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मेरठ, दिल्ली: संगीत प्रतियोगिता-City
Updated Wed, 25 Oct 2017 07:58 PM IST
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सुर, लय और ताल ने किया कमाल
सब हेड: संगीत प्रतियोगिता में नए कलाकारों का चला जादू
क्रासर
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में हो रहा आयोजन, श्रोता मंत्रमुग्ध
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के पवेलियन हॉल में बुधवार से शुरू हुई संगीत प्रतियोगिता में नए कलाकारों ने अपनी ऐसी सुर लहरी छेड़ी कि श्रोता वाहवाह करने लगे। प्रभु श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय योग, संगीत प्रतियोगिता में नवोदित संगीतज्ञों ने शास्त्रीय गायन, गजल तथा देशभक्ति के गीत प्रस्तुत किए। आयोजन का समापन 29 अक्तूबर को होगा।
झांसी की प्रिंसी शिवहरे ने शिव रंजनी राग में भजन ‘मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा’ गाया। अनन्या लिखधारी ने ‘पंख होते तो उड़ आती रे..’, मवाना मेरठ के अमरदीप ने ‘रंजोगम में ढल रही है, हर खुशी तेरे बगैर..’, गाया। समूह गान में मुकेश कुमार, शिवम कुमार, अमरदीप व भविष्य ने राग भोपाली में देश भक्ति मेरे देशवासी कुछ काम कर ले... सुनाकर लोगों का मनमोह लिया। वादन में मवाना मेरठ के भविष्य ढुमरा, शिवम कुमार ने राग पटदीप व राग बागेश्वरी में की-पैड पर मधुर तरंग बिखेरी। दिल्ली के रोहित कुमार ने तबला पर तीन ताल, कायदा पेश किया। अन्य प्रतिभागियोें ने कत्थक, ठुमरी गायन, लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जो देर शाम तक चला। निर्णायकों में कानपुर की डा. अल्पना मिश्रा, केसी चक्रवर्ती, डा. रुचि त्रिवेदी व बांदा के उमाकांत दुबे रहे।
इससे पहले लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के मैदान में प्रभु श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य कृष्णकांत झा, आरपी गुप्ता ने लोगों को ध्यान, प्राणायाम कराया। इस अवसर पर संयोजक दिनेश भार्गव, प्रवीण सागर अग्रवाल, बृजभूषण झा, डा. सुनील दीक्षित, इंद्र प्रकाश, श्रुति राजावत, गजेंद्र राय, रवि माथुर, हरीराम वर्मा, लक्ष्मी कांत हयारण आदि मौजूद रहे।
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भारतीय संगीत को जानना जरूरी
संगीत के कद्रदान देश-विदेश में हर जगह मिल जाएंगे। ऐसे में शास्त्रीय गायन को गहराई से सीखा और इसे करियर बनाया। जरूरी है कि आज के बच्चे और युवा पढ़ाई के साथ भारतीय संगीत को भी जाने और समझे।
आभार श्रीवास्तव, शास्त्रीय गायक निवासी वाराणसी
बाक्स
ठुमरी गाना अच्छा लगता है
इंजीनियरिंग की है, लेकिन संगीत में पिछले दो वर्षों में रुचि बढ़ी है। इसमें करियर बनाने के लिए प्रतिदिन तीन से चार घंटे रियाज करते है। ठुमरी को गाना अच्छा लगता है।
विक्रम अरोरा, गायक निवासी नई दिल्ली
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सुर, लय और ताल ने किया कमाल
सब हेड: संगीत प्रतियोगिता में नए कलाकारों का चला जादू
क्रासर
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में हो रहा आयोजन, श्रोता मंत्रमुग्ध
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के पवेलियन हॉल में बुधवार से शुरू हुई संगीत प्रतियोगिता में नए कलाकारों ने अपनी ऐसी सुर लहरी छेड़ी कि श्रोता वाहवाह करने लगे। प्रभु श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय योग, संगीत प्रतियोगिता में नवोदित संगीतज्ञों ने शास्त्रीय गायन, गजल तथा देशभक्ति के गीत प्रस्तुत किए। आयोजन का समापन 29 अक्तूबर को होगा।
झांसी की प्रिंसी शिवहरे ने शिव रंजनी राग में भजन ‘मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा’ गाया। अनन्या लिखधारी ने ‘पंख होते तो उड़ आती रे..’, मवाना मेरठ के अमरदीप ने ‘रंजोगम में ढल रही है, हर खुशी तेरे बगैर..’, गाया। समूह गान में मुकेश कुमार, शिवम कुमार, अमरदीप व भविष्य ने राग भोपाली में देश भक्ति मेरे देशवासी कुछ काम कर ले... सुनाकर लोगों का मनमोह लिया। वादन में मवाना मेरठ के भविष्य ढुमरा, शिवम कुमार ने राग पटदीप व राग बागेश्वरी में की-पैड पर मधुर तरंग बिखेरी। दिल्ली के रोहित कुमार ने तबला पर तीन ताल, कायदा पेश किया। अन्य प्रतिभागियोें ने कत्थक, ठुमरी गायन, लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जो देर शाम तक चला। निर्णायकों में कानपुर की डा. अल्पना मिश्रा, केसी चक्रवर्ती, डा. रुचि त्रिवेदी व बांदा के उमाकांत दुबे रहे।
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इससे पहले लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के मैदान में प्रभु श्रीरामलाल संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य कृष्णकांत झा, आरपी गुप्ता ने लोगों को ध्यान, प्राणायाम कराया। इस अवसर पर संयोजक दिनेश भार्गव, प्रवीण सागर अग्रवाल, बृजभूषण झा, डा. सुनील दीक्षित, इंद्र प्रकाश, श्रुति राजावत, गजेंद्र राय, रवि माथुर, हरीराम वर्मा, लक्ष्मी कांत हयारण आदि मौजूद रहे।
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भारतीय संगीत को जानना जरूरी
संगीत के कद्रदान देश-विदेश में हर जगह मिल जाएंगे। ऐसे में शास्त्रीय गायन को गहराई से सीखा और इसे करियर बनाया। जरूरी है कि आज के बच्चे और युवा पढ़ाई के साथ भारतीय संगीत को भी जाने और समझे।
आभार श्रीवास्तव, शास्त्रीय गायक निवासी वाराणसी
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ठुमरी गाना अच्छा लगता है
इंजीनियरिंग की है, लेकिन संगीत में पिछले दो वर्षों में रुचि बढ़ी है। इसमें करियर बनाने के लिए प्रतिदिन तीन से चार घंटे रियाज करते है। ठुमरी को गाना अच्छा लगता है।
विक्रम अरोरा, गायक निवासी नई दिल्ली