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झांसी में मिले18 नए कुष्ठ रोगी, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया मरीजों का इलाज
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National leprosy eradication program
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राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में दूसरी बार कुष्ठ रोगी खोज अभियान में लगभग 917 संदिग्ध कुष्ठ रोगी मिले हैं। इन संदिग्धों की जांच करने के बाद जनपद में 18 नए कुष्ठ रोगियों की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।
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इन 18 मरीजों में से 7 मोंठ, 4 मऊरानीपुर, 3 गुरसराय, 2 चिरगांव, 1 बंगरा एवं 1 बामौर के हैं। अभियान के तहत बच्चों का भी निरीक्षण किया गया था, जिसमें खास बात यह रही कि किसी भी बच्चे में कुष्ठ के लक्षण नहीं मिले। नॉन मेडिकल असिस्टेंट विनोद कुमार मौर्या ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत संदिग्ध रोगियों की खोज के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 917 संदिग्ध कुष्ठ रोगी मिले थे। इनकी जांच के बाद 18 मरीजों में कुष्ठ रोग की पुष्टि हुई है, जिनमें 9 मरीज पौसी बैसिलरी एवं 9 मरीज मल्टी बैसिलरी के हैं। पौसी बैसिलरी की सापेक्ष मल्टी बैसिलरी से यह बीमारी जल्दी फैलती है।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधीर कुलश्रेष्ठ ने बताया कि कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया टीबी के बैक्टीरिया की प्रजाति का होता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के छींकने से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति के छींकने से एक बार में 1000 से ज्यादा बैक्टीरिया निकलते हैं। इस दौरान यदि सामने वाले व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तो उस पर यह बहुत जल्दी हावी हो जाता है। यह बैक्टीरिया सीधे जाकर नसों और मांसपेशियों पर असर करता है।
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उन्होंने बताया कि दो तरह के मरीजों के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती हैं। एक ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप में होते हैं, जिनसे कुष्ठ रोग फैलने का डर नहीं होता है। उनके लिए छह माह तक पौसी बैसिलरी की दवा दी जाती है। दूसरे ऐसे रोगी जो संक्रामक रोगी के रूप से में होते हैं, उनके लिए 12 माह तक मल्टी बैसिलरी की दवा दी जाती है। यदि कुष्ठ की शुरुआती दौर में जांच और उपचार कर लिया जाता है तो उसके बैक्टीरिया को रोका जा सकता है। इससे एक तरफ तो नए मरीज नहीं मिलेंगे और दूसरी तरफ विकलांगता की स्थिति भी पैदा नहीं होगी।