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हिम्मत नहीं हारी चाय वाली लीलावती
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 08 May 2016 12:45 AM IST
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कोतवाली चौराहे पर चाय की दूकान चलाकर बच्चों का पालन पोषण करती हैं लीलावती।
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पति की मौत के बाद लीलावती को एक बार तो ऐसा लगा कि जैसे उसका परिवार ही टूट जाएगा। आमदनी का कोई जरिया न होने से बच्चों को पालना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया और फुटपाथ पर ही चाय की दूकान खोल ली।
अब वह गुमटी में चाय की दूकान चलाती हैं। इसी की कमाई से एक बेटी की शादी कर दी और एक बेटी और बेटा को पढ़ा रही हैं। मदर्स डे की पूर्व संध्या पर ऊर्दूबाजार निवासी लीलावती के संघर्ष भरे जीवन के बारे में अमर उजाला ने जानने का प्रयास किया तो अपने अतीत को याद कर वह फफक पड़ीं।
वह कहती हैं कि कोतवाली चौराहे पर उनकी बेशकीमती जमीनों पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया। मुकदमे के चक्कर में उनके पति परदेश से आकर घर पर ही फंस गए। चिंता में वह गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए।
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पति के इलाज में उनके गहने तक बिक गए और करीब 12 साल पहले उनकी मौत हो गई। घर में चूल्हा जलने तक का संकट आ गया। दो बेटे और दो बेटियों को पालना मुश्किल हो गया। लेकिन लीलावती ने हिम्मत से काम लिया और वह कोतवाली चौराहे के पास फुटपाथ पर ही चाय की दूकान खोल लीं।
दूकान की आमदनी से अभी हाल ही में बड़ी बेटी की शादी कर दी। छोटा बेटा पिंटू और बेटी हाईस्कूल में पढ़ रहे हैं। लीलावती कहती हैं कि दूकान से किसी तरह परिवार का खर्च चल रहा है। विधवा या समाजवादी पेंशन जैसी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिला है।
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अब वह गुमटी में चाय की दूकान चलाती हैं। इसी की कमाई से एक बेटी की शादी कर दी और एक बेटी और बेटा को पढ़ा रही हैं। मदर्स डे की पूर्व संध्या पर ऊर्दूबाजार निवासी लीलावती के संघर्ष भरे जीवन के बारे में अमर उजाला ने जानने का प्रयास किया तो अपने अतीत को याद कर वह फफक पड़ीं।
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वह कहती हैं कि कोतवाली चौराहे पर उनकी बेशकीमती जमीनों पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया। मुकदमे के चक्कर में उनके पति परदेश से आकर घर पर ही फंस गए। चिंता में वह गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए।
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पति के इलाज में उनके गहने तक बिक गए और करीब 12 साल पहले उनकी मौत हो गई। घर में चूल्हा जलने तक का संकट आ गया। दो बेटे और दो बेटियों को पालना मुश्किल हो गया। लेकिन लीलावती ने हिम्मत से काम लिया और वह कोतवाली चौराहे के पास फुटपाथ पर ही चाय की दूकान खोल लीं।
दूकान की आमदनी से अभी हाल ही में बड़ी बेटी की शादी कर दी। छोटा बेटा पिंटू और बेटी हाईस्कूल में पढ़ रहे हैं। लीलावती कहती हैं कि दूकान से किसी तरह परिवार का खर्च चल रहा है। विधवा या समाजवादी पेंशन जैसी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिला है।