेलन में कही। सम्मेलन में कबूतरा, शिल्पकार, बाघरी, लोहपीटा, नट और आदिवासी गौड़ समाज के लोग मौजूद थे।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की प्रेरणा से किसान समृद्धि हेतु विश्व बंधुत्व दिवस के अवसर पर सेवा समर्पण समिति और भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान आडीटोरियम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उक्त सम्मेलन में मुख्य अतिथि इदाते ने कहा कि बुंदेलखंड में 1841 से घुमंतु जातियां संघर्ष कर रही हैं। अंग्रेजों के साथ लड़ाई में झांसी रानी के साथ लड़ने वालीं अवंतिका और झलकारी बाई भी इसी वर्ग से थी। आज तक किसी भी सरकार ने घुमंतु जातियों की सुध नहीं लीं। मगर, पीएम मोदी ने सरकार बनते ही घुमंतु जातियों के लिए आयोग का गठन किया। उनका लक्ष्य इस वर्ग की सभी जातियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना हैं, ताकि सभी योजनाओं का उनको बराबरी से लाभ मिल सके।
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विशिष्ट अतिथि बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि मगर, घुमंतु जाति के लोग अपने बच्चों को शिक्षित जरूर करें, क्योंकि शिक्षा से आगे के सभी रास्ते खुलते हैं। भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान के डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने चारा तकनीकी और पशुपालन पर जानकारी दी। विधायक राजीव सिंह ने कहा कि घुमंतु जातियों के जो समाज से हटकर काम हैं, उनके पहले विकल्प तैयार होंगे। तभी उनको बंद किया जाएगा। निदेशक डॉ. वीआर कुमार ने कहा कि कृषि और पशुपालन के बिना कोई भी जाति आगे नहीं बढ़ सकती हैं। भाजपा के महानगर अध्यक्ष प्रदीप सरावगी ने कहा कि मुख्यमंत्री भी घुमंतु जातियों के जीवन को लेकर चिंतित हैं। पूर्व विधायक शिव पूजन ने घुमंतु जातियों के संघर्ष के बारे में बताया। संचालन रेखा गुजराती और बैजंती पांडे ने किया। आभार आचार्य राजकुमार ने व्यक्त किया।
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- कबूतरा समाज के वीरसिंह ने कहा कि हमारे बच्चों को न तो शिक्षा मिल पा रही और न हमारी सामाजिक कदर हैं। ऐसे में मुख्य धारा से हम कैसे जुड़े पांएगे?
- लौघडिया समाज के शेरा सिंह ने कहा कि हमारा जीवन बैलगाड़ी पर शुरू होता है और बैलगाड़ी पर ही खत्म हो जाता है। अभी तक किसी भी सरकार ने उनके बारे में नहीं सोचा।
- आदिवासी गौड़ समाज के शंकर ने कहा कि मैंने बड़ी मुश्किलों से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। नौकरी की तलाश की तो जाति पूछी जाने लगी। जाति बताई तो प्रमाण मांगा जाने लगा। अभी तक उनकी समाज पहचान नहीं बन सकी हैं।
- शिल्पकार समाज के अमर ने कहा कि हम लोग बेहद कठिन काम करते हैं। मगर, अभी तक उनकी कोई जाति ही नहीं बनी है। न कोई सरकारी लाभ मिलता है।
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रहने को मिले स्थायी जगह
मेरा परिवार इधर से उधर घूमते हुए परेशान हो गया है। कोई स्थायी रहने ही नहीं देता है। बिना सरकारी सुविधाओं के अब तो दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। हमें रहने के लिए स्थायी जगह मिल जाए तो परिवार तो सुरक्षित बना रहेगा। बच्चों को भी पढ़ा लेंगे।
कल्लौ, लोहपीटा पारीछा।
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धंधा हो गया चौपट
लोग अब चाइना का सामान ज्यादा पसंद करने लगे हैं। हर चीज बाजार में पैसे की मिल रही हैं। मेरे पास लोग अब भूले-भटके ही हंसिया, खुरपी बनवाने और लोहे के सामान पर धार कराने आते हैं। परिवार का खर्चा बड़ी मुश्किलों से चलता है। पैसे न होने के कारण शादियां तक नहीं कर पा रहे हैं।
मालती, लोहपीटा पारीछा।
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एसटी का दर्जा मिले
बुंदेलखंड में मेरी जाति की जनसंख्या करीब पचास हजार हैं। बावजूद इसके मेरी जाति का एक ही व्यक्ति अभी तक सरकारी नौकरी में पहुुंच सका। वह भी बैंक में चपरासी है। मेरी जाति अनुसूचित जाति में शामिल हैं। सुविधाओं के अभाव में वे शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं। अगर, उनको अनुसूचित जाति की जगह जनजाति में शामिल कर दिया जाए तो वे भी समाज की मुख्य धारा से जल्द जुड़ सकेंगे।
रूपेश, कंजड़ जाति, गांव दातानगर।
फोटो
दस साल से जाने लगे बाजार
मैंने और मेरी जाति के लोगों ने दस साल पहले तक बाजार तक नहीं देखा था। पेट पालने के लिए लूटपाट, शिकार, भीख मांगते थे। समय के हिसाब से वे भी बदलना चाहते हैं। शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था हो जाए, तो वे भी आगे बढ़ सके।
मंगल सिंह, कंजड़ जाति, गांव परवई।
फोटो
कोई नहीं चाहता गलत काम करना
मैं मजदूरी कर घर चला रहा हूं। गलत काम करना कोई नहीं चाहता। मगर, इसके बाद भी समाज उनको गलत नजर से ही देखता है। अगर वे भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ जाए तो वे भी सम्मान का जीवन जी सकेंगे।
उमेश, कबूतरा जाति, गांव पाड़री।