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कांग्रेस- इमरजेंसी में बढ़ गया था उत्पादन-City
Updated Mon, 18 Sep 2017 09:39 PM IST
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इंदिरा का दूरदर्शी निर्णय था आपातकाल: गुलाम नवी
कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी ने भी किया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
देश में 1977 में लगाए गए आपात काल (इमरजेंसी) को प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के कार्यकाल का सबसे गलत निर्णय माना गया था, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने आपात काल को स्व. गांधी का दूरदर्शी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उद्योगों में जितना उत्पादन हुआ, उतना न तो पहले कभी हुआ था और न बाद में कभी हुआ।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1977 में जयप्रकाश नारायण ने फौज को विद्रोह करने, मजदूरों का काम नहीं करने, छात्रों को स्कूल नहीं जाने और टैक्स देने वाले व्यापारियों को टैक्स नहीं देने का आह्वान किया था। इसका देश भर में व्यापक असर पड़ा था। देश में संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई थी। यदि आपात काल न लगाया जाता तो देश के हालात बहुत खराब हो जाते। इसकी आलोचना हुई, लेकिन जानकर आश्चर्य होगा कि उस समय जो उद्योग चल रहे थे, उनका उत्पादन अचानक बढ़ गया था। मजदूर समय से काम पर आने लगे थे और ड्यूटी के दौरान सिर्फ काम करते थे। अनुशासन भी बढ़ गया था। ऐसा इसलिए करना पड़ा था, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष निजिलिंगप्पा ने स्व. गांधी को पार्टी ने निलंबित कर दिया था। गनीमत रही कि अन्य दलों के समर्थन से सरकार तो बच गई, लेकिन देश में अस्थिरता का माहौल बन गया था।
वहीं, छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि इमरजेंसी 25 जून 1975 को लगाई गई थी, क्योंकि कोई विकल्प नहीं था। इमरजेंसी लगाने का संविधान में उल्लेख है। स्थिति यह थी कि जब फौज को विद्रोह करने, मजदूरों का काम नहीं करने और छात्रों को स्कूल नहीं जाने का आह्वान किया गया था तो देश में अस्थिरता का माहौल बन गया था। राज्यों में यदि सरकार अस्थिर है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, लेकिन केंद्र में इसका प्रावधान नहीं है। कोई विकल्प न देख आपात काल लगाया गया था। इसके ढाई साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला और स्व. गांधी सत्ता में आ गईं थीं।
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कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी ने भी किया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
देश में 1977 में लगाए गए आपात काल (इमरजेंसी) को प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के कार्यकाल का सबसे गलत निर्णय माना गया था, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने आपात काल को स्व. गांधी का दूरदर्शी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उद्योगों में जितना उत्पादन हुआ, उतना न तो पहले कभी हुआ था और न बाद में कभी हुआ।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1977 में जयप्रकाश नारायण ने फौज को विद्रोह करने, मजदूरों का काम नहीं करने, छात्रों को स्कूल नहीं जाने और टैक्स देने वाले व्यापारियों को टैक्स नहीं देने का आह्वान किया था। इसका देश भर में व्यापक असर पड़ा था। देश में संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई थी। यदि आपात काल न लगाया जाता तो देश के हालात बहुत खराब हो जाते। इसकी आलोचना हुई, लेकिन जानकर आश्चर्य होगा कि उस समय जो उद्योग चल रहे थे, उनका उत्पादन अचानक बढ़ गया था। मजदूर समय से काम पर आने लगे थे और ड्यूटी के दौरान सिर्फ काम करते थे। अनुशासन भी बढ़ गया था। ऐसा इसलिए करना पड़ा था, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष निजिलिंगप्पा ने स्व. गांधी को पार्टी ने निलंबित कर दिया था। गनीमत रही कि अन्य दलों के समर्थन से सरकार तो बच गई, लेकिन देश में अस्थिरता का माहौल बन गया था।
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वहीं, छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि इमरजेंसी 25 जून 1975 को लगाई गई थी, क्योंकि कोई विकल्प नहीं था। इमरजेंसी लगाने का संविधान में उल्लेख है। स्थिति यह थी कि जब फौज को विद्रोह करने, मजदूरों का काम नहीं करने और छात्रों को स्कूल नहीं जाने का आह्वान किया गया था तो देश में अस्थिरता का माहौल बन गया था। राज्यों में यदि सरकार अस्थिर है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, लेकिन केंद्र में इसका प्रावधान नहीं है। कोई विकल्प न देख आपात काल लगाया गया था। इसके ढाई साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला और स्व. गांधी सत्ता में आ गईं थीं।
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