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कोरोना ने पीछा छोड़ा तो बाकी बीमारियों ने घेरा
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जौनपुर। कोरोना से संक्रमित मरीज रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी कई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना से उबरने के बाद लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसी को भूलने की समस्या तो किसी को रात में खांसी आने और पैदल चलने पर सांस फूलना, सिर दर्द, शरीर का कोई अंग सुन्न पड़ जाना, थकावट, कमजोरी या नींद न आने की समस्या है। कोरोना के बाद दूसरी बीमारियों की चपेट में आने पर उन्हें अस्पतालों में समुचित इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। पिछली लहर में ऐसे मरीजों के लिए ओपीडी शुरू की गई थी, लेकिन इस बार अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे ऐसे मरीजों की परेशानी और भी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड संक्रमण के दौरान कुछ मरीजों में ऑक्सीजन की काफी कमी हो जाती है जिसके कारण उनके मस्तिष्क पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति को हाईपोक्सिक ब्रेन इंजरी कहा जाता है और इसके होने पर मरीज की रिकवरी में काफी दिक्कतें आती है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण के बाद सिरदर्द, लकवा व मिर्गी होने की संभावना का बढ़ जाना, सूंघने की क्षमता कम होना, थकावट व कमजोरी, यादाश्त में कमी, शरीर के किसी अंग का सुन्न पड़ना, नींद न आना या नसों में इस तरह की शिथिलता का पैदा होना कि बिना सहारे चल पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी समस्याएं संक्रमण के बाद कई मरीजों में देखी जा रही हैं।
चिकित्सक मानते हैं कि यह लक्षण अगर नेगेटिव होने के बाद भी कई दिनों तक ठीक नहीं होते हैं तो मरीज को पोस्ट कोविड रिकवरी की अत्यंत आवश्यकता है। जो लोग पहले से ही न्यूरो संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं और कोरोना की चपेट में आए हैं, उन्हें पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम की और भी आवश्यकता है क्योंकि संक्रमण के कारण उनमें पहले की बीमारियों का फिर से उत्पन्न होने या गंभीर होने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि पोस्ट कोविड समस्याओं के समाधान के लिए जिला अस्पताल में छह बेड का वार्ड बनाया गया है। इसमें स्टाफ की भी तैनाती कर दी गई है। अभी कोई विशेष मामला नहीं है। ज्यादातर लोग कमजोरी की समस्या बता रहे हैं, जिन्हें डॉक्टर परामर्श दे रहे हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर कोविड कमांड सेंटर में फोन कर संपर्क किया जा सकता है। टेली मेडिसिन सेवा के माध्यम से भी मदद की जा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड संक्रमण के दौरान कुछ मरीजों में ऑक्सीजन की काफी कमी हो जाती है जिसके कारण उनके मस्तिष्क पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति को हाईपोक्सिक ब्रेन इंजरी कहा जाता है और इसके होने पर मरीज की रिकवरी में काफी दिक्कतें आती है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण के बाद सिरदर्द, लकवा व मिर्गी होने की संभावना का बढ़ जाना, सूंघने की क्षमता कम होना, थकावट व कमजोरी, यादाश्त में कमी, शरीर के किसी अंग का सुन्न पड़ना, नींद न आना या नसों में इस तरह की शिथिलता का पैदा होना कि बिना सहारे चल पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी समस्याएं संक्रमण के बाद कई मरीजों में देखी जा रही हैं।
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चिकित्सक मानते हैं कि यह लक्षण अगर नेगेटिव होने के बाद भी कई दिनों तक ठीक नहीं होते हैं तो मरीज को पोस्ट कोविड रिकवरी की अत्यंत आवश्यकता है। जो लोग पहले से ही न्यूरो संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं और कोरोना की चपेट में आए हैं, उन्हें पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम की और भी आवश्यकता है क्योंकि संक्रमण के कारण उनमें पहले की बीमारियों का फिर से उत्पन्न होने या गंभीर होने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि पोस्ट कोविड समस्याओं के समाधान के लिए जिला अस्पताल में छह बेड का वार्ड बनाया गया है। इसमें स्टाफ की भी तैनाती कर दी गई है। अभी कोई विशेष मामला नहीं है। ज्यादातर लोग कमजोरी की समस्या बता रहे हैं, जिन्हें डॉक्टर परामर्श दे रहे हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर कोविड कमांड सेंटर में फोन कर संपर्क किया जा सकता है। टेली मेडिसिन सेवा के माध्यम से भी मदद की जा रही है।
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