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Jaunpur News: रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं

Tue, 19 Mar 2024 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:10 AM IST
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What is the use of writing names on sand, one wave will come and nothing will be left.
जौनपुर। जिले के बीआरपी इंटर कॉलेज के मैदान पर चल रहे तीन दिवसीय अमर उजाला गांव महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को काव्य सरिता प्रवाहित होती रही। देश के नामचीन कवियों ने हास्य, वीर रस, शृंगार रस की रचनाओं की प्रस्तुति से लोगों को उत्साहित कर दिया। वहीं, संजीदा विषयों पर कवियों के व्यंग्य बाण ने लोगों को सोचने पर भी मजबूर किया। रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं जैसी कविताएं सुनकर श्रोताओं ने वाहवाही दी।
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काव्य कैफे संध्या में जिले के उच्चाधिकारी, संभ्रांत नागरिक और नामीगिरामी कवियों का संगम हुआ। सुगंध बिखेरती निशा में काव्य संध्या का शुभारंभ हुआ जो देर रात तक चलता रहा। युवा कवि विकास बौखल ने हास्य कविता से समारोह का शुभारंभ किया। कवयित्री मणिका दुबे ने सरस्वती वंदना की। काव्य मंच का संचालन कर रहे विकास बौखल की रचना ''परिचय प्रथम कराया गुरुजी का तब, हमने कहा जय हो भाग्य विधाता की''.. पर लोग खिलखिला उठे।
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काव्य मंच की एकमात्र युवा कवयित्री मणिका दुबे ने ''शहर के शोर में वीरानियां हैं, यहां तुम हो मगर तनहाइयां हैं''। सुनाकर तालियां बंटोरी। मणिका ने एक से बढ़ कर एक शृंगार रस की कविताएं सुनाईं। जब उन्होंने प्रतिनिधि गजल के शेर पढ़े, तो लोग दाद दिए बगैर नहीं रह सके। वीररस के कवि अशोक चारण ने जब मंच से शहीद भगत सिंह की जीवनी पर रचित कविता ''वो क्रांति गगन अब भी भारत की पुरवाई में जीवित है, भगतसिंह अब भी भारत की तरुणाई में जीवित है'' पढ़ा तो सामने बैठे लोगों के रोंगटे खडे़ हो गए। अशोक चारण ने न सिर्फ शहीद भगत सिंह के बारे में पढ़ा बल्कि प्रभु श्रीराम पर भी दो से तीन कविताएं पढ़ीं। इसके बाद माहौल कुछ पलों के लिए भक्तिमय हो गया और सामने बैठे लोग जय श्री राम के नारे लगाने लगे। अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने माइक संभाला तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। डॉ. सक्सेना ने विनम्रता से सभी को प्रणाम किया और मोबाइल की रिकॉडिंग बंद करवा दी। इसके बाद उन्होंने पढ़ा रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं, ''दिले बीमार सही हो वो दवाएं दे- दे। सभी पे प्यार लुटाऊं ये दुआएं दे दे''। तू हवा है तो कर ले अपने हवाले मुझको, इसके पहले कि कोई और बहाए मुझको, प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं आदि कविताएं सुनाईं, जिस पर पूरा मैदान दोनों हाथ उठाकर तालियां बजाने लगा। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़, पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल शर्मा व सभी कवियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर काव्य कैफे की शुरुआत की। समापन देर रात 10.30 बजे हुआ। विशिष्ट अतिथि एसडीएम न्यायिक डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव व उनकी पत्नी डॉ. अल्का ने सभी कवियों को सम्मानित किया। कवियों ने अमर उजाला का आभार व्यक्त किया।
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