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Jaunpur News: पूविवि विद्यार्थियों और शिक्षकों के शोध को कराएगा पेटेंट
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करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षकों और विद्यार्थियों के शोध को अब पेटेंट कराएगा। पेटेंट में आने वाला खर्च विश्वविद्यालय खुद वहन करेगा। वहीं, शोध का क्रेडिट छात्र-छात्राओं और उनके निर्देशक को दिया जाएगा। शोध को पेटेंट कराने के बाद विश्वविद्यालय उसे अपनी संपत्ति बना पाएगा।
विश्वविद्यालय में होने वाले शोध को पेटेंट कराने में छात्र और शिक्षक गंभीरता नहीं दिखाते। इसके पीछे भाग दौड़ करने के साथ मोटी रकम खर्च करना पड़ती है। एक शोध को पेटेंट कराने में एक लाख से ज्यादा खर्च आता है। कुलपति प्रो. वंदना सिंह के निर्देश पर अब विश्वविद्यालय ने शोध को पेटेंट कराने का निर्णय लिया है। शोधपत्र जमा होने के बाद विश्वविद्यालय पेटेंट के लिए कार्यवाही पूरी करेगा। शोध का पेटेंट विश्वविद्यालय के नाम से कराया जाएगा लेकिन उसका क्रेडिट छात्र-छात्राओं और शोध निर्देशक को मिलेगा। आईपीआर सेल के माध्यम से विश्वविद्यालय शोध को पेटेंट कराने का काम करेगा। शोध को पेटेंट कराने से विश्वविद्यालय को रैंकिंग में भी फायदा मिलेगा। हाल में नैक से विश्वविद्यालय को ए प्लस ग्रेड मिला है। अब विश्वविद्यालय एनआईआरएफ के लिए भी आवेदन करने वाला है। विश्व रैंकिंग में शोध पेटेंट का काफी महत्व होता है। रैंकिंग के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए शोध पेटेंट का उल्लेख किया जाता है। शोध में विश्वविद्यालय के संसाधनों का भी उपयोग किया जाता है लेकिन उसका क्रेडिट नहीं मिलता है। जिसको देखते विश्वविद्यालय ने शोध को पेटेंट कराने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय में होने वाले शोध को पेटेंट कराया जाएगा। इस पर आने वाला खर्च विश्वविद्यालय स्वयं उठाएगा। इसका क्रेडिट शोधार्थियों और उनके निर्देशकों को भी मिलेगा। इसकी शुरुआत कर दी गई है। दो शिक्षकों के शोध को पेटेंट कराया गया है। - डाॅ. प्रमोद कुमार यादव, निदेशक रज्जू भैया संस्थान, पूविवि जौनपुर
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विश्वविद्यालय में होने वाले शोध को पेटेंट कराने में छात्र और शिक्षक गंभीरता नहीं दिखाते। इसके पीछे भाग दौड़ करने के साथ मोटी रकम खर्च करना पड़ती है। एक शोध को पेटेंट कराने में एक लाख से ज्यादा खर्च आता है। कुलपति प्रो. वंदना सिंह के निर्देश पर अब विश्वविद्यालय ने शोध को पेटेंट कराने का निर्णय लिया है। शोधपत्र जमा होने के बाद विश्वविद्यालय पेटेंट के लिए कार्यवाही पूरी करेगा। शोध का पेटेंट विश्वविद्यालय के नाम से कराया जाएगा लेकिन उसका क्रेडिट छात्र-छात्राओं और शोध निर्देशक को मिलेगा। आईपीआर सेल के माध्यम से विश्वविद्यालय शोध को पेटेंट कराने का काम करेगा। शोध को पेटेंट कराने से विश्वविद्यालय को रैंकिंग में भी फायदा मिलेगा। हाल में नैक से विश्वविद्यालय को ए प्लस ग्रेड मिला है। अब विश्वविद्यालय एनआईआरएफ के लिए भी आवेदन करने वाला है। विश्व रैंकिंग में शोध पेटेंट का काफी महत्व होता है। रैंकिंग के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए शोध पेटेंट का उल्लेख किया जाता है। शोध में विश्वविद्यालय के संसाधनों का भी उपयोग किया जाता है लेकिन उसका क्रेडिट नहीं मिलता है। जिसको देखते विश्वविद्यालय ने शोध को पेटेंट कराने का निर्णय लिया है।
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विश्वविद्यालय में होने वाले शोध को पेटेंट कराया जाएगा। इस पर आने वाला खर्च विश्वविद्यालय स्वयं उठाएगा। इसका क्रेडिट शोधार्थियों और उनके निर्देशकों को भी मिलेगा। इसकी शुरुआत कर दी गई है। दो शिक्षकों के शोध को पेटेंट कराया गया है। - डाॅ. प्रमोद कुमार यादव, निदेशक रज्जू भैया संस्थान, पूविवि जौनपुर
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