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बेटा क्वारन्टीन में था तो सिपाही बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि
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जलालपुर। कोरोना से मरे अधेड़ का बेटा अंतिम संस्कार में शामिल न हो सका। वह महज 20 किमी दूर ही था लेकिन क्वारंटीन में होने के कारण पिता की अंतिम यात्रा में नहीं पहुंच सका। बड़ी बेटी ने रूढ़ियों को तोड़ते हुए पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुरूप पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मौजूदगी में की गई।
केराकत तहसील क्षेत्र के कादीपुर निवासी शख्स (47) मुंबई के कांदिवली की एक फैक्ट्री में काम करता था। लॉक डाउन में फैक्ट्री बंद होने पर 15 वर्षीय बेटे के साथ श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 16 मई को वाराणसी आ गया। वहां से रोडवेज बस में जलालपुर के बयालसी इंटर कॉलेज स्थित क्वारंटीन सेंटर पहुंचा। जांच के दौरान खांसी आने पर उसे यहीं रोक लिया गया जबकि बेटे को होम क्वारंटीन में भेज दिया गया। 23 मई को उसकी क्वारंटीन सेंटर में ही मौत हो गई। मौत के बाद उसकी कोरोना पाजिटिव की रिपोर्ट आई। शव को पीपीई किट में रखकर जौनपुर के रामघाट ले जाया गया। गांव के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन बेटे को अंतिम संस्कार में जाने की अनुमति नहीं दी गई। बड़ी बेटी पिता को पीपीई किट पहनकर मुखाग्नि दी। प्रोटोकॉल के तहत उसे भी निकट नहीं जाने दिया गया। बेटी यूपी पुलिस में सिपाही है और फैजाबाद में तैनात है।इस दौरान एसडीएम केराकत चंद्रभान पाठक, कोतवाल बिंद कुमार आदि मौजूद रहे।
पिता की सेवा का आखिरी मौका कैसे छोड़ती
पिता की मौत से बेसुध बेटी ने क्वारंटीन सेंटर में पिता के उपचार नही होने का आरोप लगाया। कहा कि उनकी तबीयत तीन दिन पहले से ही खराब थी। खासी, बुखार और सांस की तकलीफ थी, जिसकी अधिकारियों को दी गई थी। नोडल अधिकारी ने चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखा था। इसके बावजूद उन्हें चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली। जब पिताजी के स्वास्थ्य के बारे में सुना था, तभी से मन में बेचैनी बढ़ गई थी। पिता से मिलने के लिए ही छुट्टी लेकर घर के लिए निकली थी, लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले ही मनहूस खबर मिल गई। पूरे परिवार को इस बात का मलाल है कि सब कुछ होते हुए भी हम अंतिम समय में उनकी सेवा नहीं कर सके। मुखाग्नि का ही मौका मिला तो उसे कैसे जाने देती।
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केराकत तहसील क्षेत्र के कादीपुर निवासी शख्स (47) मुंबई के कांदिवली की एक फैक्ट्री में काम करता था। लॉक डाउन में फैक्ट्री बंद होने पर 15 वर्षीय बेटे के साथ श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 16 मई को वाराणसी आ गया। वहां से रोडवेज बस में जलालपुर के बयालसी इंटर कॉलेज स्थित क्वारंटीन सेंटर पहुंचा। जांच के दौरान खांसी आने पर उसे यहीं रोक लिया गया जबकि बेटे को होम क्वारंटीन में भेज दिया गया। 23 मई को उसकी क्वारंटीन सेंटर में ही मौत हो गई। मौत के बाद उसकी कोरोना पाजिटिव की रिपोर्ट आई। शव को पीपीई किट में रखकर जौनपुर के रामघाट ले जाया गया। गांव के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन बेटे को अंतिम संस्कार में जाने की अनुमति नहीं दी गई। बड़ी बेटी पिता को पीपीई किट पहनकर मुखाग्नि दी। प्रोटोकॉल के तहत उसे भी निकट नहीं जाने दिया गया। बेटी यूपी पुलिस में सिपाही है और फैजाबाद में तैनात है।इस दौरान एसडीएम केराकत चंद्रभान पाठक, कोतवाल बिंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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पिता की सेवा का आखिरी मौका कैसे छोड़ती
पिता की मौत से बेसुध बेटी ने क्वारंटीन सेंटर में पिता के उपचार नही होने का आरोप लगाया। कहा कि उनकी तबीयत तीन दिन पहले से ही खराब थी। खासी, बुखार और सांस की तकलीफ थी, जिसकी अधिकारियों को दी गई थी। नोडल अधिकारी ने चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखा था। इसके बावजूद उन्हें चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली। जब पिताजी के स्वास्थ्य के बारे में सुना था, तभी से मन में बेचैनी बढ़ गई थी। पिता से मिलने के लिए ही छुट्टी लेकर घर के लिए निकली थी, लेकिन वहां तक पहुंचने से पहले ही मनहूस खबर मिल गई। पूरे परिवार को इस बात का मलाल है कि सब कुछ होते हुए भी हम अंतिम समय में उनकी सेवा नहीं कर सके। मुखाग्नि का ही मौका मिला तो उसे कैसे जाने देती।
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