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Jaunpur News: जब जिम्मेदार भूल गए पीड़ा तो ग्रामीणों ने उठाया पुल निर्माण का बीड़ा

Sat, 29 Jul 2023 11:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jul 2023 11:52 PM IST
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When the responsible forgot the pain, the villagers took up the task of building the bridge
कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों... ये पंक्तियां जौनपुर जिले के बरसठी क्षेत्र के उन ग्रामीणों पर ठीक बैठती हैं जिन्होंने चंदा मांगकर करीब 40 लाख की लागत वाला पुल बनवाना शुरू किया है। निर्माण भी 90 फीसदी हो चुका है, बस स्लैब ढालना बाकी रह गया है। कभी लकड़ी के पुल से नदी पार करने वाले लोग अब जल्दी ही पुल से होकर बगैर किसी डर, भय के गुजरेंगे।
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मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के भन्नौर-बेलवां मार्ग पर बसुई नदी है। इस मार्ग से जुड़े करीब 25 गांवों के लोगों को हैदरगंज धावा घाट से नदी पार करने के लिए या तो बांस के बने पुल से होकर गुजरना पड़ता था या फिर वहां से आठ किमी दूर जाना पड़ता था। लकड़ी के पुल से गिरकर लोगों की मौत भी हो जाती थी। इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने कई बार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के सामने रखा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं मिला। ऐसे में धावा के रहने वाले गिरिजाशंकर यादव उर्फ पप्पू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जनसहयोग से पुल बनवाने की रणनीति बनाया और अक्तूबर 2022 में पुल का शिलान्यास कर दिया गया। पुल के पावे तैयार हो गए हैं अब स्लैब ढालना है। सेना से सेवानिवृत्त जेपी सिंह बताते हैं कि इस पुल में जनसहयोग ही है। लोगों की एकता में बड़ी ताकत होती है। उसी का नतीजा यह पुल है।
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हर गांव से मिलता है सहयोग, ग्रामीणों में उत्साह

पप्पू यादव बताते हैं कि पुल के निर्माण में हर गांव से सहयोग मिल रहा है। जो जिस लायक है उसके अनुसार सहयोग दे रहा है। बताया कि पहले जब इसकी शुरूआत की जानी थी तो वरिष्ठ लोगों से चर्चा की गई। चर्चा के बीच कुछ लोगों ने भारत रत्न पं. मदन मोहन मोलवीय जी का उदाहरण देते हुए उत्साह बढ़ाए। फिर क्या एक-एक कर कदम बढ़ते गए और आज पुल बनकर तैयार होने की स्थिति में है। पुल बनने से करीब 25 गांवों की 50 हजार से अधिक की आबादी लाभान्वित होगी।
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20 लाख हुए हैं खर्च, अभी इतने की ही जरूरत

पुल के निर्माण में कोई सौ तो कोई हजार रुपये का आर्थिक सहयोग दिया है। कुछ लोगों ने सीमेंट, सरिया, गिट्टी, बालू आदि का सहयोग दिए हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब 20 लाख रुपये अब तक खर्च हुए हैं, स्लैब ढालने में भी इतने की ही जरूरत है। इस अभियान से जुड़े लोगों ने आम जन से सहयोग मांगा। कहा कि यथासंभव सामान का सहयोग करें तो ग्रामीणों की समस्या दूर हो जाएगी।
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